NEET Paper Leak: नीट पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में जारी छात्र आंदोलन के बीच भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने छात्रों की चिंताओं को गंभीर बताते हुए उनका समर्थन किया है। गुरुवार को जारी अपने बयान में उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली को लेकर छात्रों की आशंकाएं और सवाल पूरी तरह उचित हैं। उनका मानना है कि युवाओं की बात सुनना और उनकी समस्याओं का समाधान करना सरकार तथा संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और संवाद को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

पुलिस कार्रवाई पर जताई नाराजगी
मुरली मनोहर जोशी ने नई दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान जिस प्रकार बल प्रयोग की खबरें सामने आईं, वह चिंताजनक हैं। उनके अनुसार, किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों की आवाज को सुनने के बजाय कठोर कार्रवाई करना उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं युवाओं के मन में व्यवस्था के प्रति विश्वास को कमजोर कर सकती हैं और इससे समाज में नकारात्मक संदेश जाता है।

छात्रों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्ण समाधान की अपील
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि परीक्षा प्रणाली से जुड़े विवादों का समाधान केवल प्रशासनिक कार्रवाई से नहीं, बल्कि सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण और स्थायी सुधारों के माध्यम से किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि सरकार छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुने और ऐसी व्यवस्था विकसित करे, जिससे भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उनके अनुसार, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
सोशल मीडिया पर साझा किया अपना संदेश
मुरली मनोहर जोशी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से आए छात्रों को कई दिनों से नई दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन करते देखना दुखद है। उन्होंने लिखा कि परीक्षा प्रणाली को लेकर छात्रों की चिंताएं और परेशानियां वास्तविक हैं तथा उनका समाधान संवेदनशीलता और स्थायी नीति सुधारों के माध्यम से किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं की उम्मीदों और विश्वास को बनाए रखना किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
महिला प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार पर चिंता
अपने बयान में मुरली मनोहर जोशी ने प्रदर्शन के दौरान महिला छात्रों के साथ हुए कथित व्यवहार पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुखद है कि छोटी छात्राओं के साथ भी कठोर व्यवहार किए जाने की खबरें सामने आई हैं। उनके अनुसार, इस प्रकार की घटनाएं समाज के लिए अच्छा संदेश नहीं देतीं। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं के साथ बल प्रयोग की घटनाएं बढ़ती हैं, तो इससे विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में समाज का भरोसा कमजोर पड़ सकता है।
बल प्रयोग की जगह संवाद पर दिया जोर
जोशी ने उम्मीद जताई कि सरकार इस पूरे मामले को केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा मानकर नहीं देखेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक समाज में बातचीत और समाधान की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनका मानना है कि यदि सरकार छात्रों से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं का समाधान खोजेगी, तो इससे शिक्षा व्यवस्था पर जनता का भरोसा और मजबूत होगा।
सीजेपी संस्थापक का सरकार पर हमला
दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी गुरुवार को केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर के आसपास की स्थिति अत्यधिक सुरक्षा व्यवस्था के कारण सामान्य विरोध प्रदर्शन जैसी नहीं रह गई है। उन्होंने सरकार से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और उनकी बात सुनने की अपील की। दीपके ने यह भी कहा कि आंदोलन का उद्देश्य छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तय कराना है।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई
अभिजीत दीपके ने अपने बयान में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। उनका कहना था कि सरकार को छात्रों की भावनाओं और उनकी मांगों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाना जरूरी है। फिलहाल नीट पेपर लीक विवाद को लेकर छात्र आंदोलन, राजनीतिक बयानबाजी और सरकार की प्रतिक्रिया लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है, जबकि सभी पक्ष आगे के घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
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