Maharashtra Politics
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में महायुति (बीजेपी, शिंदे की शिवसेना, अजित पवार की एनसीपी) के भीतर एक चौंकाने वाला और दिलचस्प ‘पवार प्लान’ सामने आया है। एक ओर जहाँ मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और बीजेपी ने आगामी महानगरपालिका चुनावों में एकजुट होकर लड़ने पर सहमति जताई है, वहीं दूसरी ओर, उपमुख्यमंत्री अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने महायुति को दरकिनार करते हुए एक अनूठी चुनावी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी कुछ स्थानीय निकाय चुनावों में महायुति गठबंधन से अलग होकर न सिर्फ़ अकेले चुनाव लड़ेगी, बल्कि कुछ चुनिंदा सीटों पर अपने चाचा शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी एनसीपी-शरदचंद्र पवार के साथ समझौता भी कर सकती है।
इस पूरे “पवार प्लान” का केंद्र पश्चिमी महाराष्ट्र है। यह क्षेत्र परंपरागत रूप से पवार परिवार का सबसे बड़ा राजनीतिक गढ़ माना जाता है, जिसमें पुणे, सतारा, सांगली और कोल्हापुर जैसे प्रमुख ज़िले शामिल हैं। खबर है कि, अजित पवार की पार्टी और शरद पवार की पार्टी, दोनों अपने-अपने राष्ट्रीय और राज्यीय गठबंधनों—यानी महायुति और महाविकास अघाड़ी—से अलग हटकर इन चुनिंदा सीटों पर एक साथ आ सकते हैं।
इस जुगलबंदी का एकमात्र मकसद पश्चिमी महाराष्ट्र के क्षेत्र में पवार परिवार के प्रभाव को जोड़कर रखना है। चूंकि स्थानीय निकाय चुनाव में व्यक्तिगत संबंधों और ज़मीनी प्रभाव का सीधा असर होता है, इसलिए दोनों पवार गुट साथ मिलकर अपनी पकड़ को मज़बूत कर सकते हैं, भले ही उनकी विचारधारा और राज्य स्तरीय गठबंधन अलग-अलग हों। दोनों गुटों के साथ आने से पवार परिवार के कोर वोट बैंक, ख़ासकर शुगर बेल्ट और सहकारिता क्षेत्र का विभाजन रुक जाएगा। इसके अलावा, महायुति या महाविकास अघाड़ी के जटिल सीट-बंटवारे के झगड़ों से मुक्त होकर दोनों पवार गुट स्थानीय समीकरणों के आधार पर मज़बूत उम्मीदवार उतार पाएंगे।
इधर, शिंदे और बीजेपी ने हाल ही में आपसी मतभेद दूर कर मिलकर लड़ने का फैसला किया है। बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने आगामी स्थानीय निकाय चुनाव, जिनमें मुंबई और ठाणे नगर निगम चुनाव शामिल हैं, ‘महायुति’ के बैनर तले मिलकर लड़ने पर सहमति जताई है। सीट-बंटवारे के मुद्दों को सुलझाने के लिए एक संयुक्त समिति का भी जल्द ही गठन किया जाएगा।
लेकिन अजित पवार की यह नई चाल महायुति की एकता पर सीधा सवाल खड़ा करती है। अगर अजित पवार अपने सबसे मज़बूत गढ़ में गठबंधन धर्म नहीं निभाते हैं और अपने चाचा के साथ गुप्त समझौता करते हैं, तो यह सीधे तौर पर दर्शाता है कि महायुति पूरी तरह से एकजुट नहीं है।
पश्चिमी महाराष्ट्र में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए बीजेपी को अजित पवार के सहयोग की नितांत आवश्यकता है। यदि अजित पवार विपक्षी चाचा शरद पवार के साथ हाथ मिलाते हैं, तो यह सीधे महायुति को झटका देगा और पश्चिमी महाराष्ट्र में बीजेपी की मुश्किलें कई गुना बढ़ जाएंगी। यह गठजोड़ क्षेत्र में बीजेपी के लिए अपने दम पर बढ़त बनाना मुश्किल बना देगा। राजनीतिक गलियारों में अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया, गुप्त राजनीतिक समीकरण जन्म ले रहा है, जो राज्य के दो सबसे बड़े गठबंधनों को भीतर से चुनौती देगा? यह स्थानीय चुनाव वो विचित्र रंग दिखा रहे हैं, जो विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भी देखने को नहीं मिले थे।
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