तेलुगू में लिए इस पर्चे में लिखा है कि 24 मार्च को हैदराबाद में संगठन की एक बैठक हुई थी. जिसमें तय किया गया कि बिना किसी शर्त के शांति वार्ता के लिए आगे आने और बातचीत कर युद्धविराम की घोषणा करनी चाहिए.
अभय के पर्चे में लिखा है कि छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने शांति वार्ता के लिए पहल की थी. जब हमारे दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के सदस्य और माओवाद संगठन के प्रतिनिधि विकल्प ने शांति वार्ता के लिए अपनी शर्तें रखी थी कि जवानों को कैंप तक ही रखा जाए, ऑपरेशन को बंद किया जाए. जिसके बाद बातचीत करेंगे. इन शर्तों का जवाब दिए बगैर लगातार ऑपरेशन चलाए गए.
नक्सलियों ने ये भी कहा कि पिछले 15 महीने में हमारे 400 से अधिक नेता, कमांडर, PLGA के विभिन्न स्तर के लड़ाके मारे गए हैं. सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया और उन्हें जेल में डाल दिया गया है. ऐसे में अब जनता के हित में हम सरकार से शांति वार्ता के लिए तैयार हैं.
नक्सलियों ने रखा ये प्रस्ताव
नक्सली लीडर अभय ने कहा कि हम केंद्र और राज्य सरकार के सामने शांति वार्ता के लिए प्रस्ताव रख रहे हैं. हमारा प्रस्ताव है कि केंद्र और राज्य सरकारें झारखंड, मध्य प्रदेश ,छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र (गढ़चिरौली), ओडिशा और तेलंगाना में ऑपरेशन कगार के नाम पर हत्याओं और नरसंहार को रोकें. नए सशस्त्र बलों के कैंप की स्थापना रोकें. यदि केंद्र और राज्य सरकारें इन प्रस्तावों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देती हैं, तो हम तुरंत युद्धविराम की घोषणा कर देंगे.