MP BSNL Bribe Case : मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए BSNL के दो वरिष्ठ इंजीनियरों को कथित रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अधिकारियों में चीफ इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल) और सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल) शामिल हैं। दोनों अधिकारियों पर जबलपुर की एक निजी फर्म के लंबित बिलों का भुगतान कराने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है। CBI ने शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू की और निर्धारित प्रक्रिया के तहत ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया।
फर्म के 14 बिल भुगतान के लिए थे लंबित
जांच एजेंसी के अनुसार, जबलपुर की एक फर्म BSNL के ऑपरेशन एंड कॉम्प्रिहेंसिव मेंटेनेंस (OCM) और इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशन से जुड़े विभिन्न कार्य कर रही थी। फर्म के कुल 14 अलग-अलग कार्यों से संबंधित बिल भुगतान के लिए लंबित बताए गए थे। आरोप है कि इन बिलों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने और भुगतान कराने के एवज में दोनों अधिकारियों ने फर्म के प्रतिनिधियों से कथित तौर पर रिश्वत की मांग की थी।
दोनों अधिकारियों पर 2-2 लाख मांगने का आरोप
CBI के मुताबिक, शिकायत में आरोप लगाया गया कि चीफ इंजीनियर और सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर ने लंबित बिलों के भुगतान के लिए अलग-अलग 2-2 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। शिकायत की जानकारी मिलने के बाद एजेंसी ने आरोपों की पुष्टि के लिए आवश्यक जांच की। इसके बाद अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए पकड़ने के लिए ट्रैप ऑपरेशन की योजना तैयार की गई।
75-75 हजार रुपये लेते समय हुई गिरफ्तारी
CBI की ट्रैप कार्रवाई के दौरान दोनों वरिष्ठ इंजीनियरों को 75-75 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, यह रकम कथित तौर पर मांगी गई 2-2 लाख रुपये की रिश्वत की पहली किस्त थी। कार्रवाई के बाद दोनों अधिकारियों को हिरासत में लेकर मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य संभावित साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी गई।
भोपाल, लखनऊ और कानपुर में तलाशी
गिरफ्तारी के बाद CBI की टीम ने आरोपियों से जुड़े कई ठिकानों पर भी तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी के अनुसार, भोपाल के अलावा लखनऊ और कानपुर स्थित आवासीय तथा कार्यालय परिसरों की तलाशी ली गई। इस दौरान दस्तावेजों और अन्य संभावित सबूतों को जांच के दायरे में लिया गया। CBI यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित रिश्वतखोरी से जुड़े मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत केस दर्ज
दोनों BSNL अधिकारियों के खिलाफ CBI ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। एजेंसी अब शिकायत में लगाए गए आरोपों, रिश्वत की मांग, भुगतान से जुड़े दस्तावेजों और ट्रैप कार्रवाई के दौरान मिले साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों पर लगे आरोपों की अंतिम स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
लंबित भुगतान और अन्य लोगों की भूमिका की जांच
CBI की जांच केवल दोनों गिरफ्तार अधिकारियों तक सीमित नहीं है। एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि लंबित बिलों के भुगतान की प्रक्रिया में किसी अन्य अधिकारी, कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं। साथ ही यह जांच की जा रही है कि फर्म से कथित रिश्वत की मांग किस स्तर पर और किन परिस्थितियों में की गई थी। बरामद दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
भिंड में भी लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई
इसी दिन मध्यप्रदेश के भिंड जिले में भी रिश्वतखोरी के खिलाफ कार्रवाई हुई। मेहगांव क्षेत्र में ग्वालियर लोकायुक्त की टीम ने पटवारी संजय बघेल को कथित तौर पर 5 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोप है कि पटवारी ने किसान से जमीन के नामांतरण की प्रक्रिया पूरी करने के बदले 30 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी।
नामांतरण के लिए 30 हजार की मांग का आरोप
शिकायत के अनुसार, रिश्वत की मांग के बाद बातचीत के दौरान कथित तौर पर 10 हजार रुपये में सौदा तय हुआ था। इसमें पहली किस्त के रूप में 5 हजार रुपये देने की बात सामने आई। जैसे ही पटवारी ने कथित तौर पर यह रकम स्वीकार की, लोकायुक्त की टीम ने कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ लिया। मामले में नियमानुसार आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
एक ही दिन दो कार्रवाई से भ्रष्टाचार पर संदेश
भोपाल में CBI की कार्रवाई और भिंड में लोकायुक्त की गिरफ्तारी ने मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ जांच एजेंसियों की सक्रियता को सामने रखा है। BSNL के दो वरिष्ठ इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई जहां सरकारी विभाग में लंबित भुगतान के बदले कथित रिश्वत मांगने से जुड़ी है, वहीं भिंड का मामला जमीन नामांतरण से संबंधित है। दोनों मामलों में जांच एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही हैं।
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