Middle East Storm Alert
Middle East Storm Alert: युद्ध की विभीषिका झेल रहे मध्य पूर्व (Middle East) के देशों पर अब प्रकृति का कहर टूटने वाला है। फारस की खाड़ी के ऊपर एक अत्यंत शक्तिशाली और असामान्य मौसमी तंत्र विकसित हो रहा है, जिसने संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ओमान, कतर, बहरीन और सऊदी अरब जैसे देशों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यह कोई सामान्य मानसूनी हलचल नहीं, बल्कि एक “कट-ऑफ लो प्रेशर सिस्टम” है। यह सिस्टम रेगिस्तानी इलाकों में विनाशकारी बवंडर और मूसलाधार बारिश लाने में सक्षम है। ईरान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों से लेकर कुवैत तक इस तूफान का व्यापक असर देखने को मिल सकता है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त होने की आशंका है।
इस तूफान की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिन मरुस्थलीय क्षेत्रों में साल भर सूखा रहता है, वहां अगले 48 से 72 घंटों में 100 मिमी से लेकर 500 मिमी तक बारिश हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि गुरुवार और शुक्रवार को यह चक्रवात अपने चरम पर होगा। सऊदी अरब और यमन के कुछ हिस्सों में “हबूब” (भयानक धूल भरा तूफान) उठने की प्रबल संभावना है, जो दृश्यता को शून्य कर सकता है। अचानक आने वाली बाढ़ (Flash Floods) इन देशों के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होगी, क्योंकि यहां का बुनियादी ढांचा इतनी अधिक मात्रा में पानी की निकासी के लिए तैयार नहीं है।
दुबई के लिए यह स्थिति बेहद डरावनी है, क्योंकि यहां अप्रैल 2024 में आई उस ऐतिहासिक बाढ़ की यादें अब भी ताजा हैं जब 75 साल का रिकॉर्ड टूटा था। उस दौरान दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रनवे तालाब बन गए थे और 1200 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ी थीं। सामान्यतः दुबई में पूरे साल में केवल 4 इंच बारिश होती है, लेकिन इस वर्तमान सिस्टम के कारण अगले दो दिनों में ही 3 से 6 इंच बारिश होने का अनुमान है। अगर ऐसा होता है, तो शहर की रफ्तार एक बार फिर थम सकती है और अरबों डॉलर के नुकसान का अंदेशा है।
इतिहास गवाह है कि खाड़ी देशों में जब भी इस तरह के असामान्य सिस्टम बने हैं, उन्होंने भारी तबाही मचाई है। मार्च 2019 में ईरान और इराक में हुई भारी बारिश ने अरबों डॉलर की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया था। वहीं, 2022 में सऊदी अरब के जेद्दाह में मात्र 6 घंटे के भीतर 179 मिमी बारिश दर्ज की गई थी, जिसने पूरे शहर को डुबो दिया था। वर्तमान तूफान का प्रभाव मिस्र से लेकर ओमान तक फैलने की उम्मीद है, जिससे मक्का, अल बाहा और जाजन जैसे पवित्र और रणनीतिक स्थल ‘हाई रिस्क’ जोन में आ गए हैं।
खराब मौसम का सबसे सीधा और तत्काल प्रभाव वैश्विक विमानन क्षेत्र पर पड़ने वाला है। दुबई और अबू धाबी जैसे दुनिया के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। तेज हवाओं और बिजली कड़कने के कारण उड़ानों को डायवर्ट करने या रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इसके अलावा, अबू धाबी प्रशासन ने एहतियातन मुख्य सड़कों पर वाहनों की गति सीमा कम कर दी है। कई कंपनियों को अपने कर्मचारियों के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ लागू करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि सड़कों पर भीड़ कम रहे और किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
संभावित आपदा को देखते हुए खाड़ी देशों की सरकारों ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। यूएई, ओमान और सऊदी अरब में आपदा प्रबंधन टीमों और इमरजेंसी सेवाओं को ‘स्टैंडबाय’ मोड पर रखा गया है। निचले इलाकों में रहने वाले प्रवासियों और स्थानीय नागरिकों को ऊंचे व सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित होने की सलाह दी गई है। लोगों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें और मौसम विभाग की हर अपडेट पर नजर रखें। यह प्राकृतिक आपदा ऐसे समय में आई है जब क्षेत्र पहले से ही राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है।
Abhishek Banerjee Attack : पश्चिम बंगाल के कोलकाता से एक बेहद चौंकाने वाली और गंभीर…
Khet Bachao Abhiyan : केंद्र सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम…
Indian Navy News : भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने 29 मई को…
DK Shivakumar CM : कर्नाटक के सियासी हलके से इस वक्त की सबसे बड़ी और…
Rain in Navatpa : नवतपा के पांचवें दिन भीषण गर्मी से जूझ रहे अंबिकापुरवासियों को…
FIFA World Cup 2026 : दुनिया के सबसे बड़े खेल महाकुंभ यानी फीफा वर्ल्ड कप…
This website uses cookies.