Mainpat Bauxite Scam
Mainpat Bauxite Scam: छत्तीसगढ़ के ‘शिमला’ कहे जाने वाले मैनपाट में बॉक्साइट उत्खनन के लिए दिए जाने वाले मुआवजे में एक बड़े भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ हुआ है। 19 करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले में राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से अपात्रों और रसूखदारों को करोड़ों रुपये बांटने की तैयारी थी। मामला उजागर होने के बाद सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने कड़ा रुख अपनाते हुए मैनपाट की तहसीलदार ममता रात्रे और संबंधित पटवारी को तत्काल प्रभाव से जिला मुख्यालय अटैच कर दिया है।
मुआवजा वितरण की प्रक्रिया में धांधली इस कदर की गई कि जिन लोगों के पास गांव में एक इंच जमीन नहीं है, उनके नाम पर भी लाखों रुपये के मुआवजे के प्रकरण तैयार कर लिए गए। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि बरिमा और उरंगा ग्राम पंचायत में छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (CMDC) को खनन लीज मिली है। नियमानुसार किसानों को 7 साल की फसल क्षति का मुआवजा मिलना था। लेकिन अधिकारियों ने बंदरबांट करते हुए ऐसे लोगों को सूची में डाल दिया जो वहां के निवासी तक नहीं हैं। कुछ मामलों में तो अंबिकापुर के निवासियों और रसूखदार नेताओं के करीबियों के नाम प्रस्तावित किए गए थे।
इस घोटाले के तार छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं। जांच में पता चला है कि उरंगा में सोनवानी के बेटे के फार्म हाउस को कागजों पर कृषि भूमि दिखाकर भारी-भरकम मुआवजा देने की तैयारी थी। हकीकत में वहां खेती के बजाय एक आलीशान रेस्ट हाउस बना हुआ है। इसके अलावा, कई ऐसी जमीनों पर मुआवजा प्रस्तावित किया गया जहाँ लोगों ने बाउंड्री वॉल बना रखी है और वर्षों से वहां कोई खेती नहीं हुई है। कलेक्टर ने इन सभी विसंगतियों को बेहद गंभीरता से लिया है।
भ्रष्टाचार का सबसे चौंकाने वाला उदाहरण उरंगा गांव में देखने को मिला, जहाँ एक किसान की मात्र डेढ़ एकड़ जमीन के बदले उसे 23 एकड़ जमीन का मुआवजा देने का कागजी जाल बुना गया था। तहसीलदार और एसडीएम स्तर से इन प्रकरणों को मंजूरी भी मिल चुकी थी, जो राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उरंगा में 15 करोड़ और बरिमा में 4 करोड़ से अधिक की राशि बांटी जानी थी, जिसे समय रहते कलेक्टर के हस्तक्षेप से रोक दिया गया है।
सरगुजा कलेक्टर ने मामले की तह तक जाने के लिए अपर कलेक्टर सुनील नायक की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित की है। जांच टीम ने प्रभावित गांवों का दौरा कर मौके पर पंचनामा तैयार किया है। अपर कलेक्टर ने पाया कि सूची में शामिल 23 से अधिक नाम ऐसे हैं जिनका गांव से कोई लेना-देना नहीं है। कलेक्टर अजीत वसंत ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) सहित अन्य कड़ी दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।
यह मामला न केवल सरकारी खजाने को चूना लगाने की कोशिश है, बल्कि उन वास्तविक किसानों के हक पर डाका है जिनकी जमीनें खदान के लिए अधिग्रहित की जा रही हैं। मैनपाट के इस 19 करोड़ के मुआवजे कांड ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। अब सबकी नजरें जांच कमेटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह साफ होगा कि इस सुनियोजित घोटाले के पीछे और कौन-कौन से बड़े चेहरे छिपे हैं।
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