Monalisa Bhosle Marriage
Monalisa Bhosle Marriage : प्रयागराज कुंभ मेले के दौरान अपनी अनूठी कहानी के लिए चर्चा में आईं किशोरी मोनालिसा भोसले की शादी अब केरल में एक बड़े राजनीतिक तूफान का केंद्र बन गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस मामले में सत्तारूढ़ दल सीपीएम (माकपा) के नेताओं पर गहरी मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कड़ी आपराधिक कार्रवाई की मांग की है। भाजपा के प्रदेश महासचिव एस. सुरेश ने इस विवाह को एक बड़ी सोची-समझी साजिश का हिस्सा करार दिया है। उन्होंने तीखा सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर 16 साल की एक नाबालिग लड़की की शादी राजनीतिक दिग्गजों की मौजूदगी में कैसे संपन्न हो गई और किसी ने कानून का पालन क्यों नहीं सुनिश्चित किया।
यह विवाद उस समय और अधिक गंभीर हो गया जब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की रिपोर्ट में आधिकारिक तौर पर लड़की के नाबालिग होने की बात सामने आई। अस्पताल के रिकॉर्ड और दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच के अनुसार, लड़की का जन्म दिसंबर 2009 में हुआ था, जिसका अर्थ है कि मार्च में हुई शादी के समय उसकी उम्र केवल 16 वर्ष थी। इस रिपोर्ट के आधार पर मध्य प्रदेश पुलिस ने दूल्हे फरमान खान के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पोक्सो) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। आयोग ने इस मामले में गहरी साजिश के संकेत दिए हैं और केरल व मध्य प्रदेश के पुलिस प्रमुखों को दिल्ली तलब किया है।
भाजपा नेता एस. सुरेश ने आरोप लगाया है कि सीपीएम ‘धर्मनिरपेक्षता’ की आड़ में कानून की धज्जियां उड़ाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने पार्टी के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन, शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी और सांसद ए.ए. रहीम के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने की मांग की है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्रों के साथ कथित तौर पर फर्जीवाड़ा किया गया है ताकि शादी को वैध दिखाया जा सके। भाजपा ने उन सभी अधिकारियों और नेताओं पर कार्रवाई की मांग की है जिन्होंने बिना सत्यापन के इस अवैध विवाह को बढ़ावा दिया और इसे संभव बनाया।
विवादों में घिरे होने के बावजूद सीपीआई (एम) ने इस शादी के आयोजन में अपनी किसी भी प्रत्यक्ष भूमिका से साफ इनकार किया है। पार्टी का कहना है कि उनके नेता केवल तब वहां पहुंचे जब उन्हें समारोह के बारे में जानकारी मिली। पिछले महीने, इस जोड़े की शादी के बाद वामपंथी नेताओं ने उनसे मुलाकात की थी और इसे ‘असली केरल स्टोरी’ (Real Kerala Story) बताते हुए सांप्रदायिक सद्भाव का उदाहरण पेश करने की कोशिश की थी। हालांकि, अब कानून की पकड़ मजबूत होने के बाद पार्टी इस मामले से पल्ला झाड़ती नजर आ रही है।
सीपीआई के प्रदेश सचिव बिनॉय विश्वम ने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीति से प्रेरित बताया है। उन्होंने तर्क दिया कि शादी उस समय अधिकारियों को पेश किए गए पहचान दस्तावेजों के आधार पर हुई थी। विश्वम ने कहा कि लड़की के नाबालिग होने के आरोपों के पीछे एक खास राजनीतिक मकसद है। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को तूल दे रहा है, लेकिन वे इसे इतनी आसानी से भूलने वाले नहीं हैं। फिलहाल, यह मामला अब सिर्फ एक विवाह तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि केरल की राजनीति और कानून व्यवस्था के बीच एक बड़ी जंग में तब्दील हो चुका है। मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
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