Ladki Bahin Yojana Update
Ladki Bahin Yojana Update: महाराष्ट्र सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी ‘माझी लाड़की बहिन योजना’ को लेकर एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। राज्य प्रशासन ने योजना के तहत पंजीकृत लगभग 68 लाख खातों को बंद कर दिया है। इस बड़ी कार्रवाई के पीछे का मुख्य कारण लाभार्थियों द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर अनिवार्य e-KYC (इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर) प्रक्रिया को पूरा न करना बताया जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, इस छंटनी के बाद अब सक्रिय लाभार्थियों की संख्या घटकर लगभग 1.75 करोड़ रह गई है। सरकार के इस सख्त कदम से उन महिलाओं में हड़कंप मच गया है जिन्होंने अब तक अपने दस्तावेजों का सत्यापन नहीं कराया था।
जिन महिलाओं के खाते बंद हुए हैं, उनके लिए राहत की एक किरण अभी बाकी है। पहले e-KYC पूरी करने की अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 निर्धारित की गई थी, जिसे अब राज्य सरकार ने बढ़ाकर 30 अप्रैल 2026 कर दिया है। नवंबर 2025 से अब तक इस प्रक्रिया की समय सीमा को कई बार विस्तार दिया जा चुका है। अधिकारियों का कहना है कि यदि लाभार्थी इस विस्तारित अवधि के भीतर अपनी प्रक्रिया पूरी कर लेती हैं, तो बंद किए गए खातों को दोबारा सक्रिय किया जा सकता है। बुधवार को एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की कि कुल 2.43 करोड़ पंजीकृत खातों में से लगभग 68 लाख केवल तकनीकी सत्यापन न होने के कारण बंद हुए हैं।
राज्य सरकार ने यह व्यापक सत्यापन अभियान (Verification Drive) तब शुरू किया जब बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की शिकायतें मिलने लगीं। जांच में सामने आया कि कई ऐसे लोग भी इस योजना का लाभ उठा रहे थे जो इसके पात्र नहीं थे। इनमें कुछ पुरुष सदस्य, संपन्न परिवारों की महिलाएं और सरकारी कर्मचारी तक शामिल थे। ‘लाड़की बहिन योजना’ का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की पात्र महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह की वित्तीय सहायता प्रदान कर उन्हें सशक्त बनाना है। फर्जीवाड़े को रोकने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए e-KYC को अनिवार्य बनाया गया है।
सक्रिय खातों की संख्या में आई इस भारी गिरावट का सीधा असर राज्य के खजाने पर भी पड़ेगा। वर्तमान में सरकार हर महीने लाभार्थियों को लगभग 3,700 करोड़ रुपये वितरित करती है। लाभार्थियों की संख्या कम होने से इस खर्च में कटौती होना तय है। गौर करने वाली बात यह है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए 26,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि पिछले वर्ष 2025-26 में यह राशि 36,000 करोड़ रुपये थी। बजट में आई यह कमी साफ संकेत देती है कि सरकार अब केवल ‘जेन्युइन’ या वास्तविक लाभार्थियों तक ही लाभ पहुंचाना चाहती है।
सत्यापन के दौरान एक दिलचस्प मामला भी सामने आया। शुरुआती जांच में करीब 24 लाख लाभार्थियों को ‘सरकारी कर्मचारी’ की श्रेणी में डाल दिया गया था। बाद में पता चला कि आवेदन फॉर्म में मराठी भाषा में पूछे गए एक जटिल प्रश्न का गलत उत्तर देने के कारण ऐसा हुआ था। गहन छानबीन के बाद इनमें से 20 लाख खाते पात्र पाए गए हैं। हालांकि, जो लोग वास्तव में अपात्र पाए गए हैं, उनसे सरकार ने अब तक दी गई राशि वापस न लेने का बड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि योजना निरंतर चलती रहेगी और इसे बंद करने का कोई विचार नहीं है।
‘लाड़की बहिन योजना’ महाराष्ट्र की महायुति सरकार के लिए एक गेम-चेंजर साबित हुई है। 2024 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले शुरू हुई इस योजना ने ग्रामीण और शहरी महिलाओं के बीच सरकार की पैठ मजबूत की है। अब 30 अप्रैल तक का समय उन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जो वास्तव में इस सहायता की हकदार हैं लेकिन तकनीकी कारणों से छूट गई हैं। यदि आपने अभी तक अपना सत्यापन नहीं कराया है, तो निकटतम ‘सेतु केंद्र’ या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी e-KYC तुरंत पूरी करें ताकि मासिक किस्त बिना किसी रुकावट के आपके बैंक खाते में आती रहे।
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