Mahashivratri 2026 : आज समूचा भारत भगवान शिव की भक्ति के रंग में रंगा नजर आ रहा है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर देश के कोने-कोने से ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे गूँज रहे हैं। देश के प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंगों सहित सभी प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। भक्त आधी रात से ही कतारों में लगकर अपने आराध्य के दर्शन और जलाभिषेक का इंतजार कर रहे हैं। इस वर्ष विशेष उत्साह देखा जा रहा है, विशेषकर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में, जहाँ प्रशासन ने आज लगभग 10 लाख श्रद्धालुओं के पहुँचने का अनुमान लगाया है। सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को देखते हुए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि हर भक्त को शांतिपूर्वक दर्शन प्राप्त हो सकें।
विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में उत्सव का माहौल बेहद खास है। यहाँ मंदिर के पट रात 2:30 बजे से ही खोल दिए गए हैं। महाशिवरात्रि की विशिष्टता को देखते हुए इस बार लगातार 44 घंटों तक दर्शन और पूजन का सिलसिला जारी रहेगा। इस लंबी अवधि के दौरान भगवान महाकाल की ‘शयन आरती’ नहीं की जाएगी, यानी बाबा इस दौरान जागृत अवस्था में भक्तों को दर्शन देंगे। एक और दुर्लभ घटना 16 फरवरी को होगी, जब दोपहर 12 बजे साल में केवल एक बार होने वाली विशेष ‘भस्म आरती’ संपन्न की जाएगी। यह क्षण भक्तों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
महाशिवरात्रि को भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इसी परंपरा के अनुरूप बाबा महाकाल को दूल्हे के रूप में सजाया जा रहा है। उनके दिव्य शृंगार के लिए लगभग 3 क्विंटल विशेष फूल मंगाए गए हैं। इसमें 100 किलो आंकड़े के फूल, सवा लाख बेल पत्र और 200 किलो विभिन्न किस्म के देसी फूलों का उपयोग किया जा रहा है। सबसे आकर्षण का केंद्र होगा 11 फुट ऊँचा विशाल ‘सेहरा’, जो महाकाल के मस्तक की शोभा बढ़ाएगा। यह अद्भुत दृश्य देखने के लिए श्रद्धालु देश-विदेश से उज्जैन पहुँच रहे हैं।
मध्यप्रदेश के ही खंडवा स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में भी भक्ति की पराकाष्ठा देखी जा रही है। यहाँ रात 3 बजे से ही मंदिर के द्वार खोल दिए गए हैं और अगले 24 घंटों तक निरंतर दर्शन प्रक्रिया जारी रहेगी। वहीं, धर्मनगरी काशी (वाराणसी) के विश्वनाथ मंदिर में माहौल अलौकिक है। रात 2:15 बजे भव्य ‘मंगला आरती’ संपन्न हुई, जिसके बाद 3:30 बजे से ही आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन प्रारंभ हो गए। काशी की गलियां शिवभक्तों से पटी पड़ी हैं और गंगा किनारे से लेकर मंदिर परिसर तक केवल महादेव का नाम गूँज रहा है।
झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर में महाशिवरात्रि की परंपराएं अद्वितीय हैं। यहाँ शनिवार को ही परंपरानुसार विशेष पंचशूल पूजा संपन्न की गई। मंदिर के शिखरों पर पंचशूलों की पुनर्स्थापना के साथ ही बाबा बैद्यनाथ और माता पार्वती के बीच पारंपरिक गठबंधन की रस्म पूरी की गई, जो अटूट प्रेम का प्रतीक है। आज सुबह 3:15 बजे विशेष पूजा के बाद 4:25 बजे से पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। रविवार को यहाँ शिव-पार्वती विवाह का मुख्य आयोजन होगा, जिसके बाद शाम को भव्य ‘शिव बारात’ निकाली जाएगी, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे।
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