Monkey Price Hike
Monkey Price Hike: चीन से एक बेहद अजीबोगरीब और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। नए साल की शुरुआत के साथ ही वहां बंदरों की मांग में अप्रत्याशित उछाल देखने को मिल रहा है। जो बंदर पहले कुछ हजार रुपयों में आसानी से मिल जाते थे, अब उनकी कीमत बीजिंग और आसपास के इलाकों में 25 लाख रुपये तक पहुंच गई है। हैरानी की बात यह है कि आम जनता तो दूर, खुद राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सरकारी एजेंसियां भी इतनी महंगी कीमत पर बंदर खरीदने को मजबूर हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि सरकार ने अब नागरिकों से बंदरों के प्रजनन में मदद करने की अपील की है।
चीन में बंदरों की इस कदर बढ़ती डिमांड का सीधा संबंध उसके महत्वाकांक्षी मेडिकल प्रोजेक्ट्स से है। दरअसल, चीन चिकित्सा क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करने की होड़ में लगा है। सिक्सटोन की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन में हर साल औसतन 25 हजार बंदरों पर अलग-अलग टीकों का परीक्षण (Vaccine Trial) किया जाता है। हाल के वर्षों में एमपोक्स, कोरोना और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों के साथ-साथ ‘उम्र बढ़ाने वाली वैक्सीन’ (Anti-Aging Vaccine) पर भी शोध तेज हुआ है। इन जटिल परीक्षणों के लिए बंदरों की जरूरत होती है, और इस बार परीक्षणों की संख्या बढ़ने के कारण बाजार में इनकी कमी हो गई है।
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पहली बार नहीं है जब चीन में एक बंदर की कीमत 25 लाख रुपये तक पहुंची हो। साल 2021 में, जब पूरी दुनिया कोरोना वैक्सीन बनाने की दौड़ में थी, तब भी चीन में बंदरों के दाम इसी स्तर पर थे। उसके बाद मांग में थोड़ी गिरावट आई थी, लेकिन ठीक 5 साल बाद अब फिर से वही स्थिति पैदा हो गई है। आलम यह है कि दवा कंपनियों के बीच लैब से बंदर खरीदने को लेकर होड़ मची है। कुछ बड़ी कंपनियाँ तो विदेश से भी बंदरों का आयात करने की कोशिश कर रही हैं।
चीन में बंदरों की आपूर्ति बढ़ाने के लिए प्राकृतिक तरीकों के साथ-साथ बायो-केमिकल विधियों का भी सहारा लिया जा रहा है। चीन के एनएचपी (Non-Human Primates) प्रजनन और विकास संघ के अनुसार, बंदरों के कृत्रिम प्रजनन की शुरुआत 2018 में हुई थी। साल 2021 में रिकॉर्ड 30,000 बंदरों का प्रजनन कराया गया था, फिर भी मांग पूरी नहीं हो पा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह कमी जल्द दूर नहीं हुई, तो बंदरों की तस्करी (Smuggling) बढ़ सकती है। साल 2021 में भी कमी को पूरा करने के लिए कंबोडिया जैसे देशों से बड़े पैमाने पर अवैध तरीके से बंदर लाए गए थे।
चीन सरकार ने अपने मेडिकल उद्योग को वैश्विक स्तर पर नंबर वन बनाने के लिए कई नए प्रयोगों का आह्वान किया है। 2025 और 2026 के शोध लक्ष्यों को देखते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि बंदरों की मांग और भी बढ़ सकती है। परीक्षणों की बढ़ती संख्या और बंदरों की सीमित आबादी के बीच का यह असंतुलन न केवल रिसर्च की लागत बढ़ा रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पशु अधिकारों को लेकर भी नई बहस छेड़ सकता है। फिलहाल, चीन का पूरा जोर घरेलू स्तर पर बंदरों की आबादी बढ़ाने पर है ताकि विदेशी निर्भरता और तस्करी को कम किया जा सके।
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