TMC Crisis : देश की राजधानी दिल्ली में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA) ब्लॉक की बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी बैठक होने वाली है। इस अहम बैठक के शुरू होने से ठीक पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो ममता बनर्जी को एक बहुत बड़ा सियासी झटका लगा है। पश्चिम बंगाल से टीएमसी के सबसे वरिष्ठ और भरोसेमंद राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले से राष्ट्रीय राजनीति और पार्टी के भीतर खलबली मच गई है। इसे ममता बनर्जी की राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत दिख रही छवि के लिए एक बड़े आघात के रूप में देखा जा रहा है।

सिर्फ दो महीने में कोयल मलिक के इस्तीफे की अटकलें: बनेगा नया रिकॉर्ड
सुखेंदु राय के इस्तीफे के बाद अब टीएमसी की एक और नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद कोयल मलिक को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में इस्तीफे की अटकलें बेहद तेज हो गई हैं। गौरतलब है कि कोयल मलिक अभी महज दो महीने पहले यानी इसी साल अप्रैल में राज्यसभा की सांसद चुनी गई थीं। यदि वे भी अपने पद से इस्तीफा दे देती हैं, तो वे भारतीय संसदीय इतिहास में सबसे कम समय के लिए सांसद रहने वाले नेताओं की सूची में शामिल हो जाएंगी। दिलचस्प बात यह है कि कोयल ने सांसद बनने के बाद से अभी तक राज्यसभा के एक भी सत्र की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया है।

राज्यसभा में टीएमसी का घटता गणित: 13 से घटकर रह गए 12 सांसद
संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में पश्चिम बंगाल से तृणमूल कांग्रेस की ताकत अब कमजोर होती दिख रही है। सुखेंदु राय के जाने से पहले राज्यसभा में टीएमसी के कुल 13 सांसद थे, जो अब घटकर 12 रह गए हैं। पार्टी के मौजूदा राज्यसभा सांसदों में डेरेक ओ’ब्रायन (संसदीय दल के नेता), सागरिका घोष (उपनेता), डोला सेन, सुष्मिता देव, मोहम्मद नदीमुलहक, ममता बाला ठाकुर, प्रकाश चिक बाराइक, समीरुल इस्लाम, राजीव कुमार, मेनका गुरुस्वामी, बाबुल सुप्रियो और कोयल मल्लिक शामिल हैं। मुख्य सचेतक रहे सुखेंदु राय के इस तरह अचानक साथ छोड़ देने से सदन के भीतर टीएमसी की फ्लोर मैनेजमेंट रणनीति को बड़ा नुकसान पहुंचेगा।
ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ विद्रोह: 60 विधायकों का बागी गुट तैयार
पश्चिम बंगाल में 4 मई को संपन्न हुए विधानसभा चुनाव के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक बहुत बड़ी आंतरिक टूट का सिलसिला लगातार जारी है। पार्टी में जारी इस विद्रोह के तहत पहले टीएमसी के करीब 60 विधायकों ने बगावत का झंडा बुलंद किया और अब सांसदों के भी बागी होने का सिलसिला शुरू हो चुका है। इन बागी विधायकों ने ऋतबत बनर्जी के नेतृत्व में अपना एक नया अलग गुट बना लिया है। इस बागी गुट ने दावा किया है कि वे टीएमसी के कम से कम 20 मौजूदा लोकसभा सांसदों के भी सीधे संपर्क में हैं। विधायकों की बगावत की मुख्य वजह ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी हैं, जिन पर पार्टी के पुराने नेताओं द्वारा पूरी टीएमसी को ‘हाईजैक’ करने का सीधा आरोप लगाया जा रहा है। इस खींचतान से पार्टी की कमान ममता बनर्जी के हाथ से फिसलती दिख रही है।
स्थानीय निकायों में भी भारी भगदड़: 100 से अधिक पार्षदों ने छोड़ी पार्टी
टीएमसी के भीतर मची यह अंतर्कलह केवल विधानसभा और संसद तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पश्चिम बंगाल के स्थानीय निकायों पर भी बड़े पैमाने पर देखने को मिल रहा है। राज्य की विभिन्न नगर पालिकाओं से अब तक 100 से अधिक पार्षदों ने अपने पदों से सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया है। आंकड़ों के अनुसार, चंदननगर के मेयर राम चक्रवर्ती ने 30 पार्षदों के साथ इस्तीफा दिया है। इसी तरह भाटपाड़ा नगरपालिका के चेयरमैन रेबा साहा के साथ 30 पार्षदों ने, गारुलिया से 18, हलीशहर से 16, उत्तर बैरकपुर से 15, कांचरापाड़ा से 14 और अभिषेक बनर्जी के संसदीय क्षेत्र डायमंड हार्बर से भी 8 पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफा देकर ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।











