Russia-Iran Row : मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में दोनों देशों के बीच हुए संघर्षविराम (सीजफायर) के टूटने के बाद सैन्य टकराव तेज हो गया था। अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए, जबकि जवाबी कार्रवाई में ईरान ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन घटनाओं के दौरान जॉर्डन में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत की भी खबर सामने आई। हालांकि पिछले दो दिनों से दोनों पक्षों की ओर से बड़े सैन्य हमले नहीं हुए हैं, लेकिन तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और हालात अब भी संवेदनशील बने हुए हैं।

जेलेंस्की का दावा- रूस कर रहा है ईरान की मदद
इसी बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि रूस, ईरान को अमेरिकी सैन्य ठिकानों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करा रहा है। उनके अनुसार, यूक्रेन की खुफिया एजेंसियों ने जुलाई की शुरुआत से खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर रूस की सक्रिय सैटेलाइट निगरानी देखी है। जेलेंस्की का कहना है कि इन सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल बाद में ईरान द्वारा हमलों की योजना बनाने और हमलों के बाद हुए नुकसान का आकलन करने में किया गया।

उन्होंने बताया कि केवल 19 और 20 जुलाई के दौरान बहरीन, जॉर्डन और कुवैत स्थित चार अमेरिकी एयरबेस रूसी सैटेलाइट की निगरानी में थे। उनके अनुसार, इन तस्वीरों और ईरान के हमलों के बीच स्पष्ट संबंध दिखाई देता है। जेलेंस्की ने कहा कि वह यूक्रेन की खुफिया एजेंसियों को निर्देश देंगे कि इस संबंध में जुटाए गए सभी सबूत सहयोगी देशों के साथ साझा किए जाएं।
सहयोगी देशों को जानकारी देने की तैयारी
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि रूस की ओर से ईरान को मिल रही कथित सहायता केवल सैन्य सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रणनीतिक और तकनीकी सहयोग का भी हिस्सा हो सकती है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि यदि यह दावा सही साबित होता है तो इससे क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता पर बड़ा असर पड़ सकता है। उन्होंने सहयोगी देशों से इस मुद्दे पर साझा रणनीति बनाने की भी अपील की।
ट्रंप ने कहा- जांच करेंगे, सच सामने आएगा
यूक्रेन के इन आरोपों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संतुलित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस दावे की पूरी जांच करेगा और यदि जरूरत पड़ी तो रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी इस विषय पर बात की जाएगी।ट्रंप ने कहा, “हम पता लगाएंगे कि यह सच है या नहीं। मैं पुतिन से इस बारे में पूछूंगा और पूरी जानकारी हासिल की जाएगी।”हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि रूस ने किसी स्तर पर ईरान की मदद की भी है, तो उसका युद्ध की स्थिति पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा। ट्रंप का दावा था कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने ईरान की सैन्य क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।
ईरान की सैन्य क्षमता पर ट्रंप का बयान
ट्रंप ने कहा कि ईरान की सेना, वायुसेना और नौसेना पहले जैसी स्थिति में नहीं हैं। उनके अनुसार, अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान की सैन्य ताकत काफी कमजोर हो चुकी है। उन्होंने कहा कि रूस पहले भी वेनेजुएला को बड़ी मात्रा में हथियार दे चुका है, लेकिन उसका कोई खास परिणाम नहीं निकला। इसी तरह यदि ईरान को भी किसी प्रकार की मदद मिली है, तो उससे युद्ध की दिशा में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें नहीं लगता कि रूस बड़े स्तर पर ईरान को सैन्य सहायता दे रहा है।
ईरान के साथ समझौते की संभावना भी जताई
डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी संकेत दिए कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की संभावना बनी हुई है। उन्होंने कहा कि ईरान की ओर से कई माध्यमों से बातचीत की इच्छा जताई गई है और दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच संपर्क स्थापित हुआ है।ट्रंप ने कहा कि यदि हालात अनुकूल रहे तो दोनों देशों के बीच कोई समझौता भी हो सकता है। उनके अनुसार, ईरान बातचीत इसलिए करना चाहता है क्योंकि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद उस पर काफी दबाव बना है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका कमजोर स्थिति में होता तो ईरान कभी बातचीत की पहल नहीं करता।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर बनी हुई है वैश्विक नजर
मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। अमेरिका, ईरान, रूस और यूक्रेन से जुड़े इन नए दावों और बयानों ने भू-राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। यदि रूस की कथित भूमिका के आरोपों की पुष्टि होती है तो इससे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सुरक्षा समीकरणों पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल सभी देशों की निगाहें संभावित जांच, कूटनीतिक बातचीत और भविष्य की सैन्य गतिविधियों पर टिकी हुई हैं।











