Middle East War
Middle East War: मिडिल ईस्ट में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसने वैश्विक कूटनीति के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय मंच पर कई देशों ने क्षेत्र में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और निर्दोष आम नागरिकों पर हो रहे लगातार हमलों को लेकर गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की। यह संघर्ष अब तेल की कीमतों से लेकर वैश्विक पर्यटन तक को प्रभावित कर रहा है, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर संकट के बादल मँडराने लगे हैं।
मालदीव सरकार ने इस संघर्ष में अपनी चुप्पी तोड़ते हुए ईरान द्वारा सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत और बहरीन जैसे ‘भाईचारे वाले देशों’ पर किए गए हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। मालदीव के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि हवाई अड्डों और तेल डिपो जैसी नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून और जिनेवा संधियों का सीधा उल्लंघन है। मालदीव ने स्पष्ट किया कि संप्रभु देशों की सुरक्षा के साथ इस तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
अपने बयान में मालदीव ने केवल ईरान ही नहीं, बल्कि इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए जवाबी हमलों पर भी दुख प्रकट किया है। विशेष रूप से ईरान में एक लड़कियों के स्कूल पर हुए हवाई हमले का जिक्र करते हुए मालदीव ने इसे अमानवीय बताया। इस हमले में 100 से अधिक नागरिकों के हताहत होने की खबर है। मालदीव ने सभी संघर्षरत पक्षों से तुरंत युद्धविराम (Ceasefire) की अपील की है ताकि हिंसा की इस अंतहीन श्रृंखला को रोका जा सके और मासूमों की जान बचाई जा सके।
युद्ध का असर अब युद्ध के मैदान से हजारों मील दूर खूबसूरत पर्यटन स्थलों पर भी दिखने लगा है। भारत में इटली के राजदूत एंटोनियो बार्टोली ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि मिडिल ईस्ट में मचे घमासान के कारण मालदीव में इटली के लगभग 1,500 पर्यटक फंस गए हैं। उड़ानों के रद्द होने और हवाई मार्ग असुरक्षित होने के कारण इन पर्यटकों की वापसी एक बड़ी समस्या बन गई है। बार्टोली ने जोर दिया कि इटली और भारत दोनों का साझा लक्ष्य तनाव कम करना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार गईं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को संभालना मुश्किल होगा।
खाड़ी क्षेत्र की नाजुक स्थिति पर चीन ने भी अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने आगाह किया कि यह तनाव बहरीन जैसे छोटे लेकिन सामरिक रूप से महत्वपूर्ण देशों की सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। चीन ने दो टूक कहा कि वह हमेशा सभी देशों की संप्रभुता और प्रादेशिक अखंडता के सम्मान का पक्षधर रहा है। चीन ने गैर-सैन्य ठिकानों पर हमलों की कड़ी निंदा करते हुए सैन्य कार्रवाइयों को तुरंत रोकने की मांग की है। चीन का मानना है कि यदि संघर्ष और फैला, तो इसे रोकना किसी भी महाशक्ति के बस में नहीं होगा।
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