Myanmar Earthquake
Myanmar Earthquake: पड़ोसी देश म्यांमार में एक बार फिर धरती कांपने की खबर सामने आई है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, म्यांमार में आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.4 मापी गई है। वैज्ञानिकों ने बताया कि भूकंप का केंद्र जमीन से लगभग 100 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। राहत की बात यह रही कि इस झटके से फिलहाल किसी बड़े जान-माल के नुकसान की तत्काल सूचना नहीं मिली है, लेकिन बार-बार आ रहे इन झटकों ने स्थानीय निवासियों और भू-वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है।
दिसंबर का महीना म्यांमार के लिए भूकंपीय दृष्टि से काफी अशांत रहा है। एनसीएस की रिपोर्ट बताती है कि 18 दिसंबर के इस झटके से पहले भी कई बार यहां धरती हिल चुकी है। इससे पहले 13 दिसंबर को 3.9 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसकी गहराई 115 किमी थी। वहीं, 11 दिसंबर को 3.8 तीव्रता और 10 दिसंबर को 4.6 तीव्रता के झटके महसूस किए गए थे। महज एक सप्ताह के भीतर चार बार भूकंप आना इस बात का संकेत है कि म्यांमार के नीचे की टेक्टोनिक प्लेटों में भारी हलचल हो रही है, जो भविष्य में किसी बड़े खतरे की आहट हो सकती है।
म्यांमार की भौगोलिक स्थिति इसे दुनिया के सबसे संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्रों में से एक बनाती है। यह देश मुख्य रूप से चार बड़ी टेक्टोनिक प्लेटों—भारतीय, यूरेशियन, सुंडा और बर्मा प्लेट—के मिलन बिंदु पर स्थित है। ये प्लेटें निरंतर सक्रिय रहती हैं और एक-दूसरे से टकराती रहती हैं। इस भूवैज्ञानिक प्रक्रिया के कारण म्यांमार न केवल मध्यम और उच्च तीव्रता वाले भूकंपों के प्रति संवेदनशील है, बल्कि इसकी लंबी तटरेखा के कारण यहां सुनामी का खतरा भी हमेशा बना रहता है। प्लेटों के बीच के इस टकराव से जमीन के भीतर भारी ऊर्जा जमा होती है, जो भूकंप के रूप में बाहर निकलती है।
म्यांमार के भू-भाग से होकर लगभग 1,400 किलोमीटर लंबी एक विशाल ‘ट्रांसफॉर्म फॉल्ट’ गुजरती है। इसे ‘सागाइंग फॉल्ट’ के नाम से जाना जाता है, जो अंडमान स्प्रेडिंग सेंटर को उत्तरी टकराव क्षेत्र से जोड़ती है। यह फॉल्ट लाइन सागाइंग, मांडले, बागो और यांगून जैसे बड़े शहरों के लिए सीधा खतरा पैदा करती है। हालांकि यांगून शहर इस फॉल्ट लाइन से थोड़ी दूरी पर स्थित है, लेकिन वहां की घनी आबादी और कमजोर बुनियादी ढांचा इसे बेहद जोखिम भरा बना देता है। इतिहास गवाह है कि 1903 में बागो में आए 7.0 तीव्रता के भूकंप ने यांगून तक में भारी तबाही मचाई थी।
भूकंप की भयावहता को समझने के लिए इसी साल की एक घटना काफी है। 28 मार्च 2025 को म्यांमार में 7.7 तीव्रता का एक विनाशकारी भूकंप आया था। उस आपदा ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। उस दौरान म्यांमार के बुनियादी ढांचे, सड़कों और रिहायशी इमारतों को अपूरणीय क्षति हुई थी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, उस विनाशकारी भूकंप में 2,700 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और हजारों लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। वर्तमान में आ रहे छोटे झटके कहीं उसी बड़ी तबाही की पुनरावृत्ति न कर दें, इसी डर से लोग सहमे हुए हैं।
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