Trump vs NYT: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक और कानूनी झटका लगा है। उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स के खिलाफ 15 मिलियन डॉलर (करीब 132 करोड़ रुपये) की मानहानि का मुकदमा दायर किया था, जिसे फेडरल कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले से ट्रंप की कानूनी रणनीति को गहरा धक्का पहुंचा है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी जिला न्यायाधीश स्टीवन मेरीडे (Steven Merryday) ने यह फैसला सुनाया। उन्होंने ट्रंप को यह स्पष्ट करने के लिए 28 दिन का समय दिया है कि आखिर उन्हें किस आधार पर राहत मिलनी चाहिए। अदालत ने साफ किया कि शिकायत में उचित कानूनी आधार और तथ्य होने जरूरी हैं, न कि यह किसी राजनीतिक विरोध या गुस्से का मंच हो।
डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूयॉर्क टाइम्स पर आरोप लगाया था कि वह एक पक्षपातपूर्ण एजेंडे के तहत डेमोक्रेटिक पार्टी का प्रचार कर रहा है और उनके खिलाफ झूठी व अपमानजनक खबरें प्रकाशित कर रहा है। ट्रंप का दावा था कि अखबार ने जानबूझकर ऐसी सामग्री प्रकाशित की जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचे।
उन्होंने इस सप्ताह की शुरुआत में मुकदमा दायर किया था, जिसमें न्यूयॉर्क टाइम्स को “डेमोक्रेटिक पार्टी का मुखपत्र” कहा गया। इसके साथ ही उन्होंने अखबार पर “फर्जी खबरें” और “मानहानिजनक सामग्री” फैलाने का गंभीर आरोप लगाया।
जज मेरीडे ने ट्रंप की याचिका पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मुकदमा संघीय अदालत के नियमों का पालन नहीं करता है। उनके अनुसार, शिकायत में स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया गया है कि किस कानूनी आधार पर ट्रंप राहत चाहते हैं। इसके अलावा, शिकायत को एक सार्वजनिक मंच की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश की गई है, जो कि न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
हालांकि कोर्ट ने मुकदमे को खारिज किया है, लेकिन ट्रंप को 28 दिनों का समय दिया गया है कि वह अपनी शिकायत को संशोधित कर पुनः दाखिल कर सकते हैं। यदि ट्रंप इसे दोबारा दाखिल करते हैं, तो उन्हें स्पष्ट रूप से यह बताना होगा कि कैसे न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्टिंग ने उनकी मानहानि की और किस कानूनी आधार पर उन्हें राहत मिलनी चाहिए।
डोनाल्ड ट्रंप का न्यूयॉर्क टाइम्स के साथ टकराव नया नहीं है। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए भी वे मीडिया संस्थानों को अक्सर निशाने पर लेते रहे हैं। लेकिन इस बार मामला कोर्ट तक पहुंचा, और वहां उन्हें फिलहाल राहत नहीं मिली है।
डोनाल्ड ट्रंप को कोर्ट से झटका लगना उनकी कानूनी चुनौतियों की लंबी सूची में एक और अध्याय जोड़ता है। यह मामला बताता है कि मानहानि जैसे गंभीर मामलों में केवल राजनीतिक बयानबाजी या मीडिया विरोध काफी नहीं है, बल्कि ठोस कानूनी आधार जरूरी होता है। अब देखना होगा कि ट्रंप इस फैसले के खिलाफ क्या अगला कदम उठाते हैं।
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