Naxal surrender news:
Naxal surrender news: नक्सल आंदोलन को पिछले कुछ महीनों में लगातार बड़े झटके मिल रहे हैं, और इसी कड़ी में एक और बड़ी कामयाबी सुरक्षा बलों को हाथ लगी है। सीपीआई (माओवादी) के स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य अनंत उर्फ विकास नागपुरे ने अपने 11 साथियों के साथ गोंदिया पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है।
यह सामूहिक आत्मसमर्पण महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ बॉर्डर इलाके में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे सघन नक्सल विरोधी अभियानों के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। सरेंडर करने वाले इन सभी नक्सलियों पर महाराष्ट्र सरकार ने कुल 89 लाख रुपये का भारी इनाम घोषित कर रखा था। पुलिस के अनुसार, यह समूह कई जिलों में सक्रिय था और बड़े हिंसक वारदातों, नए लोगों की भर्ती और जबरन उगाही के व्यापक नेटवर्क में शामिल रहा था।
आत्मसमर्पण के दौरान, नक्सलियों के पास से बड़ी मात्रा में हथियार और नक्सली सामग्री भी बरामद हुई है। यह दर्शाता है कि यह एक संगठित समूह था। सरेंडर करने वाले प्रमुख नक्सलियों के नाम निम्नलिखित हैं:
अनंत उर्फ विकास नागपुरे: स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य
नागासु गोलू वड्डे: DVCM कमांडर
रानो पोरेती
संतु पोरेती
संगीता पंधारे
प्रताप बंटुला
अनुजा कारा
पूजा मुडियम
दिनेश सोत्ती
शीला मड़ावी
अर्जुन डोडी
पुलिस का कहना है कि यह सामूहिक आत्मसमर्पण टॉप नक्सली लीडर हिड़मा के मारे जाने के बाद संगठन में पैदा हुए नेतृत्व के खालीपन के बाद हुआ पहला बड़ा सामूहिक सरेंडर है। माना जा रहा है कि इनका आत्मसमर्पण गढ़चिरौली और आसपास के इलाकों में नक्सल गतिविधियों पर प्रभावी रूप से लगाम कसने की दिशा में एक अहम कदम है।
गढ़चिरौली रेंज के DIG अंकित गोयल ने इस सफलता की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लगभग 7-8 दिन पहले माओवादी के MMC जोन (मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़) के प्रवक्ता ने आत्मसमर्पण करने की इच्छा जाहिर की थी। उस प्रवक्ता ने तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को अपनी इच्छा जताते हुए दो चिट्ठियाँ भी लिखी थीं।
डीआईजी गोयल ने कहा, “उनकी इस इच्छा को ध्यान में रखते हुए, हमने उनसे संपर्क साधा। इसके बाद वे अपने 10 साथियों सहित सरेंडर करने पहुंच गए।” उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले इन लोगों ने सुरक्षा बलों को 7 हथियार भी सौंपे हैं। ये सभी सीपीआई (माओवादी) के सदस्य हैं।
डीआईजी अंकित गोयल ने आगे कहा कि यह घटना समन्वित पुलिसिंग (Coordinated Policing) और नक्सलियों को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए चलाए जा रहे आउटरीच प्रोग्राम (Outreach Program) की बढ़ती कामयाबी को दर्शाती है। सरेंडर करने वाले सभी नक्सलियों को महाराष्ट्र सरकार की पुनर्वास नीति (Rehabilitation Policy) के तहत प्रोसेस किया जाएगा, जिससे वे सामान्य जीवन में वापस लौट सकें।
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