National Film Awards 2025 : ‘कटहल’ बनी बेस्ट हिंदी फिल्म, शाहरुख को ‘जवान’ के लिए पहला नेशनल अवॉर्ड

 National Film Awards 2025 : दिल्ली में शुक्रवार को घोषित हुए 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सुपरस्टार शाहरुख खान को फिल्म ‘जवान’ और विक्रांत मैसी को ’12th फेल’ के लिए संयुक्त रूप से बेस्ट एक्टर का सम्मान मिला। शाहरुख के करियर का यह पहला नेशनल अवॉर्ड है, जिससे उनके प्रशंसक खासे उत्साहित हैं। रानी मुखर्जी बनीं बेस्ट एक्ट्रेस फिल्म ‘मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे’ में दमदार अभिनय के लिए रानी मुखर्जी को बेस्ट एक्ट्रेस का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। यह उनके करियर का भी पहला नेशनल अवॉर्ड है। ‘कटहल’ बनी बेस्ट हिंदी फिल्म, ‘सिर्फ एक बंदा काफी है’ को बेस्ट डायलॉग सान्या मल्होत्रा स्टारर सामाजिक व्यंग्य फिल्म ‘कटहल’ को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म का अवॉर्ड मिला। वहीं, ‘सिर्फ एक बंदा काफी है’ को इसके प्रभावशाली संवादों के लिए बेस्ट डायलॉग राइटर का पुरस्कार मिला, जिसे दीपक किंगरानी ने लिखा था। ‘द केरल स्टोरी’ को मिला बेस्ट सिनेमेटोग्राफी अवॉर्ड विवादों में रही फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ को बेस्ट सिनेमेटोग्राफी का पुरस्कार दिया गया। इसके अलावा ‘जवान’ के लिए शिल्पा राव को बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का खिताब मिला। बाल कलाकारों ने भी लूटी महफिल सुकृति वेनी (गांधी कथा चेतु) कबीर खंडारे (जिप्सी) त्रिशा तोसार, श्रीनिवास पोकले, भार्गव जगपात (नाल 2) इन्हें बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट कैटेगरी में सम्मानित किया गया। अन्य प्रमुख पुरस्कार: बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर: पीवीएनएस रोहित (तेलुगू फिल्म ‘बेबी’) बेस्ट स्क्रीनप्ले: ‘बेबी’ (तेलुगू) और ‘पार्किंग’ (तमिल) क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों का जलवा गुजराती: वश बंगाली: डीप फ्रीज असमी: रोंगातपु कन्नड़: कंडीलू मराठी: श्यामचि आई तमिल: पार्किंग तेलुगू: भगवंत केसरी पंजाबी: गोड्डे गोड्डे चा ओडिया: पुष्कर मलयालम: उल्लुझुकु गारो: रिमदोगितांगा ताई फाके: पाई तांग – स्टेप ऑफ होप नॉन फीचर कैटेगरी में भी उम्दा काम को सराहा गया बेस्ट नॉन फीचर फिल्म: द फ्लॉवरिंग मैन (हिंदी) बेस्ट डायरेक्टर: पीयूष ठाकुर (द फर्स्ट फिल्म – हिंदी) बेस्ट डॉक्युमेंट्री: गॉड वल्चर एंड ह्यूमन (अंग्रेज़ी) बेस्ट शॉर्ट फिल्म: गिद्ध – द स्कैवेंजर (हिंदी) बेस्ट सोशल कंसर्न फिल्म: द साइलेंट एपिडेमिक (हिंदी) बेस्ट म्यूजिक: द फर्स्ट फिल्म (हिंदी) बेस्ट एडिटिंग: मूविंग फोकस (अंग्रेज़ी) बेस्ट साउंड डिजाइन: धुंधगिरी के फूल (हिंदी) बेस्ट सिनेमैटोग्राफी: लिटिल विंग्स (तमिल) बेस्ट आर्ट्स/कल्चर फिल्म: टाइमलेस तमिलनाडु (अंग्रेज़ी) स्पेशल मेंशन (नॉन फीचर): नेकल (मलयालम) स्पेशल मेंशन और विवादों के बीच ‘एनिमल’ को मिला तकनीकी सम्मान फिल्म ‘एनिमल’ को री-रिकॉर्डिंग मिक्सर एमआर राजाकृष्णन के लिए स्पेशल मेंशन फीचर फिल्म अवॉर्ड मिला। 1969 में हुई दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड की शुरुआत भारत सरकार ने 1969 में नेशनल अवॉर्ड्स में हिंदी सिनेमा के जनक दादासाहेब फाल्के के सम्मान में एक विशेष श्रेणी शुरू की। इसका पहला सम्मान देविका रानी को मिला। अब तक 54 हस्तियों को यह सम्मान दिया जा चुका है। 2024 में यह पुरस्कार मिथुन चक्रवर्ती को मिलेगा। यह भारतीय फिल्म उद्योग का सबसे बड़ा और प्रतिष्ठित सम्मान माना जाता है। नेशनल अवॉर्ड्स की नींव 1954 में रखी गई 1954 में भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर फिल्मों के क्षेत्र में उत्कृष्टता को मान्यता देने के लिए नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स की शुरुआत की। इसका उद्देश्य भारतीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देना था। पहली बार यह समारोह 10 अक्टूबर 1954 को हुआ और पहली बेस्ट फीचर फिल्म बनी मराठी फिल्म ‘श्यामची आई’। 65वीं नेशनल अवॉर्ड सेरेमनी विवादों में घिरी 65वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड समारोह में 68 विजेताओं ने हिस्सा लेने से इनकार कर दिया था। विवाद की वजह यह रही कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों पुरस्कार मिलने की घोषणा के बावजूद सिर्फ 11 लोगों को ही राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया। बाकी विजेताओं को तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी से पुरस्कार लेना पड़ा, जिससे नाराज होकर प्रतिभागियों ने कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया। किरण खेर के अवॉर्ड पर उठा सवाल किरण खेर को बंगाली फिल्म ‘बरीवाली’ के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड मिला, लेकिन बाद में रीता कोइराला नाम की डबिंग आर्टिस्ट ने दावा किया कि फिल्म में डायलॉग्स उनकी आवाज़ में हैं, जबकि नॉमिनेशन फॉर्म में किरण ने स्वयं की डबिंग बताई थी। इस विवाद ने नेशनल अवॉर्ड्स की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए। फिल्म ‘ब्लैक’ के अवॉर्ड जीतने पर भी विवाद 53वें नेशनल अवॉर्ड्स में संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘ब्लैक’ को बेस्ट फीचर फिल्म (हिंदी) सहित तीन पुरस्कार मिले। लेकिन यह फिल्म हॉलीवुड फिल्म ‘द मिरेकल वर्कर’ का अनौपचारिक रूप से अडैप्टेशन थी। ऐसे में ज्यूरी सदस्य देब बनर्जी ने आरोप लगाया कि यह नियमों के खिलाफ है। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में पिटीशन भी दाखिल की, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। स्मिता पाटिल बनीं सबसे कम उम्र की बेस्ट एक्ट्रेस महज 25 वर्ष की उम्र में स्मिता पाटिल को 1977 की फिल्म ‘भूमिका’ के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड मिला। यह रिकॉर्ड आज भी उनके नाम दर्ज है। शबाना आजमी के नाम सबसे ज्यादा अवॉर्ड्स शबाना आजमी अब तक 5 बार बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड जीत चुकी हैं। उन्हें यह सम्मान ‘अंकुर’, ‘अर्थ’, ‘कांधार’, ‘पार’ और ‘गॉडमदर’ जैसी फिल्मों के लिए मिला है। यह किसी भी अभिनेत्री द्वारा सबसे अधिक बार यह पुरस्कार पाने का रिकॉर्ड है। क्या मिलता है नेशनल अवॉर्ड विजेताओं को? विजेताओं को स्वर्ण कमल या रजत कमल की प्रतिकृति दी जाती है। साथ ही कुछ श्रेणियों में नकद पुरस्कार भी शामिल होता है। बेस्ट फिल्म जैसी कैटेगरीज में टीम के प्रमुख लोगों को यह सम्मान मिलता है। आयोजन कौन करता है? यह पूरा कार्यक्रम केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की देखरेख में होता है, जिसका संचालन डायरेक्टरेट ऑफ फिल्म फेस्टिवल (DFF) करता है। पुरस्कार वितरण भारत के राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है, जिससे इसकी गरिमा और भी बढ़ जाती है। नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स केवल पुरस्कार नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की विविधता, कला और संस्कृति के लिए एक सम्मान और प्रेरणा का स्रोत हैं। समय के साथ जहां इस मंच ने कई सितारों को राष्ट्रीय पहचान दी, वहीं विवादों ने इसकी निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। बावजूद इसके, इसका महत्व भारतीय फिल्म उद्योग के लिए अमूल्य बना हुआ है। इस साल के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों का बेहतरीन संतुलन देखने को मिला। पहली बार अवॉर्ड जीतने वाले सितारों से लेकर तकनीकी क्षेत्रों में काम करने वाले क्रू तक को पहचान देकर यह मंच भारतीय सिनेमा की विविधता को और मजबूती से दर्शाता है। Read more  : Rahul Gandhi

 National Film Awards 2025 : दिल्ली में शुक्रवार को घोषित हुए 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सुपरस्टार शाहरुख खान को फिल्म ‘जवान’ और विक्रांत मैसी को ’12th फेल’ के लिए संयुक्त रूप से बेस्ट एक्टर का सम्मान मिला। शाहरुख के करियर का यह पहला नेशनल अवॉर्ड है, जिससे उनके प्रशंसक खासे उत्साहित हैं।

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रानी मुखर्जी बनीं बेस्ट एक्ट्रेस

फिल्म ‘मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे’ में दमदार अभिनय के लिए रानी मुखर्जी को बेस्ट एक्ट्रेस का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। यह उनके करियर का भी पहला नेशनल अवॉर्ड है।

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‘कटहल’ बनी बेस्ट हिंदी फिल्म, ‘सिर्फ एक बंदा काफी है’ को बेस्ट डायलॉग

सान्या मल्होत्रा स्टारर सामाजिक व्यंग्य फिल्म ‘कटहल’ को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म का अवॉर्ड मिला। वहीं, ‘सिर्फ एक बंदा काफी है’ को इसके प्रभावशाली संवादों के लिए बेस्ट डायलॉग राइटर का पुरस्कार मिला, जिसे दीपक किंगरानी ने लिखा था।

‘द केरल स्टोरी’ को मिला बेस्ट सिनेमेटोग्राफी अवॉर्ड

विवादों में रही फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ को बेस्ट सिनेमेटोग्राफी का पुरस्कार दिया गया। इसके अलावा ‘जवान’ के लिए शिल्पा राव को बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का खिताब मिला।

बाल कलाकारों ने भी लूटी महफिल

सुकृति वेनी (गांधी कथा चेतु)

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कबीर खंडारे (जिप्सी)

त्रिशा तोसार, श्रीनिवास पोकले, भार्गव जगपात (नाल 2)
इन्हें बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट कैटेगरी में सम्मानित किया गया।

अन्य प्रमुख पुरस्कार:

बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर: पीवीएनएस रोहित (तेलुगू फिल्म ‘बेबी’)

बेस्ट स्क्रीनप्ले: ‘बेबी’ (तेलुगू) और ‘पार्किंग’ (तमिल)

क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों का जलवा

गुजराती: वश

बंगाली: डीप फ्रीज

असमी: रोंगातपु

कन्नड़: कंडीलू

मराठी: श्यामचि आई

तमिल: पार्किंग

तेलुगू: भगवंत केसरी

पंजाबी: गोड्डे गोड्डे चा

ओडिया: पुष्कर

मलयालम: उल्लुझुकु

गारो: रिमदोगितांगा

ताई फाके: पाई तांग – स्टेप ऑफ होप

नॉन फीचर कैटेगरी में भी उम्दा काम को सराहा गया

बेस्ट नॉन फीचर फिल्म: द फ्लॉवरिंग मैन (हिंदी)

बेस्ट डायरेक्टर: पीयूष ठाकुर (द फर्स्ट फिल्म – हिंदी)

बेस्ट डॉक्युमेंट्री: गॉड वल्चर एंड ह्यूमन (अंग्रेज़ी)

बेस्ट शॉर्ट फिल्म: गिद्ध – द स्कैवेंजर (हिंदी)

बेस्ट सोशल कंसर्न फिल्म: द साइलेंट एपिडेमिक (हिंदी)

बेस्ट म्यूजिक: द फर्स्ट फिल्म (हिंदी)

बेस्ट एडिटिंग: मूविंग फोकस (अंग्रेज़ी)

बेस्ट साउंड डिजाइन: धुंधगिरी के फूल (हिंदी)

बेस्ट सिनेमैटोग्राफी: लिटिल विंग्स (तमिल)

बेस्ट आर्ट्स/कल्चर फिल्म: टाइमलेस तमिलनाडु (अंग्रेज़ी)

स्पेशल मेंशन (नॉन फीचर): नेकल (मलयालम)

स्पेशल मेंशन और विवादों के बीच ‘एनिमल’ को मिला तकनीकी सम्मान

फिल्म ‘एनिमल’ को री-रिकॉर्डिंग मिक्सर एमआर राजाकृष्णन के लिए स्पेशल मेंशन फीचर फिल्म अवॉर्ड मिला।

1969 में हुई दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड की शुरुआत

भारत सरकार ने 1969 में नेशनल अवॉर्ड्स में हिंदी सिनेमा के जनक दादासाहेब फाल्के के सम्मान में एक विशेष श्रेणी शुरू की। इसका पहला सम्मान देविका रानी को मिला। अब तक 54 हस्तियों को यह सम्मान दिया जा चुका है। 2024 में यह पुरस्कार मिथुन चक्रवर्ती को मिलेगा। यह भारतीय फिल्म उद्योग का सबसे बड़ा और प्रतिष्ठित सम्मान माना जाता है।

नेशनल अवॉर्ड्स की नींव 1954 में रखी गई

1954 में भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर फिल्मों के क्षेत्र में उत्कृष्टता को मान्यता देने के लिए नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स की शुरुआत की। इसका उद्देश्य भारतीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देना था। पहली बार यह समारोह 10 अक्टूबर 1954 को हुआ और पहली बेस्ट फीचर फिल्म बनी मराठी फिल्म ‘श्यामची आई’।

65वीं नेशनल अवॉर्ड सेरेमनी विवादों में घिरी

65वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड समारोह में 68 विजेताओं ने हिस्सा लेने से इनकार कर दिया था। विवाद की वजह यह रही कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों पुरस्कार मिलने की घोषणा के बावजूद सिर्फ 11 लोगों को ही राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया। बाकी विजेताओं को तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी से पुरस्कार लेना पड़ा, जिससे नाराज होकर प्रतिभागियों ने कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया।

किरण खेर के अवॉर्ड पर उठा सवाल

किरण खेर को बंगाली फिल्म ‘बरीवाली’ के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड मिला, लेकिन बाद में रीता कोइराला नाम की डबिंग आर्टिस्ट ने दावा किया कि फिल्म में डायलॉग्स उनकी आवाज़ में हैं, जबकि नॉमिनेशन फॉर्म में किरण ने स्वयं की डबिंग बताई थी। इस विवाद ने नेशनल अवॉर्ड्स की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए।

फिल्म ‘ब्लैक’ के अवॉर्ड जीतने पर भी विवाद

53वें नेशनल अवॉर्ड्स में संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘ब्लैक’ को बेस्ट फीचर फिल्म (हिंदी) सहित तीन पुरस्कार मिले। लेकिन यह फिल्म हॉलीवुड फिल्म ‘द मिरेकल वर्कर’ का अनौपचारिक रूप से अडैप्टेशन थी। ऐसे में ज्यूरी सदस्य देब बनर्जी ने आरोप लगाया कि यह नियमों के खिलाफ है। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में पिटीशन भी दाखिल की, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

स्मिता पाटिल बनीं सबसे कम उम्र की बेस्ट एक्ट्रेस

महज 25 वर्ष की उम्र में स्मिता पाटिल को 1977 की फिल्म ‘भूमिका’ के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड मिला। यह रिकॉर्ड आज भी उनके नाम दर्ज है।

शबाना आजमी के नाम सबसे ज्यादा अवॉर्ड्स

शबाना आजमी अब तक 5 बार बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड जीत चुकी हैं। उन्हें यह सम्मान ‘अंकुर’, ‘अर्थ’, ‘कांधार’, ‘पार’ और ‘गॉडमदर’ जैसी फिल्मों के लिए मिला है। यह किसी भी अभिनेत्री द्वारा सबसे अधिक बार यह पुरस्कार पाने का रिकॉर्ड है।

क्या मिलता है नेशनल अवॉर्ड विजेताओं को?

विजेताओं को स्वर्ण कमल या रजत कमल की प्रतिकृति दी जाती है। साथ ही कुछ श्रेणियों में नकद पुरस्कार भी शामिल होता है। बेस्ट फिल्म जैसी कैटेगरीज में टीम के प्रमुख लोगों को यह सम्मान मिलता है।

आयोजन कौन करता है?

यह पूरा कार्यक्रम केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की देखरेख में होता है, जिसका संचालन डायरेक्टरेट ऑफ फिल्म फेस्टिवल (DFF) करता है। पुरस्कार वितरण भारत के राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है, जिससे इसकी गरिमा और भी बढ़ जाती है।

नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स केवल पुरस्कार नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की विविधता, कला और संस्कृति के लिए एक सम्मान और प्रेरणा का स्रोत हैं। समय के साथ जहां इस मंच ने कई सितारों को राष्ट्रीय पहचान दी, वहीं विवादों ने इसकी निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। बावजूद इसके, इसका महत्व भारतीय फिल्म उद्योग के लिए अमूल्य बना हुआ है।

इस साल के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों का बेहतरीन संतुलन देखने को मिला। पहली बार अवॉर्ड जीतने वाले सितारों से लेकर तकनीकी क्षेत्रों में काम करने वाले क्रू तक को पहचान देकर यह मंच भारतीय सिनेमा की विविधता को और मजबूती से दर्शाता है।

Read more  : Rahul Gandhi on SIR : संसद में SIR प्रक्रिया पर हंगामा, राहुल गांधी ने चुनाव आयोग को देशद्रोही करार दिया

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