Rajya Sabha Election
Rajya Sabha Election: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आगामी 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर सबको चौंका दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस बार अनुभवी राजनीतिज्ञों के साथ-साथ कानूनी और मनोरंजन जगत की दिग्गज हस्तियों पर भरोसा जताया है। टीएमसी ने वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी, पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो, पश्चिम बंगाल के पूर्व डीजीपी राजीव कुमार और मशहूर अभिनेत्री कोयल मल्लिक को अपना उम्मीदवार बनाया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में टीएमसी के बहुमत को देखते हुए इन सभी उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
इस घोषणा की सबसे बड़ी विशेषता मेनका गुरुस्वामी का नामांकन है। यदि वे उच्च सदन (राज्यसभा) के लिए चुनी जाती हैं, तो वे भारतीय संसद के इतिहास में पहली घोषित LGBTQ सांसद बनकर एक नया कीर्तिमान स्थापित करेंगी। यह कदम न केवल बंगाल की राजनीति बल्कि भारतीय लोकतंत्र में समावेशिता (Inclusivity) की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव माना जा रहा है। मेनका गुरुस्वामी की उम्मीदवारी को सामाजिक न्याय और विविधता के प्रति ममता बनर्जी की प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।
मेनका गुरुस्वामी भारत की एक प्रख्यात संवैधानिक वकील हैं। उन्हें विशेष रूप से साल 2018 के उस ऐतिहासिक कानूनी युद्ध के लिए जाना जाता है, जिसके परिणामस्वरूप सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 को आंशिक रूप से रद्द कर दिया था। इस फैसले ने भारत में समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया, जो देश के मानवाधिकार इतिहास में एक बड़ा मोड़ था। मेनका ने अपने करियर की शुरुआत 1997 में पूर्व अटॉर्नी जनरल अशोक देसाई के मार्गदर्शन में की थी। उन्होंने अपने शुरुआती वर्षों में मुख्य रूप से जटिल संवैधानिक मामलों और जनहित याचिकाओं पर काम किया।
अकादमिक रूप से मेनका गुरुस्वामी का रिकॉर्ड बेहद प्रभावशाली है। उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से बीसीएल (BCL) और हार्वर्ड लॉ स्कूल से एलएलएम (LLM) की डिग्री प्राप्त की है। न्यूयॉर्क में कुछ समय तक अंतरराष्ट्रीय कानून फर्म ‘डेविस पोल्क एंड वार्डवेल’ में एसोसिएट के तौर पर काम करने के बाद, वे भारत वापस लौट आईं। उनकी मेधा और सामाजिक प्रभाव के कारण साल 2019 में प्रतिष्ठित TIME मैगजीन ने उन्हें दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची में शामिल किया था। यह सम्मान उन्हें उनकी पार्टनर अरुंधति काटजू के साथ संयुक्त रूप से दिया गया था।
मेनका गुरुस्वामी की जीवनसाथी अरुंधति काटजू भी पेशे से एक जानी-मानी वकील हैं। अरुंधति ने भी धारा 377 के खिलाफ कानूनी लड़ाई में अहम भूमिका निभाई थी। इन दोनों की जोड़ी ने न केवल अदालत में बल्कि समाज में भी समलैंगिक अधिकारों (LGBTQ Rights) के प्रति जागरूकता फैलाने का काम किया है। ‘LGBTQ’ समुदाय उन लोगों का प्रतिनिधित्व करता है जो लेस्बियन, गे, बाईसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर या क्वीर पहचान रखते हैं। मेनका की संसद में मौजूदगी इस समुदाय की आवाज़ को नीति-निर्माण के स्तर पर मजबूती प्रदान करेगी।
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