Magh Mela Controversy
Magh Mela Controversy: प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में श्रद्धा और भक्ति के बीच एक बड़ा प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्राधिकरण के बीच तनाव अब चरम पर पहुँच चुका है। मौनी अमावस्या के दिन हुए एक घटनाक्रम को लेकर मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें एक नया नोटिस थमाया है। इस नोटिस में न केवल उनकी संस्था के भूमि आवंटन को रद्द करने की बात कही गई है, बल्कि उन्हें भविष्य में होने वाले माघ मेलों से आजीवन प्रतिबंधित करने की चेतावनी भी दी गई है। प्रशासन ने इस पूरे मामले पर स्वामी जी से 24 घंटे के भीतर जवाब तलब किया है।
मेला प्राधिकरण ने अपने नोटिस में मौनी अमावस्या की संवेदनशीलता का हवाला दिया है। प्रशासन का आरोप है कि उस दिन जब लाखों की भीड़ संगम क्षेत्र में मौजूद थी और पुलिस वाहनों के प्रवेश पर रोक की घोषणा कर रही थी, तब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपनी बग्घी के साथ ‘संगम नोड’ तक जाने का प्रयास किया। प्रशासन के अनुसार, इस कृत्य की वजह से वहां भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई थी और जनहानि का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया था। नोटिस में कहा गया है कि उनके इस व्यवहार से माघ मेले की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह छिन्न-भिन्न हो गई, जो एक अक्षम्य अपराध की श्रेणी में आता है।
नोटिस में एक और महत्वपूर्ण बिंदु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा उपयोग किए जा रहे ‘शंकराचार्य’ पद को लेकर है। मेला प्राधिकरण ने दावा किया है कि शिविरों और मेले में लगाए गए उन बोर्डों, जिनमें उन्हें शंकराचार्य बताया गया है, वे सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के आदेशों की अवमानना की श्रेणी में आते हैं। प्रशासन ने पूछा है कि धार्मिक मर्यादा और अदालती आदेशों के उल्लंघन के चलते क्यों न उनकी संस्था को दी गई सभी सुविधाएं और भूमि आवंटन तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए जाएं और उन्हें मेले से हमेशा के लिए निष्कासित कर दिया जाए।
इस प्रशासनिक कार्रवाई पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खेमे ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनके मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगिराज सरकार ने आरोप लगाया कि प्रशासन बदले की भावना से काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि नोटिस पर 18 जनवरी की तारीख अंकित है, लेकिन इसे जानबूझकर 21 जनवरी की रात को शिविर के बाहर चोरी-छिपे चस्पा किया गया। शंकराचार्य के शिष्यों का दावा है कि प्रशासन बैक डेट में नोटिस भेजकर यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि स्वामी जी ने समय पर जवाब नहीं दिया। उन्होंने इसे जिला प्रशासन की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।
मीडिया प्रभारी ने प्रशासन के बग्घी वाले आरोपों को पूरी तरह भ्रामक और मनगढ़ंत बताया है। उन्होंने तर्क दिया कि बग्घी में बड़े पहिए और घोड़े होते हैं, जबकि शंकराचार्य के आश्रम या शिविर में ऐसी कोई गाड़ी मौजूद ही नहीं है। उन्होंने कहा, “जिला प्रशासन जिस बग्घी की बात कर रहा है, उसका कोई अस्तित्व हमारे यहाँ नहीं है। वहां लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच से यह साफ हो जाएगा कि प्रशासन झूठ बोल रहा है।” उन्होंने चेतावनी दी कि मेला प्रशासन को धार्मिक कार्यों में अनुचित हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए, अन्यथा इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं।
प्रयागराज माघ मेले का यह विवाद अब केवल एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसने धार्मिक और कानूनी मोड़ ले लिया है। एक ओर प्रशासन सुरक्षा और नियमों की दुहाई दे रहा है, वहीं दूसरी ओर शंकराचार्य खेमा इसे अपनी धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बता रहा है। 24 घंटे की यह समयसीमा समाप्त होने के बाद यह देखना होगा कि मेला प्राधिकरण क्या बड़ा कदम उठाता है और क्या वास्तव में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को संगम की रेती से आजीवन दूर कर दिया जाएगा।
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