Lentil Farming : रबी सीजन में बुंदेलखंड के किसानों के लिए मसूर की खेती कम लागत में अच्छी आमदनी हासिल करने का शानदार विकल्प बन सकती है। कम पानी की जरूरत, कम उत्पादन लागत और बाजार में लगातार मांग के कारण मसूर किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मददगार साबित हो सकती है। रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी के निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. सुशील कुमार सिंह ने किसानों को मसूर की वैज्ञानिक खेती अपनाने की सलाह दी है। उनके मुताबिक, उन्नत किस्मों और सही कृषि प्रबंधन के जरिए किसान एक एकड़ से 70 हजार से 90 हजार रुपये तक मुनाफा कमा सकते हैं।
Lentil Farming: बुंदेलखंड की मिट्टी में मसूर की खेती के लिए बेहतर संभावनाएं
डॉ. सुशील कुमार सिंह के अनुसार, मसूर भारत की प्रमुख दलहनी फसलों में शामिल है। देशभर में लगभग 16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती की जाती है। उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड क्षेत्र मसूर उत्पादन के लिए अनुकूल माना जाता है। यहां की मार और काबर मिट्टी में नमी को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की क्षमता होती है। इससे फसल को कम सिंचाई की जरूरत पड़ती है और किसानों की लागत भी नियंत्रित रहती है।

Lentil Sowing Time: नवंबर के पहले पखवाड़े में करें बुवाई
मसूर की बेहतर पैदावार प्राप्त करने के लिए सही समय पर बुवाई करना बेहद जरूरी है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, नवंबर महीने का पहला पखवाड़ा मसूर की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त समय है। किसानों को स्थानीय मौसम और मिट्टी की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए खेत तैयार करना चाहिए। समय पर बुवाई करने से फसल का विकास बेहतर होता है और अच्छी पैदावार मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

Best Lentil Varieties: इन उन्नत किस्मों से मिलेगा बेहतर उत्पादन
बुंदेलखंड के किसानों के लिए कई उन्नत मसूर प्रजातियां उपयोगी साबित हो सकती हैं। डॉ. सिंह ने आईपीएल-220 किस्म को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया है। इस प्रजाति में आयरन और जिंक की मात्रा अधिक होती है, इसलिए इसे बायोफोर्टिफाइड किस्म माना जाता है।
इसके अलावा किसान आईपीएल-315, आईपीएल-316, आईपीएल-329, आईपीएल-534, एल-4717 और एल-4727 जैसी उन्नत किस्मों का चयन कर सकते हैं। इनमें से कई प्रजातियों में प्रमुख रोगों के प्रति सहनशीलता पाई जाती है। हालांकि, किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुसार किस्म का चुनाव करना चाहिए।

Seed Treatment: बुवाई से पहले बीजों का उपचार करना जरूरी
मसूर की फसल को शुरुआती रोगों से बचाने और बेहतर अंकुरण के लिए बीजोपचार करना महत्वपूर्ण है। कृषि विशेषज्ञों ने प्रति किलोग्राम बीज में 5 ग्राम ट्राइकोडर्मा से उपचार करने की सलाह दी है। इसके साथ पीएसबी यानी फॉस्फेट सॉल्यूबिलाइजिंग बैक्टीरिया से बीजोपचार करने पर पौधों को मिट्टी में मौजूद फास्फोरस उपलब्ध कराने में मदद मिलती है। इससे पौधों की जड़ों का विकास और फसल की वृद्धि बेहतर हो सकती है।
Fertilizer Management: एक एकड़ में कितना बीज और खाद डालें?
मसूर की खेती के लिए प्रति एकड़ 17 से 18 किलोग्राम बीज पर्याप्त माना गया है। इसके साथ लगभग 40 किलोग्राम डीएपी का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। फसल में दाना बनने की अवस्था आने पर 2 प्रतिशत यूरिया के घोल का छिड़काव किया जा सकता है। इससे दानों के विकास में सहायता मिलती है और उत्पादन बढ़ने की संभावना रहती है।
Lentil Irrigation: दिसंबर में बारिश नहीं होने पर करें हल्की सिंचाई
मसूर की फसल को दूसरी कई रबी फसलों की तुलना में कम पानी की आवश्यकता होती है। हालांकि, दिसंबर महीने में बारिश नहीं होने पर किसान फसल की जरूरत के अनुसार बौछारी विधि से हल्की सिंचाई कर सकते हैं। इससे पौधों में फूल और फलियों का विकास बेहतर हो सकता है। सामान्य परिस्थितियों में मसूर की फसल लगभग 120 से 130 दिनों में पककर कटाई के लिए तैयार हो जाती है।
Lentil Farming Profit: एक एकड़ से 90 हजार रुपये तक कमाई की संभावना
डॉ. सुशील कुमार सिंह के अनुसार, उन्नत किस्मों और वैज्ञानिक तकनीकों से मसूर की खेती करने पर प्रति एकड़ 10 से 12 क्विंटल तक उत्पादन मिलने की संभावना है। कम लागत और अच्छी पैदावार के कारण किसानों को प्रति एकड़ लगभग 70 हजार से 90 हजार रुपये तक मुनाफा मिल सकता है। भारत सरकार ने मसूर का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 7,390 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। हालांकि, वास्तविक मुनाफा उत्पादन, बिक्री मूल्य और खेती पर आने वाली लागत के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
Farmers Advisory: वैज्ञानिक तरीके से खेती कर बढ़ाएं आमदनी
कृषि विशेषज्ञ ने बुंदेलखंड के किसानों से रबी सीजन में मसूर की उन्नत किस्में अपनाने की अपील की है। उन्होंने समय पर बुवाई, बीजोपचार, संतुलित खाद प्रबंधन और जरूरत के अनुसार सिंचाई पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं। बुंदेलखंड की मिट्टी और जलवायु को देखते हुए मसूर की खेती किसानों की आमदनी बढ़ाने का अच्छा विकल्प बन सकती है।


