Mallikarjun Kharge On Modi
Mallikarjun Kharge On Modi: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया है कि भारत सरकार अमेरिकी दबाव के आगे नतमस्तक हो रही है। सोमवार को एक जनसभा को संबोधित करते हुए खड़गे ने कहा कि प्रधानमंत्री का डोनाल्ड ट्रंप के प्रति ‘झुकने’ वाला रवैया देश के लिए गौरवशाली नहीं है। उन्होंने तीखे लहजे में कहा, “देश ने आपको प्रधानमंत्री केवल सिर हिलाने (मौन सहमति देने) के लिए नहीं चुना है। आपको राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए अडिग खड़ा होना चाहिए।” खड़गे का यह बयान उन हालिया दावों के बाद आया है जिनमें भारत की स्वायत्त विदेश नीति पर सवाल उठाए गए हैं।
विवाद की जड़ में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि अमेरिकी नाराजगी के बाद भारत ने रूस से तेल का आयात कम कर दिया है। ट्रंप ने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी उन्हें खुश करने के लिए यह कदम उठा रहे हैं। इसी का हवाला देते हुए खड़गे ने सवाल किया कि क्या भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक फैसले अब वाशिंगटन से तय हो रहे हैं? उन्होंने इसे देश की संप्रभुता के खिलाफ बताया और मांग की कि प्रधानमंत्री को इस अपमानजनक दावे पर चुप्पी तोड़नी चाहिए।
खड़गे ने अपने संबोधन में वेनेजुएला की मौजूदा अस्थिरता और वहां हुए अमेरिकी हस्तक्षेप पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने इसे दुनिया की शांति के लिए खतरा बताते हुए कहा कि ‘डराने वाली’ और ‘विस्तारवादी’ नीतियां लंबे समय तक सफल नहीं होतीं। तानाशाहों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “इतिहास गवाह है कि हिटलर और मुसोलिनी जैसे लोग भी अंततः इतिहास बन गए। वैश्विक शांति को बिगाड़ने वाली सोच किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र के लिए ठीक नहीं है।” उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी ताकतों का समर्थन भारत की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है।
खड़गे ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी को घेरते हुए तीन प्रमुख सवाल दागे हैं, जो वर्तमान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं:
स्वतंत्र विदेश नीति: क्या अब भारत की विदेश नीति के मार्गदर्शक सिद्धांत अमेरिका द्वारा निर्धारित किए जा रहे हैं?
रणनीतिक स्वायत्तता: क्या रूस से तेल आयात घटाने का फैसला वास्तव में ट्रंप को ‘खुश’ करने के लिए लिया गया, न कि राष्ट्रीय हित में?
मौन पर सवाल: डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत की स्थिति को कमतर आंकने वाले दावों और धमकियों पर पीएम मोदी आखिर चुप क्यों हैं?
डोनाल्ड ट्रंप अक्सर यह दावा करते रहे हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच शांति स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाई है। इस पर तंज कसते हुए खड़गे ने कहा, “ट्रंप कम से कम 70 बार कह चुके हैं कि उन्होंने भारत-पाक के बीच समझौता कराया। क्या वे यह सोचते हैं कि ऐसे दावों के बाद पूरी दुनिया उनके सामने झुक जाएगी?” खड़गे ने स्पष्ट किया कि भारत एक संप्रभु राष्ट्र है और उसे किसी बाहरी मध्यस्थता या ‘दबाव की राजनीति’ की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि दुनिया अब ऐसे दावों के आगे झुकने वाली नहीं है।
खड़गे के इन बयानों ने आगामी संसद सत्र से पहले सरकार के खिलाफ एक बड़ा मुद्दा खड़ा कर दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा देने वाली सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘भारत पहले’ की नीति से भटक रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेल आयात और रणनीतिक रिश्तों पर ट्रंप के बयानों ने विपक्ष को प्रधानमंत्री की ‘मजबूत नेता’ वाली छवि पर सवाल उठाने का एक बड़ा अवसर दे दिया है। अब देखना यह है कि सत्ता पक्ष खड़गे के इन गंभीर आरोपों का जवाब किस प्रकार देता है।
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