MP Farmers Protest: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मूंग की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद और अन्य मांगों को लेकर किसानों का आंदोलन जारी है। किसानों और राज्य सरकार के बीच कई दौर की बातचीत के बावजूद फिलहाल गतिरोध पूरी तरह समाप्त नहीं हो सका है। हालांकि, आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने किसानों को राहत देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। सरकार ने मूंग खरीद की सीमा बढ़ाने के साथ-साथ खरीद प्रक्रिया को आसान बनाने और किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए कई नए कदम उठाए हैं। इसके बावजूद किसान संगठन अभी सरकार के प्रस्तावों पर पूरी तरह सहमत नहीं हुए हैं।

मूंग खरीद सीमा 25 फीसदी से बढ़ाकर 60 फीसदी की गई
किसान कल्याण एवं कृषि विकास राज्य मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने जानकारी दी कि इस वर्ष केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश के लिए 4.45 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है। पहले केंद्र के नियमों के अनुसार किसानों की कुल उपज का केवल 25 प्रतिशत हिस्सा ही न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जा सकता था। लेकिन किसान संगठनों के साथ हुई चर्चा के बाद राज्य सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए इस सीमा को बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया है। इससे अब अधिक किसान अपनी उपज का बड़ा हिस्सा MSP पर बेच सकेंगे और उन्हें बेहतर आर्थिक लाभ मिलेगा।

इन जिलों के किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
सरकार के अनुसार नर्मदापुरम, सीहोर और हरदा जैसे प्रमुख मूंग उत्पादक जिलों में किसानों को इस फैसले का सबसे अधिक लाभ मिलेगा। इन क्षेत्रों में लगभग तीन क्विंटल प्रति एकड़ तक मूंग की खरीद MSP पर की जाएगी। सरकार का कहना है कि यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू होगा, जिससे अधिक से अधिक किसानों को इसका फायदा मिल सके और उनकी फसल का उचित मूल्य सुनिश्चित किया जा सके।
स्लॉट बुकिंग और खरीद की समय-सीमा में बड़ा विस्तार
किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने खरीद प्रक्रिया की समय-सीमा भी बढ़ा दी है। पहले स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 30 जुलाई निर्धारित थी, जिसे अब बढ़ाकर 10 अगस्त कर दिया गया है। इसी तरह मूंग खरीद की अंतिम तारीख भी 10 अगस्त से बढ़ाकर 20 अगस्त कर दी गई है। सरकार का मानना है कि अतिरिक्त समय मिलने से अधिक किसान आसानी से पंजीकरण कर अपनी उपज बेच सकेंगे।
ई-टोकन सिस्टम पर लगी रोक
मूंग खरीद और खाद वितरण में इस्तेमाल किए जा रहे ई-टोकन सिस्टम को लेकर किसानों ने कई व्यावहारिक समस्याएं और तकनीकी शिकायतें उठाई थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने फिलहाल खाद वितरण के लिए लागू MSP ई-टोकन सिस्टम को तत्काल प्रभाव से रोकने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि जब तक इस प्रणाली में आवश्यक सुधार नहीं किए जाते, तब तक इसे दोबारा लागू नहीं किया जाएगा।
समीक्षा के लिए बनेगी उच्च स्तरीय समिति
ई-टोकन प्रणाली और खरीद व्यवस्था में सुधार के लिए मुख्यमंत्री के कृषि उत्पादन आयोग के अध्यक्ष की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जाएगी। यह समिति पूरे सिस्टम की समीक्षा करेगी और किसानों के हित में आवश्यक सुधारों की सिफारिश करेगी। सरकार का उद्देश्य खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और किसान हितैषी बनाना है ताकि भविष्य में ऐसी समस्याएं दोबारा सामने न आएं।
मुख्यमंत्री ने बनाई मंत्री स्तरीय समिति
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने और उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल करने के लिए चार सदस्यीय मंत्री स्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति में मंत्री कृष्णा गौर, विश्वास सारंग, राकेश सिंह और ऐदल सिंह कंसाना को शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और बातचीत के माध्यम से हर समस्या का समाधान निकालना चाहती है।
आंदोलन का असर और आगे की स्थिति
मंगलवार रात से किसान अपनी मांगों को लेकर नर्मदापुरम राजमार्ग पर प्रदर्शन कर रहे थे, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई। सरकार द्वारा मूंग खरीद सीमा बढ़ाने, स्लॉट बुकिंग की तारीख बढ़ाने, ई-टोकन सिस्टम पर रोक लगाने और उच्च स्तरीय समितियों के गठन जैसे फैसलों के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि किसान संगठन इन प्रस्तावों पर सकारात्मक विचार करेंगे। हालांकि फिलहाल आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और किसान अपनी अन्य मांगों पर भी सरकार से ठोस आश्वासन चाहते हैं। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच होने वाली बातचीत से इस विवाद के समाधान की संभावना बढ़ सकती है।
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