Mamata Banerjee:
Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर केंद्र और राज्य के बीच टकराव चरम पर पहुँच गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के आईटी सेल प्रमुख के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद पूरे राज्य में भारी तनाव है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस कार्रवाई को “राजनीतिक प्रतिशोध” करार देते हुए न केवल सड़कों पर उतरकर मार्च निकाला, बल्कि केंद्रीय एजेंसी के खिलाफ दो एफआईआर भी दर्ज कराई हैं। दिल्ली से लेकर कोलकाता तक, टीएमसी कार्यकर्ता और नेता इस छापेमारी के विरोध में लामबंद हो गए हैं।
शुक्रवार सुबह राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब टीएमसी के 8 सांसदों ने गृह मंत्रालय के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। डेरेक ओ ब्रायन, महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद जैसे कद्दावर नेता नारेबाजी करते हुए सड़क पर बैठ गए। इस दौरान पुलिस के साथ हुई धक्का-मुक्की में कुछ सांसद जमीन पर गिर पड़े। दिल्ली पुलिस ने सुबह 10 बजे सांसदों को हिरासत में लिया, जिन्हें दो घंटे बाद रिहा किया गया। ममता बनर्जी ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों को सड़क पर घसीटना लोकतंत्र का अपमान और पुलिसिया घमंड है।
कोलकाता में एक विशाल विरोध मार्च का नेतृत्व करते हुए ममता बनर्जी ने ईडी पर सनसनीखेज आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि छापेमारी के दौरान एजेंसी ने उनकी पार्टी का चुनावी डेटा और गुप्त रणनीति चुराने का प्रयास किया। ममता ने स्पष्ट किया कि वह खुद छापेमारी स्थल पर गई थीं और इसमें कुछ भी असंवैधानिक नहीं था। उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस तरह महाराष्ट्र में जनादेश की चोरी की गई, वैसा ही प्रयोग बंगाल में करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वह और अधिक मजबूती से वापसी करेंगी।
इस राजनीतिक उबाल का असर न्यायपालिका पर भी पड़ा है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने परिसर में भारी भीड़ और हंगामे के चलते ईडी की एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई टाल दी। दरअसल, ईडी ने याचिका दायर कर ममता बनर्जी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी, जिसमें उन पर छापेमारी की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया गया था। कोर्ट रूम के बाहर और भीतर समर्थकों के जमावड़े ने सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी, जिसके बाद कोर्ट ने फिलहाल मामले की सुनवाई स्थगित कर दी है।
टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि एजेंसियां विपक्ष की आवाज नहीं दबा सकतीं। उन्होंने एक्स (X) पर लिखा कि बंगाल के लोग कभी भी बीजेपी या दिल्ली के ‘मालिकों’ के सामने नहीं झुकेंगे। पार्टी ने सोशल मीडिया पर ‘असली गर्जन’ के साथ मार्च की तस्वीरें साझा कीं और दावा किया कि आम जनता ममता बनर्जी के आह्वान पर बंगाल विरोधी साजिशों का जवाब देने के लिए खुद सड़कों पर उतर आई है।
वहीं, इस पूरे मामले में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने ममता सरकार पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि टीएमसी केवल तब शोर मचाती है जब उनके नेताओं या सहयोगियों पर रेड होती है। चौधरी ने सवाल उठाया कि जब देश के अन्य राज्यों में बंगाल के प्रवासी मजदूरों पर “बांग्लादेशी” होने का लेबल लगाकर हमले होते हैं, तब टीएमसी के सांसद संसद के भीतर या बाहर विरोध क्यों नहीं करते? उन्होंने इसे पूरी तरह से अपनी सत्ता बचाने की कवायद बताया।
ममता बनर्जी ने इस बार केवल बयानों तक सीमित न रहकर कानूनी मोर्चा भी खोल दिया है। उन्होंने आई-पैक (I-PAC) के कार्यालय और इसके प्रमुख प्रतीक जैन के घर हुई छापेमारी को लेकर कोलकाता और बिधाननगर पुलिस स्टेशन में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज कराई हैं। शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि केंद्रीय एजेंसी ने मर्यादाओं का उल्लंघन किया है। पुलिस ने इन एफआईआर के आधार पर जांच शुरू कर दी है, जिससे आने वाले दिनों में केंद्र-राज्य संबंध और अधिक कड़वे होने की संभावना है।
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