Mojtaba Khamenei
Mojtaba Khamenei: ईरान की सत्ता के शीर्ष गलियारों से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। ‘टाइम्स ऑफ इजराइल’ की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के नवनियुक्त सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई मौजूदा भीषण युद्ध के दौरान घायल हो गए हैं। ईरान के सरकारी टेलीविजन ने उन्हें ‘जानबाज’ कहकर संबोधित किया है, जिसका कूटनीतिक और युद्धक अर्थ यह है कि वे प्रत्यक्ष रूप से दुश्मन के हमले का शिकार हुए हैं। हालांकि, अभी तक आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि मुजतबा किस स्थान पर और किस तरह के हमले में घायल हुए हैं। यह खबर ऐसे समय में आई है जब हाल ही में हुए हमलों में मुजतबा के पिता, पत्नी और बेटी की जान जा चुकी है।
अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद, उनके बेटे मुजतबा खामेनेई को बीती रात ईरान का नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया था। लेकिन उनकी ताजपोशी के साथ ही इजराइल और अमेरिका ने कड़ा रुख अपना लिया है। इजराइल ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि बिना अंतरराष्ट्रीय सहमति और मौजूदा परिस्थितियों को नजरअंदाज कर जो भी ईरान का सर्वोच्च नेता बनेगा, उसे ‘सर्च एंड किल’ मिशन के तहत खत्म कर दिया जाएगा। इजराइल ने दो टूक कहा है कि नया सुप्रीम लीडर चाहे पाताल में ही क्यों न छुपा हो, उसे खोज निकाला जाएगा। जंग शुरू होने के बाद से ही मुजतबा को सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर कयासों का बाजार गर्म है।
ईरान की राजनीति और धर्म के शिखर पर 35 वर्षों तक काबिज रहने वाले अयातुल्ला अली खामेनेई का सफर 28 फरवरी को अमेरिकी-इजरायली हमले के साथ समाप्त हो गया। 1989 में रुहोल्लाह खुमैनी के निधन के बाद खामेनेई ने सत्ता संभाली थी। उन्होंने 1979 की इस्लामिक क्रांति में अहम भूमिका निभाई थी और शाह मोहम्मद रजा पहलवी के पतन के बाद ईरान को एक नई दिशा दी थी। 1981 से 1989 तक वे राष्ट्रपति रहे और उसके बाद सर्वोच्च नेता बने। ईरान के कानून के अनुसार, इस पद पर बैठने के लिए ‘अयातुल्ला’ (धार्मिक पदवी) होना अनिवार्य है, जो मुजतबा के लिए सत्ता के मार्ग को चुनौतीपूर्ण बनाता है।
मिडिल ईस्ट में छिड़ी इस जंग की आग अब पड़ोसी देशों के तेल बाजारों तक पहुंच गई है। बहरीन की सरकारी तेल कंपनी ‘बापको एनर्जीज’ ने अपनी गतिविधियों पर ‘फोर्स मेज्योर’ (Force Majeure) लागू कर दिया है। इसका अर्थ है कि युद्ध जैसे अनियंत्रित हालात के कारण यदि तेल की आपूर्ति रुकती है, तो कंपनी कानूनी रूप से जिम्मेदार नहीं होगी। यह कदम तब उठाया गया जब बहरीन की मुख्य रिफाइनरी से धुएं के गुबार उठते देखे गए। सरकार के अनुसार, सित्रा इलाके में ईरानी ड्रोन हमलों से भारी नुकसान हुआ है। बापको एनर्जीज बहरीन की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, और इसका ठप होना वैश्विक तेल संकट का संकेत है।
ईरानी ड्रोन हमलों ने बहरीन के ऊर्जा क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित किया है। सित्रा रिफाइनरी पर हुए हमलों के कारण न केवल बुनियादी ढांचे को क्षति पहुंची है, बल्कि कई कर्मचारी भी घायल हुए हैं। तेल रिफाइनरी से उठने वाला काला धुआं इस बात का गवाह है कि युद्ध अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आर्थिक संपत्तियों को भी निशाना बना रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना है, क्योंकि बहरीन क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण एनर्जी फैसिलिटी है। वर्तमान में हालात पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर बताए जा रहे हैं।
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