National Consumer Day 2025
National Consumer Day 2025: भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी 24 दिसंबर को ‘राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। नई दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में आयोजित होने वाले इस राष्ट्रीय उत्सव का मुख्य केंद्र ‘डिजिटल न्याय’ के माध्यम से उपभोक्ताओं की समस्याओं का त्वरित और कुशल समाधान है। इस गरिमामय कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य का एक सशक्त प्रतिनिधिमंडल हिस्सा लेने जा रहा है, जो राज्य में उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण और न्यायिक सुधारों की दिशा में किए जा रहे कार्यों को राष्ट्रीय मंच पर साझा करेगा।
राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस उत्सव 2025 की आधिकारिक थीम “डिजिटल न्याय के माध्यम से कुशलता पूर्वक त्वरित निपटान” रखी गई है। इस थीम का उद्देश्य न्याय प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप को कम कर तकनीक का उपयोग बढ़ाना है, ताकि उपभोक्ताओं को वर्षों तक अदालतों के चक्कर न लगाने पड़ें। कार्यक्रम के दौरान देश भर से आए विशेषज्ञ इस बात पर मंथन करेंगे कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक ऑनलाइन पोर्टल न्यायिक प्रणाली को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बना सकते हैं।
छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग द्वारा इस आयोजन के लिए विशेष रूप से प्रतिनिधियों को नामित किया गया है। राज्य का नेतृत्व करने वाले इस दल में राज्य उपभोक्ता आयोग रायपुर के रजिस्ट्रार श्रीनिवास तिवारी और सदस्य प्रमोद वर्मा शामिल हैं। इसके साथ ही विभिन्न जिलों के आयोग अध्यक्षों में आनंद कुमार सिंघल (बिलासपुर), छमेश्वर लाल पटेल (रायगढ़), रंजना दत्ता (कोरबा), और डाकेश्वर प्रसाद शर्मा (रायपुर) हिस्सा लेंगे। सदस्य के रूप में अरविंद परिहार (धमतरी), संध्या वाजपेयी (दुर्ग), विशाल तिवारी (जांजगीर-चांपा) और नवनी कान्त दत्ता (अंबिकापुर) भी इस राष्ट्रीय संवाद का हिस्सा बनेंगे।
जिला उपभोक्ता आयोग सरगुजा के सदस्य नवनी कान्त दत्ता ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चौरड़िया के मार्गदर्शन में प्रदेश में ‘पेपरलेस’ न्यायिक प्रणाली की दिशा में ठोस कार्य हो रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकार के साझा सहयोग से सभी उपभोक्ता आयोगों को डिजिटल बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए ई-जागृति पोर्टल का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है, जिससे दस्तावेजों के बोझ को कम कर पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन मोड पर लाया जा सके।
छत्तीसगढ़ जैसे भौगोलिक विविधता वाले राज्य के लिए डिजिटल न्याय एक वरदान साबित हो रहा है। सरगुजा सहित राज्य के सभी उपभोक्ता आयोगों में अब ई-हियरिंग (ऑनलाइन सुनवाई) और ऑनलाइन केस पंजीकरण की सुविधा शुरू कर दी गई है। इससे बस्तर या सरगुजा के सुदूर वनांचलों में रहने वाले पक्षकार भी घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं और सुनवाई में शामिल हो सकते हैं। राज्य आयोग द्वारा इन सुविधाओं की नियमित निगरानी की जाती है, ताकि उपभोक्ताओं को ‘सुलभ, किफायती और प्रभावी’ न्याय मिल सके।
दिल्ली में आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं और उपलब्ध न्याय व्यवस्था के मध्य की खाई को पाटना है। जब न्यायिक प्रक्रिया पारदर्शी और डिजिटल होगी, तो उपभोक्ताओं का व्यवस्था पर विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा। केंद्र सरकार की इस पहल से न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, बल्कि बड़े कॉर्पोरेट संस्थानों के खिलाफ छोटे उपभोक्ताओं की लड़ाई भी आसान और कम खर्चीली हो जाएगी। यह आयोजन विकसित भारत के संकल्प में उपभोक्ता न्याय को एक आधार स्तंभ बनाने की ओर एक बड़ा कदम है।
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