Meerut Blue Drum Case : मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला की अपील पर सुनवाई के लिए तारीख निर्धारित कर दी है। दोनों ने मेरठ की निचली अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा को चुनौती देते हुए खुद को आरोपों से बरी करने की मांग की है। हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई 30 नवंबर को होगी।

हाईकोर्ट की पीठ ने सुनवाई के लिए तय की तारीख
मंगलवार को न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति पदम नारायण मिश्रा की पीठ ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला की अपील पर सुनवाई के लिए 30 नवंबर की तारीख निर्धारित की। दोनों आरोपियों ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए अपनी अपील में कई कानूनी दलीलें पेश की हैं। अब हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान निचली अदालत के निर्णय और अपील में उठाए गए सवालों पर विचार किया जाएगा।

3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ राजपूत की हत्या
यह मामला मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र से जुड़ा है। पूर्व मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत की 3 मार्च 2025 को हत्या कर दी गई थी। इस मामले में उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके साथी साहिल शुक्ला को आरोपी बनाया गया था। घटना सामने आने के बाद पूरे देश में सनसनी फैल गई थी। मामले की गंभीरता और शव को छिपाने के कथित तरीके के कारण यह हत्याकांड लंबे समय तक चर्चा में बना रहा।
नीले प्लास्टिक ड्रम में छिपाया गया था शव
अभियोजन पक्ष के अनुसार, सौरभ राजपूत की हत्या के बाद उनके शव को ठिकाने लगाने के लिए नीले प्लास्टिक के ड्रम का इस्तेमाल किया गया था। आरोप है कि शव को छिपाने के उद्देश्य से ड्रम में सीमेंट और कंक्रीट भरा गया। इसी वजह से इस मामले को मीडिया में ‘नीले ड्रम कांड’ के नाम से जाना गया। घटना की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद मामले ने व्यापक स्तर पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया और पुलिस जांच के साथ न्यायिक कार्रवाई भी चर्चा का विषय बनी।
126 सुनवाइयों के बाद निचली अदालत ने सुनाई थी मौत की सजा
इस मामले में मेरठ के जिला न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने 30 सितंबर को मुस्कान और साहिल को दोषी ठहराया था। इसके बाद 14 अक्टूबर को दोनों को मृत्युदंड सुनाया गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मुकदमे की सुनवाई लगभग 13 महीने तक चली और इस दौरान अदालत में कुल 126 सुनवाइयां हुईं। निचली अदालत के फैसले के बाद अब मामला अपीलीय न्यायिक प्रक्रिया में पहुंच गया है।

अपील में फैसले को बताया अवैध और मनमाना
मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने अपनी अपील में निचली अदालत के निर्णय को अवैध और मनमाना बताया है। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत लगाए गए आरोपों से बरी किए जाने की मांग की है। अपील में यह दलील भी दी गई है कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। हालांकि, ये अपील में आरोपियों की ओर से रखे गए तर्क हैं; इन पर हाईकोर्ट का अंतिम निर्णय आना बाकी है।
30 नवंबर की सुनवाई पर टिकी निगाहें
30 नवंबर को होने वाली सुनवाई इस चर्चित हत्याकांड की कानूनी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण पड़ाव होगी। हाईकोर्ट अपील में प्रस्तुत दलीलों और निचली अदालत के फैसले पर विचार करेगा। केवल अपील दाखिल होने से मृत्युदंड का फैसला अपने आप रद्द नहीं होता। आगे की स्थिति हाईकोर्ट की सुनवाई और न्यायिक आदेशों पर निर्भर करेगी। फिलहाल, इस मामले में अगली महत्वपूर्ण तारीख 30 नवंबर निर्धारित है।
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