Middle East Crisis
Middle East Crisis: मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी सैन्य संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल मची हुई है। भारत अपनी एलपीजी (LPG) जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, ऐसे में सरकार ने घरेलू आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए कमर कस ली है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने सोमवार, 23 मार्च 2026 को घोषणा की कि युद्ध से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद देश में गैस की कमी नहीं होने दी जाएगी। सरकार का मुख्य ध्यान समाज के उस वर्ग पर है जो सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकता है, विशेष रूप से प्रवासी श्रमिक और छोटे कारोबारी।
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने जानकारी दी कि सरकार ने प्रवासी श्रमिकों की सुविधा के लिए 5 किलो वाले ‘फ्री ट्रेड एलपीजी’ (FTL) सिलेंडरों की उपलब्धता को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। युद्ध के कारण उपजी अनिश्चितता के बीच श्रमिकों को ईंधन की समस्या न हो, इसके लिए वितरण नेटवर्क को मजबूत किया गया है। यह छोटा सिलेंडर न केवल ले जाने में आसान है, बल्कि कम आय वाले परिवारों और अस्थायी रूप से रहने वाले श्रमिकों के लिए एक किफायती विकल्प भी साबित होता है।
मंत्रालय के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में एलपीजी की ‘पैनिक बुकिंग’ (घबराहट में की जाने वाली बुकिंग) में भारी कमी आई है। सुजाता शर्मा ने बताया कि पिछले तीन हफ्तों के भीतर लगभग 35 लाख नए घरेलू और कमर्शियल एलपीजी कनेक्शन जारी या सक्रिय किए गए हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि रिटेल आउटलेट्स पर स्थिति अब पूरी तरह सामान्य है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है, लेकिन स्थानीय वितरकों के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, जिससे अफरा-तफरी का माहौल खत्म हो गया है।
21 मार्च को लिए गए एक महत्वपूर्ण फैसले के तहत, भारत सरकार ने कमर्शियल एलपीजी का 50 प्रतिशत अतिरिक्त कोटा राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को आवंटित करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आवश्यक सेवाएं और छोटे उद्योग प्रभावित न हों। केंद्र ने राज्यों से अनुरोध किया है कि इस आवंटन का लाभ रेस्तरां, ढाबों, होटलों, औद्योगिक कैंटीन, और डेयरी इकाइयों तक पहुँचाया जाए। अब तक लगभग 20 राज्यों ने इस योजना के तहत कमर्शियल गैस का आवंटन शुरू कर दिया है और 15,800 टन गैस वितरित की जा चुकी है।
सरकार की इस नई नीति का सीधा फायदा स्थानीय निकायों द्वारा संचालित रियायती कैंटीन, सामुदायिक रसोई और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को मिलेगा। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि संकट के इस दौर में सार्वजनिक भोजन व्यवस्था को बाधित नहीं होने दिया जाएगा। राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जिला स्तर पर निगरानी रखें ताकि कमर्शियल सिलेंडरों की कालाबाजारी न हो और जरूरतमंद संस्थानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार गैस मिलती रहे।
सरकार की यह त्वरित प्रतिक्रिया दर्शाती है कि वह मिडिल ईस्ट संकट के दीर्घकालिक प्रभावों से निपटने के लिए तैयार है। एलपीजी वितरण को सामान्य बनाने के साथ-साथ सरकार वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और भंडारण क्षमताओं को बढ़ाने पर भी विचार कर रही है। सुजाता शर्मा ने दोहराया कि मंत्रालय हर रोज आपूर्ति श्रृंखला की समीक्षा कर रहा है ताकि आम जनता को रसोई गैस के लिए किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
Read More : Mark Zuckerberg का बड़ा कदम: मेटा चलाने के लिए बना रहे अपना ‘पर्सनल एआई एजेंट’; जानें कैसे करेगा काम
Korba Murder Case : छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री प्यारेलाल कंवर के परिवार के साथ हुई…
TMC Attack on BJP : पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को 'आरोपपत्र युद्ध' छिड़…
Ayodhya Yagya Fire : राम नगरी अयोध्या में शनिवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल…
TN Election 2026 : तमिलनाडु की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर हलचल अपने…
Virat Kohli IPL 2026 : रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के महानायक विराट कोहली एक बार…
General Upendra Dwivedi : भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी इन दिनों ओडिशा के…
This website uses cookies.