Cabinet Decisions 2026 : देश के कृषि परिदृश्य को आधुनिक बनाने की दिशा में केंद्रीय कैबिनेट ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ‘कपास क्रांति मिशन’ को अपनी हरी झंडी दे दी है। इस महात्वाकांक्षी मिशन के लिए सरकार ने ₹5,659 करोड़ का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है। इसे वित्तीय वर्ष 2026-27 से लेकर 2030-31 तक पूरे देश में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। भारत वर्तमान में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा कपास उत्पादक देश है और लगभग 32 लाख किसान प्रत्यक्ष रूप से इस नकदी फसल की खेती से जुड़े हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य गहन अनुसंधान, उन्नत बीज तकनीक और बेहतर फाइबर गुणवत्ता के माध्यम से उत्पादन क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। इस मिशन का लक्ष्य 2030-31 तक देश की बढ़ती घरेलू मांग, जो लगभग 450 लाख बेल होने का अनुमान है, को स्वदेशी उत्पादन से ही पूरा करना है।

गन्ना किसानों के लिए दिवाली जैसा तोहफा: FRP में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
खेती के मोर्चे पर दूसरा बड़ा फैसला गन्ना किसानों के लिए लिया गया है। कैबिनेट ने आगामी 2026-27 सीजन के लिए गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) के नए ढांचे को मंजूरी दी है। इस फैसले का व्यापक वित्तीय असर लगभग ₹1 लाख करोड़ होने का अनुमान है। सरकार के इस कदम से उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों सहित देश के करोड़ों किसानों की आय में सीधा इजाफा होगा। यह न्यूनतम समर्थन मूल्य की तरह एक गारंटीड बेस प्राइस है, जो चीनी मिलों को किसानों को अनिवार्य रूप से भुगतान करना होता है।
MSME सेक्टर की संजीवनी: इमरजेंसी क्रेडिट लाइन स्कीम का विस्तार
मध्यम और लघु उद्योगों (MSME) को आर्थिक मजबूती प्रदान करने के लिए सरकार ने ‘इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम’ (ECLGS 5) को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस योजना पर सरकार ₹18,100 करोड़ खर्च करेगी। कोरोना काल के बाद से छोटे उद्योगों के लिए यह योजना लाइफलाइन साबित हुई है। इस विस्तार का मुख्य उद्देश्य कारोबारियों को सस्ती दरों पर और बिना किसी जटिल प्रक्रिया के आसान लोन उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने व्यापार का विस्तार कर सकें और रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकें।
रेलवे और शिपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर: कनेक्टिविटी और रोजगार पर जोर
बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भी कैबिनेट ने तिजोरी खोल दी है। गुजरात के वडिनार में ₹1,570 करोड़ की लागत से एक अत्याधुनिक ‘शिप रिपेयर हब’ बनाने को मंजूरी दी गई है, जिससे भारत समुद्री मरम्मत के क्षेत्र में एक वैश्विक केंद्र बनेगा। वहीं, रेलवे सेक्टर में तीन प्रमुख परियोजनाओं को हरी झंडी मिली है:
नागदामथुरा लाइन: ₹16,403 करोड़ का निवेश।
गुंटकलवाड़ी लाइन: ₹4,758 करोड़ का आवंटन।
बुरहवाल-सीतापुर लाइन: ₹2,276 करोड़ की परियोजना। इन रेलवे लाइनों पर तीसरी और चौथी ट्रैक बिछाने से न केवल रेल यातायात का दबाव कम होगा, बल्कि यात्री और मालगाड़ियों की गति में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।
तकनीकी आत्मनिर्भरता: सेमीकंडक्टर चिप निर्माण में दो नई इकाइयां
भारत को दुनिया का ‘टेक हब’ बनाने के संकल्प के साथ कैबिनेट ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में दो नई यूनिट्स की स्थापना को मंजूरी दी है। इसमें क्रिस्टल मैट्रिक्स लिमिटेड (₹3,068 करोड़) और सूची सेमीकॉन प्राइवेट लिमिटेड (₹868 करोड़) के निवेश प्रस्ताव शामिल हैं। चिप मैन्युफैक्चरिंग में निवेश से भारत की विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी और इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण के क्षेत्र में देश आत्मनिर्भर बनेगा। इसके साथ ही, कैबिनेट ने न्यायपालिका के सुदृढ़ीकरण और सुप्रीम कोर्ट की सुविधाओं में सुधार के लिए भी नीतिगत निर्णय लिए हैं, जो त्वरित न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।
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