Nana Patekar Kargil War : बॉलीवुड और मराठी सिनेमा के चर्चित अभिनेता नाना पाटेकर अपनी दमदार अदाकारी के साथ देशभक्ति के लिए भी पहचाने जाते हैं। हालांकि, उनके जीवन से जुड़ी एक ऐसी कहानी है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान नाना पाटेकर ने भारतीय सेना के जवानों के साथ करीब 60 दिन बिताए थे। यह अनुभव उनके लिए बेहद खास और गौरवपूर्ण रहा।
कारगिल युद्ध के दौरान सेना के साथ जाने की इच्छा
जब वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध शुरू हुआ, तब नाना पाटेकर सैनिकों के साथ सीमा पर जाकर काम करना चाहते थे। उनका उद्देश्य केवल जवानों का मनोबल बढ़ाना नहीं था, बल्कि युद्ध क्षेत्र की परिस्थितियों में सेना के साथ अपनी भूमिका निभाना भी था। हालांकि, सुरक्षा कारणों के चलते शुरुआत में अधिकारियों ने उन्हें युद्ध क्षेत्र में जाने की अनुमति नहीं दी।
तत्कालीन रक्षा मंत्री से किया संपर्क
अनुमति नहीं मिलने के बाद नाना पाटेकर ने तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस से संपर्क किया। 2024 में ‘द लल्लनटॉप’ को दिए एक इंटरव्यू में अभिनेता ने इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े अनुभव साझा किए थे। उन्होंने बताया था कि वह कारगिल के दौरान भारतीय सैनिकों के बीच रहना चाहते थे और इसी इच्छा के चलते उन्होंने रक्षा मंत्रालय से संपर्क किया।
सैन्य प्रशिक्षण ने बनाई राह आसान
नाना पाटेकर के लिए सेना के माहौल से जुड़ना बिल्कुल नया अनुभव नहीं था। वह नेशनल लेवल के राइफल शूटर रह चुके थे। इसके अलावा अपनी फिल्म ‘प्रहार’ की तैयारी के दौरान उन्होंने मराठा लाइट इन्फेंट्री के साथ कठोर सैन्य प्रशिक्षण भी लिया था। उनके निशानेबाजी अनुभव और सैन्य प्रशिक्षण को देखते हुए उन्हें विशेष अनुमति मिलने का रास्ता साफ हुआ।
QRT के साथ करीब 60 दिन बिताए
विशेष अनुमति मिलने के बाद नाना पाटेकर भारतीय सेना की क्विक रिएक्शन टीम यानी QRT के साथ जुड़े। बताया जाता है कि उन्होंने लगभग दो महीने तक सेना की टुकड़ियों के साथ सीमावर्ती इलाकों में समय बिताया। इस दौरान वह द्रास, लेह, कुपवाड़ा, बारामूला और सोपोर जैसे क्षेत्रों में मौजूद सैन्य दलों के साथ रहे।
सेना की रणनीति पर नहीं की चर्चा
इंटरव्यू के दौरान नाना पाटेकर ने अपने सैन्य अनुभवों को याद करते हुए कई बातें साझा कीं, लेकिन सेना की रणनीति और ऑपरेशनल गतिविधियों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी बताने से उन्होंने परहेज किया। उन्होंने सुरक्षा प्रोटोकॉल और ऑपरेशनल सीक्रेट्स का सम्मान करते हुए स्पष्ट किया कि युद्ध क्षेत्र में सेना की गोपनीय रणनीतियों पर सार्वजनिक रूप से बात करना उचित नहीं है।
बताया, 60 दिन जीवन के सबसे गौरवपूर्ण रहे
नाना पाटेकर ने अपने अनुभव को याद करते हुए कहा था कि देश के लिए इतना योगदान देना हर नागरिक के लिए गर्व की बात है। सेना के साथ बिताए उन करीब 60 दिनों को उन्होंने अपने जीवन के सबसे गौरवपूर्ण और संतोषजनक अनुभवों में से एक बताया। उनके मुताबिक, जवानों के साथ रहकर उन्हें देश की सुरक्षा के लिए सैनिकों के समर्पण को करीब से समझने का मौका मिला।
युद्ध क्षेत्र में 20 किलो वजन घटा
नाना पाटेकर ने युद्ध क्षेत्र की कठिन परिस्थितियों का जिक्र करते हुए अपने शारीरिक बदलाव के बारे में भी बताया था। उनके अनुसार, जब वह श्रीनगर पहुंचे थे, तब उनका वजन लगभग 76 किलोग्राम था। करीब 60 दिन बाद जब वह वापस लौटे, तो उनका वजन घटकर लगभग 56 किलोग्राम रह गया था।
कठिन मौसम और मेहनत का पड़ा असर
युद्ध क्षेत्र में कठिन भौगोलिक परिस्थितियां, लगातार शारीरिक मेहनत और विपरीत मौसम का असर उनके स्वास्थ्य और वजन पर पड़ा। महज दो महीने के दौरान उनका वजन करीब 20 किलोग्राम कम हो गया। नाना पाटेकर की यह कहानी बताती है कि उनका सेना से जुड़ाव केवल पर्दे पर निभाए गए किरदारों तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने वास्तविक परिस्थितियों में भी जवानों के बीच समय बिताया था।
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