Mani Shankar Aiyar: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने एक बार फिर अपनी ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने पार्टी के ‘कर्ताधर्ताओं’ पर सीधा प्रहार करते हुए कहा है कि यदि वर्तमान नेतृत्व असहमति के स्वरों को स्वीकार नहीं कर सकता, तो यह मुख्य विपक्षी दल के भविष्य के लिए ‘विनाशकारी’ सिद्ध होगा। अय्यर का मानना है कि जो पार्टी अपने भीतर उठने वाली अलग आवाजों का सम्मान नहीं कर सकती, उसे देश पर शासन करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
अय्यर के हालिया तेवर उस समय और कड़े हो गए जब उन्होंने बीते रविवार को केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की जमकर सराहना की। उन्होंने विजयन के दोबारा मुख्यमंत्री बनने की संभावना जताई, जो कांग्रेस की आधिकारिक लाइन के बिल्कुल विपरीत था। इसके जवाब में कांग्रेस ने तुरंत पल्ला झाड़ते हुए कहा कि अय्यर की टिप्पणियों से पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है। इस घटनाक्रम के बाद अय्यर ने अपने यूट्यूब चैनल पर 23 मिनट का एक वीडियो जारी कर नेहरू-गांधी परिवार के इतिहास और वर्तमान स्थिति की तुलना की है।
अपने वीडियो संबोधन में अय्यर ने जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के कालखंड का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय असहमति का सम्मान होता था। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जब इंदिरा गांधी ने असहमति के कारण पार्टी तोड़ी और आपातकाल लगाया, तो उसका परिणाम बेहद बुरा रहा। कांग्रेस न केवल चुनाव हारी, बल्कि खुद इंदिरा गांधी रायबरेली से और संजय गांधी अमेठी से चुनाव हार गए। अय्यर का तर्क है कि कांग्रेस की ताकत उसकी विभिन्न आवाजें हैं और यदि इन्हें कुचला गया, तो विनाश निश्चित है।
मणिशंकर अय्यर ने दुख जताते हुए कहा कि कांग्रेस के मौजूदा प्रबंधकों ने पुराने सबक भुला दिए हैं। उन्होंने पूर्व नेताओं जैसे आरिफ मोहम्मद खान, वीपी सिंह और अरुण नेहरू का उदाहरण दिया, जिन्होंने अपने समय में नेतृत्व से असहमति जताई थी। अय्यर ने कहा कि जिन्होंने ईमानदारी से विरोध किया, वे राजनीतिक दायरे में बने रहे, लेकिन बेईमानी करने वालों को इतिहास ने सजा दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि असहमति लोकतंत्र की बुनियाद है और यदि नेतृत्व इसका विनम्रता से जवाब नहीं दे सकता, तो वह नेतृत्व करने के योग्य नहीं है।
अय्यर ने अपने हमले को और व्यक्तिगत और वैचारिक बनाते हुए राहुल गांधी को एक बड़ी चुनौती दी। उन्होंने 5 मई, 1989 को लोकसभा में राजीव गांधी द्वारा दिए गए ऐतिहासिक बयान का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि “सिर्फ धर्मनिरपेक्ष भारत ही कायम रह सकता है।” अय्यर ने कांग्रेस आलाकमान को चुनौती दी कि क्या उनमें इतनी हिम्मत है कि वे राजीव गांधी के इन शब्दों को उनके पुत्र राहुल गांधी के मुंह से दोबारा कहलवा सकें? उन्होंने दावा किया कि उन्हें जानबूझकर कार्य समिति से बाहर रखा गया है।
अपने संबोधन के अंत में मणिशंकर अय्यर ने खुद को सच्चा कांग्रेसी और राजीव गांधी का अनुयायी बताते हुए ‘राजीव गांधी अमर रहे’ का नारा लगाया। उनके इस वीडियो और बयानों से यह स्पष्ट है कि वे पार्टी के भीतर खुद को हाशिए पर धकेले जाने से नाराज हैं और वैचारिक स्तर पर नेतृत्व को घेरने की तैयारी में हैं। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस आलाकमान अय्यर के इन तीखे हमलों पर क्या रुख अपनाता है।
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