Shortness of Breath : सांस फूलने की समस्या को न करें नजरअंदाज, यह दिल की बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता

Shortness of Breath : अक्सर लोग सीढ़ियां चढ़ते समय, भारी काम करते हुए या कुछ दूरी तक चलने पर सांस फूलने की समस्या को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। कई बार इसे उम्र बढ़ने, शारीरिक फिटनेस की कमी या अत्यधिक तनाव का परिणाम समझ लिया जाता है, लेकिन डॉ. अमर सिंघल (डायरेक्टर – कार्डियोलॉजी, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली) के अनुसार, यह लापरवाही भारी पड़ सकती है। यदि आपको सामान्य गतिविधियों या सीधे लेटने की स्थिति में भी सांस लेने में तकलीफ हो रही है, तो यह दिल से जुड़ी किसी गंभीर समस्या का शुरुआती संकेत हो सकता है। समय रहते इन लक्षणों की पहचान कर इलाज शुरू करने से हृदय संबंधी जटिलताओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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हृदय रोगों से सांस फूलने का गहरा संबंध

हार्ट और फेफड़े मिलकर शरीर को ऑक्सीजन युक्त रक्त की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं। जब हृदय की पंपिंग क्षमता कमजोर हो जाती है—जैसा कि हार्ट फेलियर, कोरोनरी आर्टरी डिजीज या वाल्व संबंधित बीमारियों में होता है—तो हृदय शरीर की ऑक्सीजन आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ हो जाता है। ऐसी स्थिति में, रक्त का प्रवाह फेफड़ों की ओर वापस होने लगता है, जिससे फेफड़ों में तरल पदार्थ (फ्लूइड) जमा होने लगता है। इसके कारण फेफड़ों की ऑक्सीजन विनिमय की क्षमता घट जाती है, जिससे सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है।

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ऑर्थोपनिया और रात की बेचैनी: क्या हैं ये संकेत?

हृदय रोगियों में अक्सर ‘ऑर्थोपनिया’ की स्थिति देखी जाती है, जिसमें मरीज को सीधे लेटने पर सांस फूलने का अहसास होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि लेटने की स्थिति में हृदय और फेफड़ों पर रक्त का दबाव बढ़ जाता है, जिससे कंजेशन और अधिक बढ़ जाता है। कुछ मरीजों को रात में अचानक हांफते हुए जागने की समस्या होती है, जिसे पैरोक्सिस्मल नॉक्टर्नल डिस्पेनिया कहा जाता है। थकान, पैरों में सूजन और एक्सरसाइज करने की क्षमता में गिरावट के साथ यदि ये लक्षण दिखाई दें, तो इसे कभी भी सामान्य नहीं मानना चाहिए और तुरंत कार्डियोलॉजिस्ट से परामर्श करना अनिवार्य है।

सीने में दर्द और अन्य हृदय संबंधी जटिलताएं

सांस फूलने के साथ सीने में दर्द और धड़कन का तेज होना दिल की गंभीर समस्याओं, जैसे कोरोनरी आर्टरी डिजीज का संकेत हो सकता है। एरिथमिया (हृदय की लय में गड़बड़ी) के कारण भी व्यक्ति को चक्कर आना, थकान और सांस फूलने जैसे लक्षण महसूस होते हैं। इसी तरह, हृदय के वाल्वों में खराबी भी रक्त परिसंचरण में रुकावट डालती है, जिससे हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इन सभी स्थितियों में हृदय की पंपिंग क्षमता प्रभावित होती है, जिससे न केवल सांस फूलती है, बल्कि शरीर के अंगों में सूजन और सीने में भारीपन भी महसूस हो सकता है।

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना आवश्यक है?

हालांकि एंग्जायटी या फेफड़ों के संक्रमण भी सांस फूलने का कारण हो सकते हैं, लेकिन यदि यह तकलीफ अचानक शुरू हो, तेजी से बढ़ रही हो, या आराम करते समय भी महसूस हो, तो इसे मेडिकल इमरजेंसी के रूप में देखना चाहिए। सांस फूलने के साथ सीने में तीव्र दबाव, बेहोशी, अत्यधिक पसीना आना या जबड़े व बाहों में दर्द जैसे लक्षण दिल का दौरा पड़ने की चेतावनी हो सकते हैं। ऐसी किसी भी स्थिति में देरी करना जानलेवा साबित हो सकता है। जागरूक रहें, अपने शरीर के संकेतों को पहचानें और बार-बार होने वाली सांस की तकलीफ के लिए हमेशा विशेषज्ञ से जांच कराएं।

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Chandan Das

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