Modern Farming
Modern Farming: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के एक प्रगतिशील किसान ने पारंपरिक खेती की सीमाओं को तोड़ते हुए एक शानदार मिसाल पेश की है। अक्सर किसानों को लगता है कि एक समय में एक खेत से केवल एक ही मुख्य फसल ली जा सकती है, लेकिन रेवतीपुर ब्लॉक के पकड़ी गांव के किसान अनूप राय ने इसे गलत साबित कर दिया है। उन्होंने अपने करीब एक बीघे के खेत में केले की फसल के साथ-साथ ‘अफ्रीकन गेंदा’ लगाकर सबको हैरान कर दिया है। यह न केवल जमीन के बेहतर उपयोग का उदाहरण है, बल्कि यह खेती में जोखिम को कम करने और मुनाफे को कई गुना बढ़ाने की एक सोची-समझी रणनीति भी है।
इस दोहरी खेती (Intercropping) के पीछे वैज्ञानिक कारण भी छिपा है। अनूप राय बताते हैं कि अफ्रीकन गेंदे का पौधा अपनी जड़ों और फूलों से एक ऐसा प्राकृतिक रसायन छोड़ता है, जो केले की फसल के लिए घातक माने जाने वाले ‘नेमाटोड’ जैसे हानिकारक कीटों को दूर भगाता है। यह एक तरह से केले की फसल के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है। इसके अतिरिक्त, केले के बड़े-बड़े पत्ते सर्दियों के मौसम में गेंदे के फूलों को ‘पाला’ लगने से बचाते हैं। इस प्रकार, दोनों फसलें एक-दूसरे की पूरक बन जाती हैं, जिससे किसान को कीटनाशकों पर होने वाले खर्च में भी बड़ी राहत मिलती है।
अनूप राय एक जागरूक किसान हैं जो समय-समय पर कृषि विज्ञान केंद्रों और उद्यान विभाग के चक्कर लगाते रहते हैं। सरकारी योजनाओं और वैज्ञानिकों के संपर्क में रहने के कारण ही उन्हें इस ‘मिश्रित खेती’ के फायदे पता चले। केंद्र सरकार द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को अनूप जैसे किसान अपने दम पर सच कर रहे हैं। वैज्ञानिकों ने उन्हें सलाह दी थी कि केले के पौधों के बीच जो खाली जगह बचती है, उसका सदुपयोग गेंदे की खेती के लिए किया जा सकता है। इससे मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है और किसान को साल भर कुछ न कुछ आमदनी होती रहती है।
इस प्रयोग का आर्थिक पक्ष बेहद मजबूत है। अनूप राय ने बताया कि पिछले चार-पांच महीनों के भीतर उन्होंने गेंदे के फूलों की बिक्री से लगभग 50 हजार रुपये की कमाई कर ली है। खास बात यह है कि इस रकम से उनकी केले की खेती में लगी पूरी शुरुआती लागत और खाद-पानी का खर्च निकल चुका है। अब उनके खेत में खड़ी केले की पूरी फसल उनके लिए शुद्ध मुनाफे के रूप में है। चूंकि अब शादियों और त्योहारों का सीजन शुरू हो चुका है, बाजार में फूलों की मांग और कीमत दोनों बढ़ गई हैं, जिससे उन्हें और अधिक लाभ होने की उम्मीद है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की खेती न केवल आर्थिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि यह फसल खराब होने के जोखिम को भी कम करती है। यदि किसी कारणवश एक फसल प्रभावित होती है, तो दूसरी फसल किसान को आर्थिक सहारा देती है। गाजीपुर के इस मॉडल ने साबित कर दिया है कि यदि किसान पारंपरिक ढर्रे को छोड़कर आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाए, तो खेती को एक बेहद मुनाफे वाले व्यवसाय में बदला जा सकता है। अब आसपास के क्षेत्रों के अन्य किसान भी अनूप राय के खेत को देखने पहुंच रहे हैं ताकि वे भी इस तकनीक को अपना सकें।
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