Manipur President Rule : संसद ने मंगलवार को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की अवधि को छह महीने और बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह वैधानिक प्रस्ताव पहले लोकसभा में पारित हुआ था और अब राज्यसभा में भी इसे मंजूरी मिल गई है। प्रस्ताव के तहत राष्ट्रपति शासन की अवधि 13 अगस्त 2025 से अगले छह महीने तक के लिए बढ़ाई गई है। राज्यसभा में यह प्रस्ताव केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने पेश किया। हालांकि विपक्ष ने इस मुद्दे पर सदन में हंगामा और विरोध किया, लेकिन इसके बावजूद सदन ने प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी।

मणिपुर में स्थिति अब भी संवेदनशील
गौरतलब है कि मणिपुर में मई 2023 से जातीय हिंसा और तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं। राज्य में कुकी और मेइती समुदायों के बीच भड़की हिंसा ने सैकड़ों लोगों की जान ली और हजारों लोगों को विस्थापित होना पड़ा। इसके बाद से राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है, जिसके चलते पहले राष्ट्रपति शासन लगाया गया था।

सरकार का कहना है कि राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयास जारी हैं, लेकिन सुरक्षा और प्रशासनिक चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं, इसलिए राष्ट्रपति शासन को आगे बढ़ाना आवश्यक हो गया।
विपक्ष का विरोध
राज्यसभा में प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि सरकार मणिपुर में स्थिति को संभालने में विफल रही है और राष्ट्रपति शासन को बढ़ाना इसका प्रमाण है। विपक्ष ने मणिपुर में तत्काल शांति और पुनर्वास के ठोस प्रयासों की मांग की।
हालांकि सरकार की ओर से जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि केंद्र सरकार राज्य में स्थिति सामान्य करने के लिए हरसंभव कदम उठा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रशासनिक मशीनरी को मजबूत किया जा रहा है और कानून व्यवस्था बहाल करने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।
आगे की राह
राष्ट्रपति शासन बढ़ाए जाने के बाद अब मणिपुर में अगले छह महीने तक राज्य की प्रशासनिक जिम्मेदारी केंद्र सरकार के पास रहेगी। इस दौरान केंद्र और राज्य के अधिकारियों की मदद से स्थायित्व, पुनर्वास और विकास कार्यों पर जोर दिए जाने की उम्मीद है।
मणिपुर में शांति बहाली और स्थायित्व लाना सरकार के लिए अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। संसद से राष्ट्रपति शासन को बढ़ाने की मंजूरी मिलने के बाद अब यह देखना होगा कि अगले छह महीने में राज्य में कानून व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव को बहाल करने में सरकार कितनी सफल होती है।










