राजनीति

West Bengal Elections : वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर भड़कीं ममता बनर्जी, चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप

West Bengal Elections : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के साथ ही राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस बार विवाद की जड़ ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) प्रक्रिया बनी है, जिसे लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ममता बनर्जी ने इस प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि राज्य सरकार और उनकी पार्टी उन तमाम नागरिकों के साथ चट्टान की तरह खड़ी है, जिनके नाम इस प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। मुख्यमंत्री का मानना है कि यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक गहरी राजनीतिक साजिश का हिस्सा है।

नदिया की जनसभा में गरजीं मुख्यमंत्री: अल्पसंख्यकों और मतुआ समुदाय को निशाना बनाने का आरोप

मंगलवार, 7 अप्रैल 2026 को नदिया जिले के चकदाहा में आयोजित एक विशाल चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर (SIR) के नाम पर जानबूझकर मतुआ, राजबंशी और अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गायब किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने भावुक अंदाज में कहा, ‘तृणमूल कांग्रेस (TMC) उन सभी लोगों की आवाज बनेगी जिनके लोकतांत्रिक अधिकारों को छीनने की कोशिश की जा रही है। हम ट्रिब्यूनल्स में इसके खिलाफ मजबूती से कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और किसी का भी नाम अन्यायपूर्ण तरीके से कटने नहीं देंगे।’

वोटर लिस्ट का गणित: 91 लाख नाम हटने से मचा हड़कंप

चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों ने राज्य में खलबली मचा दी है। आंकड़ों के मुताबिक, विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के बाद पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से लगभग 91 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में नाम हटने को ममता बनर्जी ने लोकतंत्र पर हमला करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस सूची में सबसे ज्यादा नुकसान मुस्लिम और मतुआ समुदाय के मतदाताओं को हुआ है, जो पारंपरिक रूप से टीएमसी के मजबूत वोट बैंक माने जाते हैं। इस मुद्दे को लेकर अब राज्य के कोने-कोने में विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप: 32 लाख नामों की बहाली को बताया अपनी जीत

ममता बनर्जी ने जनसभा में एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि उनके सक्रिय हस्तक्षेप और सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई के कारण एक बड़ी राहत मिली है। उन्होंने बताया कि विचाराधीन लगभग 60 लाख मामलों में से करीब 32 लाख नामों को मतदाता सूची में वापस बहाल कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने इसे अपनी सरकार की नैतिक जीत बताते हुए कहा कि अगर वे आवाज नहीं उठातीं, तो लाखों लोग मतदान करने के अपने मौलिक अधिकार से वंचित रह जाते। उन्होंने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे हर बूथ पर जाकर मतदाता सूची की बारीकी से जांच करें।

चुनावी रणभेरी: 23 अप्रैल को पहले चरण का मतदान और 4 मई को नतीजे

294 विधानसभा सीटों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए चुनावी कार्यक्रम की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। राज्य में इस बार दो चरणों में मतदान संपन्न कराया जाएगा। चुनावी कार्यक्रम के अनुसार, पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल, 2026 को होगा, जबकि दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल, 2026 को निर्धारित की गई है। इस महामुकाबले के नतीजे 4 मई, 2026 को घोषित किए जाएंगे। वर्तमान विवाद को देखते हुए यह साफ है कि आने वाले दिनों में वोटर लिस्ट और पहचान का मुद्दा चुनाव प्रचार के केंद्र में रहने वाला है

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