MK Stalin Statement : सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके और नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने का मामला राजनीतिक चर्चा में आ गया है। डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने दोनों को हिरासत में रखे जाने और उनके ठिकाने की जानकारी सार्वजनिक नहीं किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से दोनों की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को रोकने की कोशिश बंद करने की अपील की है।
हिरासत और ठिकाने की जानकारी नहीं देने पर जताई चिंता
एमके स्टालिन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए पूछा कि अभिजीत दीपके और नेहा बोरा कहां हैं तथा उन्हें किस स्थान पर रखा गया है। उन्होंने कहा कि हिरासत में लिए गए लोगों के ठिकाने की जानकारी नहीं देना गैरकानूनी और अमानवीय है। स्टालिन ने केंद्र सरकार से दोनों को जल्द रिहा करने की मांग की। उनके बयान में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार और हिरासत की पारदर्शिता का मुद्दा प्रमुख रहा।
आंदोलन को दबाने के प्रयासों पर स्टालिन का बयान
स्टालिन ने अपने संदेश में कहा कि किसी आंदोलन को दबाने की कोशिश उसे और मजबूत कर सकती है। उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रहे #GyaneshKumarMustGo अभियान का भी समर्थन किया और इस मुद्दे पर केंद्र की भाजपा सरकार की आलोचना की। यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन तथा राजनीतिक बयानबाजी जारी है।
नेहा बोरा की पोस्ट को किया रीपोस्ट
स्टालिन ने नेहा बोरा की उस पोस्ट को भी साझा किया, जिसमें उन्होंने हिरासत में लिए जाने और फोन अपने पास नहीं होने की बात कही थी। पोस्ट में दिल्ली पुलिस से जवाब मांगते हुए नेहा के ठिकाने को लेकर सवाल उठाया गया। उन्होंने इस कार्रवाई को अपहरण जैसा बताया। यह नेहा की ओर से लगाया गया आरोप है; हिरासत की परिस्थितियों और उनके स्थान के बारे में संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष भी महत्वपूर्ण है।
‘लहरा दो तिरंगा’ कार्यक्रम के दौरान हुई कार्रवाई
जानकारी के मुताबिक, अभिजीत दीपके और नेहा बोरा को उस समय अलग-अलग स्थानों से हिरासत में लिया गया, जब वे ‘लहरा दो तिरंगा’ अभियान के तहत दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराने जाना चाहते थे। यह घटनाक्रम राजधानी में प्रदर्शन से संबंधित प्रतिबंधों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर बहस के बीच सामने आया। प्रदर्शनकारियों के उद्देश्य और पुलिस की कार्रवाई के संबंध में विभिन्न पक्षों के बयानों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
जॉन ब्रिटास ने भी पुलिस कार्रवाई पर दी प्रतिक्रिया
सीपीआईएम सांसद जॉन ब्रिटास ने भी इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी। उनके बयान के मुताबिक, पुलिस ने सेंट्रल दिल्ली में पहुंचने पर रोक लगाने की बात कही थी, लेकिन प्रदर्शनकारी वहां पहुंच गए और उन्होंने प्रतिबंध का उल्लंघन करने की बात स्वीकार की। ब्रिटास ने कहा कि उन्होंने तिरंगे का सम्मान किया है और पुलिस आगे जो चाहे, कर सकती है। उनका बयान प्रदर्शनकारियों के रुख को दर्शाता है।
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और हिरासत में लिए गए लोग
दिल्ली पुलिस के सूत्रों के हवाले से बताया गया कि इस घटनाक्रम के दौरान अब तक करीब 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था। हालांकि, सभी हिरासत में लिए गए लोगों की पहचान, वर्तमान स्थिति और रिहाई के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध होना जरूरी है। अभिजीत दीपके और नेहा बोरा के मामले में भी उनके ठिकाने, हिरासत की कानूनी स्थिति और पुलिस के आधिकारिक जवाब पर आगे की जानकारी का इंतजार रहेगा।
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