Maharashtra Election
Maharashtra Election: महाराष्ट्र के बहुप्रतीक्षित निकाय चुनाव के परिणामों ने राज्य की राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन चुनावों में शानदार प्रदर्शन करते हुए बड़ी जीत दर्ज की है। विशेष रूप से देश की सबसे अमीर नगर पालिका, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनावों में भाजपा ने अकेले 89 सीटों पर कब्जा जमाया है। वहीं, सत्ता में भाजपा के सहयोगी दलों का प्रदर्शन काफी फीका रहा। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना को महज 29 सीटें मिलीं, जबकि उपमुख्यमंत्री अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) मात्र 3 सीटों पर सिमट कर रह गई। इन नतीजों ने महायुति गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
इन चुनाव परिणामों पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भाजपा की रणनीति पर बड़ा हमला बोला है। रविवार (18 जनवरी, 2026) को सिब्बल ने कहा कि ये नतीजे केवल महाराष्ट्र के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के चुनावों के लिए भी एक बड़ा संकेत हैं। उन्होंने भाजपा की कार्यशैली का विश्लेषण करते हुए इसे ‘पहले पास और फिर वनवास’ की नीति करार दिया। सिब्बल के अनुसार, भाजपा उन राज्यों में छोटी क्षेत्रीय पार्टियों के साथ समझौता करती है जहाँ वह खुद को कमजोर पाती है, लेकिन सत्ता में आने के बाद वह उन्हीं सहयोगियों को धीरे-धीरे हाशिए पर धकेल देती है और उनका वजूद खत्म कर देती है।
कपिल सिब्बल ने विशेष रूप से उपमुख्यमंत्री अजित पवार पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने भाजपा के साथ हाथ मिलाकर अपना राजनीतिक भविष्य दांव पर लगा दिया है। सिब्बल ने तंज कसते हुए कहा कि अजित पवार जो कभी एक पक्ष में स्थिर नहीं रहे, आज निकाय चुनाव में केवल तीन सीटों पर सिमट गए हैं। उन्होंने कहा कि अजित पवार ने सत्ता के लालच में भाजपा के साथ समझौता तो कर लिया और उपमुख्यमंत्री की कुर्सी भी पा ली, लेकिन जमीन पर उनका जनाधार पूरी तरह खिसक चुका है। सिब्बल के मुताबिक, यह चुनाव परिणाम अजित पवार के राजनीतिक पतन की शुरुआत है।
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर हमला करते हुए सिब्बल ने कहा कि आज महाराष्ट्र की स्थिति ऐसी है कि मुख्यमंत्री को भी भाजपा का डर सता रहा है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव नतीजे आने के बाद शिंदे को अपने पार्षदों को होटल में सुरक्षित रखना पड़ रहा है क्योंकि उन्हें डर है कि उनकी सहयोगी पार्टी (भाजपा) ही उनके पार्षदों को खरीद सकती है या तोड़ सकती है। सिब्बल ने कहा कि जब सत्ता में बैठे मुख्य चेहरे को ही अपने सहयोगियों पर भरोसा न हो, तो समझा जा सकता है कि वहां लोकतंत्र और गठबंधन की क्या स्थिति है।
सिब्बल ने अपने बयान के अंत में पूरे विपक्ष और क्षेत्रीय दलों को एक कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल अपने फायदे के बारे में सोचती है और क्षेत्रीय दलों का इस्तेमाल सीढ़ी की तरह करती है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जो भी दल या नेता भाजपा के साथ समझौता करेगा, उसे अस्थायी रूप से सत्ता या पद तो मिल सकता है, लेकिन लंबी अवधि में उनका भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। सिब्बल ने विपक्षी दलों से एकजुट होने और भाजपा की इस ‘हड़पने वाली राजनीति’ से सावधान रहने का आह्वान किया है।
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