Bijapur IED Blast: राज्य के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले से एक बार फिर नक्सलियों की अमानवीय हरकत सामने आई है। थाना गंगालूर क्षेत्र के पीडिया इलाके में नक्सलियों द्वारा बिछाई गई IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) की चपेट में आने से एक नाबालिग बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया। यह घटना शुक्रवार सुबह की बताई जा रही है, जब बच्चा अपने गांव के पास से गुजर रहा था।

बम के जाल में फंसा मासूम
जानकारी के अनुसार, नक्सलियों ने सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने के इरादे से अपने आधार क्षेत्रों में बमों का जाल बिछा रखा है। लेकिन इसका खामियाजा कई बार निर्दोष ग्रामीणों और मवेशियों को भुगतना पड़ता है। ताजा मामले में भी ऐसा ही हुआ जब एक मासूम बच्चा खेलते-खेलते या किसी कार्य से वहां से गुजर रहा था और उसका पैर IED पर पड़ गया। धमाका इतना जोरदार था कि बच्चा मौके पर ही बुरी तरह जख्मी हो गया।

जवानों ने दिखाई मानवीयता, समय पर पहुंचाया अस्पताल
घटना की सूचना मिलते ही इलाके में तैनात CRPF की 199वीं और 85वीं बटालियन के जवान मौके पर पहुंचे और तत्काल प्राथमिक इलाज के बाद घायल बच्चे को बीजापुर जिला अस्पताल ले जाया गया। जवानों की तत्परता से बच्चे की जान बचाई जा सकी है, लेकिन उसकी हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।
इलाके में बढ़ी दहशत
घटना के बाद पीडिया और आसपास के गांवों में भय और तनाव का माहौल बना हुआ है। लोग अब भी डर के साए में जी रहे हैं, क्योंकि यह इलाका पहले भी नक्सली गतिविधियों के लिए जाना जाता रहा है। IED ब्लास्ट जैसी घटनाएं आम जनता को सीधे निशाना नहीं बनातीं, लेकिन इनका प्रभाव सबसे अधिक ग्रामीणों पर ही पड़ता है।
बार-बार उजागर होता नक्सलियों का अमानवीय चेहरा
यह पहली बार नहीं है जब नक्सलियों की ओर से बिछाए गए बमों की चपेट में मासूम आए हों। इससे पहले भी कई घटनाओं में ग्रामीणों, बच्चों और मवेशियों की जानें जा चुकी हैं। सवाल यह उठता है कि जिस विचारधारा के नाम पर नक्सली खुद को ‘जनता का हितैषी’ बताते हैं, उसी जनता की जिंदगी को खतरे में डालना कैसे सही ठहराया जा सकता है?
सुरक्षा एजेंसियों की चुनौती बनी IED
नक्सली IED का इस्तेमाल कर सुरक्षा बलों की आवाजाही को बाधित करते हैं। यह सुरक्षाबलों के लिए भी एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि इन्हें पहचानना और निष्क्रिय करना बेहद जोखिम भरा होता है। बावजूद इसके, सुरक्षा बल सतर्कता और तकनीकी सहायता के साथ लगातार ऐसे क्षेत्रों में ऑपरेशन चला रहे हैं।बीजापुर की यह घटना नक्सलवाद की क्रूर और अमानवीय हकीकत को फिर से सामने लाती है। जहां एक ओर सरकार और सुरक्षाबल शांति स्थापना के प्रयास में जुटे हैं, वहीं नक्सली अब भी मासूमों की जिंदगी से खेल रहे हैं। जरूरत है कि ऐसे कृत्यों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और प्रभावित इलाकों में जन-जागरूकता के साथ-साथ स्थायी विकास योजनाएं चलाई जाएं, ताकि हिंसा की जगह उम्मीदें और संभावनाएं पनप सकें।










