Maharashtra Politics : महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि शिवसेना (उद्धव गुट) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के बीच लंबे समय बाद रिश्ते फिर से सुधरते दिख रहे हैं। मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने उद्धव ठाकरे को गणेशोत्सव के अवसर पर अपने घर आमंत्रित किया है, जिससे दोनों नेताओं के बीच बढ़ती नजदीकियों की अटकलें तेज हो गई हैं।

गणपति बाप्पा बना सकते हैं दूरी को मिटाने का जरिया
राज ठाकरे के निवास पर हर साल डेढ़ दिन का गणपति बाप्पा विराजमान होते हैं। इस बार राज ने उद्धव ठाकरे को पहली बार ‘शिवतीर्थ’ बुलाया है, जो उनका नया निवास स्थान है। पहले राज ठाकरे ‘कृष्णकुंज’ में रहते थे, लेकिन तीन साल पहले वह नए घर में शिफ्ट हो गए थे। कला और संस्कृति से जुड़े राज ठाकरे ने इस घर को खास रूप से सजाया है। कुछ दिन पहले ही राज ठाकरे करीब 20 साल बाद मातोश्री पहुंचे थे, जहां उन्होंने उद्धव ठाकरे और उनके परिवार से मुलाकात की थी। वे बालासाहेब ठाकरे के कमरे में भी गए थे, जिससे भावनात्मक जुड़ाव का संकेत मिला था। उस समय से ही राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा था कि क्या उद्धव ठाकरे अब राज ठाकरे के घर जाएंगे? अब इस सवाल का जवाब खुद राज ठाकरे ने आमंत्रण देकर दे दिया है।

क्या फिर एक मंच पर दिखेंगे दोनों भाई?
जब मनसे नेता अमित ठाकरे से पूछा गया कि क्या उद्धव ठाकरे को गणेशोत्सव पर बुलाया गया है, तो उन्होंने जवाब में कहा, “आपको सरप्राइज मिलेगा।” इस जवाब ने एक बार फिर दोनों ठाकरे भाइयों की संभावित नजदीकी को हवा दी है। राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के बीच दूरियां 2006 में मनसे के गठन के बाद से स्पष्ट थीं। लेकिन हाल के महीनों में दोनों नेताओं के बीच मेलजोल बढ़ा है। हिंदी थोपने के मुद्दे पर दोनों एक मंच पर भी दिखे। उसके बाद राज ठाकरे उद्धव के जन्मदिन पर उन्हें बधाई देने मातोश्री पहुंचे, जिससे शिवसैनिकों में उत्साह और उम्मीद दोनों जगी।
गणेशोत्सव बना सियासी समीकरणों का केंद्र
गणेशोत्सव के बहाने ठाकरे परिवार की दूरियां कम होती नजर आ रही हैं। यह मुलाकात सिर्फ पारिवारिक नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति के लिए भी एक बड़ा संकेत हो सकती है। क्या यह एकता भविष्य में शिवसेना (ठाकरे गुट) और मनसे के विलय या गठबंधन का रास्ता खोलेगी? यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
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