Nandigram TMC Crisis : नंदीग्राम को लेकर तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक बार फिर मतभेद सामने आते दिखाई दे रहे हैं। नंदीग्राम के पार्टी प्रभारी रह चुके बेलेघाटा से तृणमूल विधायक कुणाल घोष ने पार्टी की रणनीति और कुछ वरिष्ठ नेताओं की कार्यशैली पर खुलकर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि चुनावी नुकसान के लिए सिर्फ विपक्ष को जिम्मेदार ठहराने के बजाय पार्टी को आत्ममंथन करने की जरूरत है।
शुभेंदु अधिकारी से ज्यादा अपने नेताओं को बताया जिम्मेदार
कुणाल घोष ने नंदीग्राम में पार्टी की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर तृणमूल कांग्रेस वहां कमजोर स्थिति में है, तो इसके लिए केवल शुभेंदु अधिकारी को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। उनके मुताबिक, पार्टी के कुछ प्रमुख नेता भी इसके लिए जिम्मेदार हैं, जो कोलकाता में बैठकर यह मानते थे कि वे केवल निर्देश देकर सभी जिलों की राजनीति संचालित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय कार्यकर्ताओं की भूमिका और जमीनी हकीकत को समझना जरूरी है।
नंदीग्राम के कार्यकर्ताओं को लेकर कही बड़ी बात
तृणमूल विधायक ने कहा कि नंदीग्राम की परिस्थितियों को वहां के कार्यकर्ताओं ने ही पार्टी नेतृत्व के सामने गंभीर चुनौती के रूप में रखा है। उन्होंने जोर दिया कि चुनावी प्रदर्शन को लेकर संगठन के भीतर आत्मविश्लेषण होना चाहिए। कुणाल के मुताबिक, गलतियों को स्वीकार किए बिना भविष्य में पार्टी को मजबूत करना मुश्किल होगा। उन्होंने संगठनात्मक फैसलों और जमीनी स्तर पर उनके प्रभाव की समीक्षा की जरूरत बताई।
पार्टी की जिम्मेदारी से हटाए जाने पर भी उठाए सवाल
कुणाल घोष ने अपने पुराने संगठनात्मक अनुभव का जिक्र करते हुए कई नेताओं के नाम भी लिए। उन्होंने राजीव बनर्जी और तन्मय घोष का उल्लेख करते हुए कहा कि जब वह नंदीग्राम के प्रभारी थे, तब उन्होंने सभी के साथ मिलकर काम किया था। उनके अनुसार, उस दौरान काम सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहा था। उन्होंने सवाल उठाया कि उन्हें बिना सूचना दिए जिम्मेदारी से हटाकर दूसरे प्रमुख नेताओं को भेजने का फैसला क्यों किया गया।
एआईपीएसी की भूमिका पर कुणाल घोष ने साधा निशाना
कुणाल घोष ने अपने बयान में एआईपीएसी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अगर अचानक संगठनात्मक जिम्मेदारियों में बदलाव कर दिए जाएं और संबंधित व्यक्ति को इसकी जानकारी तक न दी जाए, तो इस तरह के फैसलों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने पार्टी के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए और कहा कि केवल कुछ लोगों के आकलन के आधार पर जमीनी राजनीति संचालित नहीं की जा सकती।
राजीव बनर्जी ने कुणाल के बयान पर दी सफाई
कुणाल घोष की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व राज्य मंत्री राजीव बनर्जी ने कहा कि उन्हें कभी भी नंदीग्राम में किसी विशेष जिम्मेदारी के लिए नहीं भेजा गया था। उन्होंने कहा कि कुणाल घोष उन्हें एक-दो बार बैठकों में लेकर गए थे। राजीव बनर्जी के मुताबिक, लोकसभा चुनाव के दौरान वह तामलुक से पार्टी उम्मीदवार की मदद करने के लिए गए थे। उन्होंने कहा कि पार्टी ने जब भी उन्हें कोई विशेष जिम्मेदारी दी, उन्होंने उसे पूरी ईमानदारी से निभाया।
तन्मय घोष ने भी कुणाल के दावे को नकारा
तृणमूल नेता तन्मय घोष ने भी कुणाल घोष के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जहां तक उन्हें याद है, स्थिति वैसी नहीं थी जैसी कुणाल ने बताई है। तन्मय घोष के मुताबिक, जब वह पूर्वी मेदिनीपुर के प्रभारी थे, तब पंचायत समेत विभिन्न चुनावों में पार्टी के परिणाम सामने थे। बाद में जिम्मेदारियों का विभाजन किया गया और कुणाल घोष को नंदीग्राम की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद उन्होंने नंदीग्राम में पार्टी का काम नहीं देखा।
नंदीग्राम को लेकर बढ़ सकती है तृणमूल की अंदरूनी बहस
कुणाल घोष के बयान के बाद नंदीग्राम में तृणमूल कांग्रेस की चुनावी रणनीति और संगठनात्मक फैसलों को लेकर बहस तेज होने के संकेत हैं। एक ओर कुणाल घोष आत्ममंथन और जमीनी कार्यकर्ताओं को महत्व देने की बात कर रहे हैं, वहीं राजीव बनर्जी और तन्मय घोष ने उनके दावों पर अलग पक्ष रखा है। ऐसे में आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर और बयान सामने आने की संभावना है।
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