Maharashtra Election Results
Maharashtra Election Results 2026 : महाराष्ट्र की राजनीति में ‘मिनी विधानसभा’ के रूप में पहचाने जाने वाले 29 महानगरपालिकाओं के चुनावी दंगल का आज सबसे अहम और निर्णायक दिन है। गुरुवार को राज्य भर में हुए शांतिपूर्ण मतदान के बाद, आज यानी शुक्रवार की सुबह 10 बजे से वोटों की गिनती शुरू होने जा रही है। इन चुनावों को न केवल स्थानीय विकास के नजरिए से देखा जा रहा है, बल्कि यह आगामी विधानसभा चुनावों के लिए भी एक मजबूत संकेत देंगे। राज्य में सत्तासीन महायुति (भाजपा, शिवसेना-शिंदे गुट, राकांपा-अजीत पवार) और विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) (कांग्रेस, शिवसेना-यूबीटी, राकांपा-शरद पवार) के लिए यह चुनाव अपनी जमीनी पकड़ और लोकप्रियता को साबित करने का एक बड़ा ‘लिटमस टेस्ट’ है।
पूरे देश की नजरें बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के नतीजों पर टिकी हैं, जिसे देश का सबसे अमीर नगर निकाय माना जाता है। पिछले दो दशकों से अधिक समय से यहां शिवसेना का निर्विवाद वर्चस्व रहा है। हालांकि, पार्टी में हुई ऐतिहासिक फूट के बाद यह पहला मौका है जब मुंबई के मतदाताओं ने उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बीच स्पष्ट रूप से अपना जनादेश दर्ज कराया है। एग्जिट पोल्स और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीएमसी के नतीजे यह तय करेंगे कि मुंबई का असली ‘किंग’ कौन है। इसके अलावा, राज्य के अन्य बड़े शहरों जैसे पुणे, नागपुर, ठाणे, नासिक और छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) के परिणाम भी यह स्पष्ट करेंगे कि शहरी मतदाता विकास के मुद्दे पर किस गठबंधन के साथ हैं।
महाराष्ट्र के 29 नगर निकायों में मतगणना की प्रक्रिया आज सुबह 10 बजे से कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू होगी। राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, राज्य भर के 893 वार्डों में कुल 2,869 सीटों के लिए मतदान हुआ है। इसमें अकेले बीएमसी की 227 सीटें शामिल हैं। इन चुनावों में कुल 15,931 उम्मीदवारों की राजनीतिक साख दांव पर लगी है। प्रशासन ने मतगणना केंद्रों पर किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया है। मुंबई में ही 23 अलग-अलग केंद्रों पर वोटों की गिनती की जाएगी, जहां सीसीटीवी और डिजिटल निगरानी के जरिए पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है।
इन नगर निकाय चुनावों में लगभग 3.48 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। राजनीतिक रूप से यह चुनाव इसलिए भी विशेष है क्योंकि इसमें पहली बार कई नए समीकरण देखने को मिले। एक तरफ जहाँ भाजपा ने शहरी क्षेत्रों में अपनी ताकत झोंकी, वहीं शिवसेना (UBT) ने मराठी अस्मिता के मुद्दे पर चुनाव लड़ा। कांग्रेस और एनसीपी के दोनों गुटों ने भी अपने पुराने गढ़ों को बचाने के लिए कड़ी मेहनत की है। जैसे-जैसे दोपहर तक रुझान स्पष्ट होंगे, यह साफ हो जाएगा कि क्या महायुति का ‘डबल इंजन’ मॉडल मतदाताओं को भाया है या फिर एमवीए की एकजुटता ने सत्ता पक्ष को झटका दिया है।
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