Mohammad Ilyas Death
Mohammad Ilyas Death: पाकिस्तान क्रिकेट जगत से एक अत्यंत दुखद समाचार सामने आया है। पूर्व टेस्ट क्रिकेटर मोहम्मद इलियास का 79 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। वे पिछले काफी समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर मिलते ही खेल प्रेमियों और क्रिकेट जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने इस क्षति पर गहरा दुख व्यक्त किया है। पीसीबी के चेयरमैन मोहसिन नकवी ने दिवंगत खिलाड़ी के परिवार के प्रति संवेदनाएं प्रकट करते हुए कहा कि इलियास साहब का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।
मोहम्मद इलियास का अंतरराष्ट्रीय करियर 1960 के दशक में परवान चढ़ा। उन्होंने दिसंबर 1964 में मेलबर्न के ऐतिहासिक मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना टेस्ट डेब्यू किया था। अपने 5 साल के छोटे लेकिन प्रभावशाली करियर में उन्होंने पाकिस्तान के लिए 10 टेस्ट मैच खेले। इलियास ने 23.21 की औसत से कुल 441 रन बनाए, जिसमें एक शानदार शतक और दो अर्धशतक शामिल थे। उनका एकमात्र टेस्ट शतक न्यूजीलैंड के खिलाफ आया था। उन्होंने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच मार्च 1969 में ढाका में इंग्लैंड के खिलाफ खेला था।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की तुलना में मोहम्मद इलियास का प्रथम श्रेणी (First-Class) करियर कहीं अधिक भव्य रहा। 1961 से 1972 के बीच उन्होंने 82 प्रथम श्रेणी मैच खेले, जिसमें 35.71 की शानदार औसत से 4607 रन बनाए। उन्होंने अपना आखिरी मान्यता प्राप्त मैच 1975 में खेला। उनके खेल की सबसे बड़ी विशेषता उनकी तकनीक और क्रीज पर टिकने की क्षमता थी, जिसने उन्हें लाहौर क्रिकेट का एक बड़ा नाम बना दिया था।
दिलचस्प बात यह है कि क्रिकेट मोहम्मद इलियास का पहला प्यार नहीं था। अपनी किशोरावस्था में वे एक बॉक्सर बनना चाहते थे। उन्होंने स्कूल स्तर पर ‘फ्लाईवेट बॉक्सर’ के रूप में काफी सफलता भी हासिल की थी। हालांकि, नियति ने उनके लिए कुछ और ही तय किया था। लाहौर में अपने घर के पास गली क्रिकेट में तेज गेंदबाजी करते समय उन पर एक शिक्षक की नजर पड़ी। मुस्लिम मॉडल स्कूल के उस शिक्षक ने उन्हें स्कूल नेट्स पर आमंत्रित किया, जहाँ उनके क्रिकेट कौशल ने सभी को हैरान कर दिया और उन्हें तुरंत स्कूल टीम में चुन लिया गया।
इलियास ने एक ऑलराउंडर के रूप में अपनी यात्रा शुरू की थी। फैसलाबाद में अपने पहले मैच में उन्होंने न केवल प्रभावी गेंदबाजी की, बल्कि एक ‘नाइटवॉचमैन’ के रूप में मैदान पर आकर शानदार अर्धशतक भी जड़ा। समय के साथ उन्होंने लेग-स्पिन गेंदबाजी भी सीखी, लेकिन अंततः उनकी बल्लेबाजी ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी। वे जल्द ही लाहौर के सबसे पुराने क्लब ‘क्रिसेंट क्लब’ का हिस्सा बने। नवंबर 1961 में कायदे-ए-आजम ट्रॉफी के माध्यम से उन्होंने प्रथम श्रेणी में कदम रखा और तीन साल की कड़ी मेहनत व तीन शतकों के बाद उन्हें राष्ट्रीय टीम का टिकट मिला।
मोहम्मद इलियास का जाना पाकिस्तान के उस सुनहरे दौर के अंत जैसा है, जब क्रिकेट जुनून और सादगी के साथ खेला जाता था। एक बॉक्सर से टॉप-ऑर्डर बल्लेबाज बनने तक की उनकी कहानी युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक है। उनके निधन से पाकिस्तान ने न केवल एक बेहतरीन खिलाड़ी बल्कि क्रिकेट की एक चलती-फिरती लाइब्रेरी को खो दिया है।
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