National Herald Case: नेशनल हेराल्ड से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अदालत ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य प्रतिवादियों को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की पुनरीक्षण याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। यह मामला उस ट्रायल कोर्ट के आदेश से जुड़ा है, जिसमें ईडी की अभियोजन शिकायत (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया गया था। अब हाई कोर्ट इस आदेश की वैधता की समीक्षा करेगा।

तीन सप्ताह में दाखिल करना होगा जवाब
दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति मनोज जैन की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान सभी प्रतिवादियों को अपना लिखित जवाब रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी पक्ष निर्धारित समय के भीतर अपनी प्रतिक्रिया दाखिल करें, ताकि मामले की सुनवाई आगे बढ़ाई जा सके। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 10 सितंबर तय की है।

ईडी ने किन लोगों को बनाया है प्रस्तावित आरोपी
इस मामले में केवल सोनिया गांधी और राहुल गांधी ही नहीं, बल्कि कांग्रेस ओवरसीज प्रमुख सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, सुनील भंडारी, यंग इंडियन और डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड को भी आरोपी बनाए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। ईडी का आरोप है कि कथित वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों के हस्तांतरण से जुड़े मामलों में इन सभी की भूमिका की जांच आवश्यक है। इसी आधार पर एजेंसी ने अदालत में अपनी अभियोजन शिकायत दाखिल की थी।
ट्रायल कोर्ट के फैसले को ईडी ने दी चुनौती
प्रवर्तन निदेशालय ने राउज एवेन्यू कोर्ट के 16 दिसंबर 2025 के आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। ट्रायल कोर्ट ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत दायर अभियोजन शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार करते हुए कहा था कि प्रस्तुत कानूनी आधार पर्याप्त और स्वीकार्य नहीं हैं। ईडी का कहना है कि ट्रायल कोर्ट ने कानून की गलत व्याख्या की और इसी कारण हाई कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की गई।
ईडी ने अदालत में क्या दलील दी
ईडी का तर्क है कि ट्रायल कोर्ट ने यह मानकर गलती की कि पीएमएलए के तहत अभियोजन शिकायत किसी निजी शिकायत से उत्पन्न अनुसूचित अपराध के आधार पर आगे नहीं बढ़ सकती। एजेंसी का कहना है कि यदि किसी सक्षम अदालत ने निजी शिकायत पर संज्ञान लिया है, तो उसका महत्व किसी पुलिस एफआईआर से कम नहीं होता। कानून के अनुसार आपराधिक कार्यवाही दो तरीकों से शुरू हो सकती है—पुलिस जांच के आधार पर या फिर मजिस्ट्रेट के समक्ष दायर निजी शिकायत के माध्यम से।
तुषार मेहता ने रखी ईडी की ओर से दलील
सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि यदि ट्रायल कोर्ट की व्याख्या को सही माना जाता है, तो मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के लिए बनाया गया पीएमएलए कानून प्रभावहीन हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कानून में कहीं भी यह अनिवार्य नहीं किया गया है कि मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में केवल पुलिस एफआईआर के आधार पर ही कार्रवाई की जा सकती है।उन्होंने यह भी दलील दी कि पीएमएलए के तहत कार्रवाई के लिए आवश्यक शर्त केवल इतनी है कि किसी अनुसूचित अपराध से जुड़ी आपराधिक गतिविधि का आरोप मौजूद हो। इसलिए ट्रायल कोर्ट द्वारा शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार करना कानूनी दृष्टि से उचित नहीं था।
हाई कोर्ट पहले ही जारी कर चुका है नोटिस
इससे पहले भी दिल्ली हाई कोर्ट ने ईडी की दलीलों पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए कहा था कि मामले में विचार किए जाने योग्य महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न मौजूद हैं। इसी आधार पर अदालत ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा था। अब अदालत उनके जवाब मिलने के बाद पूरे मामले पर विस्तार से सुनवाई करेगी।
10 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
अब सभी की निगाहें 10 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। उस दिन अदालत प्रतिवादियों के जवाब और ईडी की दलीलों पर विस्तार से विचार करेगी। इस सुनवाई से यह तय होगा कि ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा जाएगा या फिर ईडी की अभियोजन शिकायत पर आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुलेगा। नेशनल हेराल्ड से जुड़ा यह मामला देश की सबसे चर्चित कानूनी और राजनीतिक मामलों में शामिल है, इसलिए इसके प्रत्येक घटनाक्रम पर राजनीतिक और कानूनी दोनों हलकों की नजर बनी हुई है।
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