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NCERT syllabus change : NCERT ने 8वीं कक्षा के सोशल साइंस सिलेबस में किए 5 बड़े बदलाव, मुगलों की ‘क्रूरता’ और मंदिर विध्वंस पर फोकस

NCERT syllabus change : नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने कक्षा 8 की सोशल साइंस पुस्तक ‘समाज की खोज: भारतीय और उससे परे’ में बड़ा बदलाव किया है। यह संशोधन राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और नए नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) के तहत किया गया है। NCERT ने बताया है कि सिलेबस में शामिल किए गए नए विषयों का उद्देश्य छात्रों को ऐतिहासिक घटनाओं की वास्तविकता से अवगत कराना है, लेकिन साथ ही यह भी चेतावनी दी गई है कि अतीत की किसी भी घटना के लिए वर्तमान समय में किसी को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए। इस नए सिलेबस के आधार पर संशोधित किताबें अब देशभर के स्कूलों में भेजी जा चुकी हैं।

बाबर, अकबर और मुगलों की क्रूरता पर डाला गया नया प्रकाश

संशोधित सिलेबस में 13वीं से 17वीं शताब्दी के इतिहास को प्रमुखता से शामिल किया गया है, जिसमें दिल्ली सल्तनत, मुगल सम्राटों की नीतियों, उनकी असहिष्णुता, मंदिर विध्वंस और सिख समुदाय के उदय तक की घटनाएं शामिल हैं। खास बात यह है कि मुगल शासकों के अत्याचारों और उनके क्रूर सैन्य अभियानों पर विशेष जोर दिया गया है। बाबर और अकबर जैसे शासकों की क्रूरता, हिंदू मंदिरों के विनाश और गैर-मुस्लिमों पर अत्याचार का विवरण नए पाठ्यक्रम का हिस्सा बना है।

नई किताब में दिल्ली सल्तनत काल के दौरान मंदिरों पर हुए हमलों का विस्तार से वर्णन किया गया है। विशेष रूप से अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति मलिक काफूर द्वारा दक्षिण भारत के श्रीरंगम, मदुरै, चिदंबरम और रामेश्वरम में हिंदू मंदिरों पर किए गए हमलों का विवरण दिया गया है। किताब में यह भी बताया गया है कि इन हमलों का उद्देश्य सिर्फ लूटपाट नहीं था, बल्कि मूर्तिभंजन यानी धार्मिक प्रतीकों का नाश भी था। बौद्ध, जैन और हिंदू मंदिरों को तोड़ा गया, और पूजनीय मूर्तियों को अपवित्र किया गया।

जजिया कर पर नई व्याख्या

संशोधित सिलेबस में ‘जजिया’ कर का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है। पहले इसे सिर्फ गैर-मुस्लिमों से लिया जाने वाला एक भूमि कर बताया गया था, लेकिन अब इसे सार्वजनिक अपमान और जबरन धर्म परिवर्तन को प्रोत्साहित करने वाला कर बताया गया है। नई किताब में यह भी कहा गया है कि इस कर को लगाकर सुल्तानों ने गैर-मुस्लिमों को इस्लाम अपनाने की ओर मजबूर किया। यह विवरण पहले की कक्षा 7 की किताब में इस तरह नहीं दिया गया था।

बाबर को बताया गया क्रूर शासक

बाबर के बारे में नया सिलेबस बताता है कि उसकी आत्मकथा उसे एक जिज्ञासु व्यक्ति के रूप में पेश करती है, लेकिन साथ ही वह बेहद क्रूर था। उसने लोगों का नरसंहार किया, महिलाओं और बच्चों को गुलाम बनाया और मारे गए लोगों की ‘खोपड़ियों की मीनारें’ बनवाने में गर्व महसूस किया। पुराने सिलेबस में बाबर को केवल एक सैन्य विजेता के रूप में दिखाया गया था, जिसने काबुल, दिल्ली और आगरा पर कब्जा किया था, लेकिन नई किताब में उसके अत्याचारों को भी प्रमुखता से रखा गया है।

अकबर की जीत में भी दिखी क्रूरता

अकबर को लेकर नया सिलेबस एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाता है। एक ओर जहां चित्तौड़गढ़ पर किए गए हमले और करीब 30,000 लोगों के नरसंहार का उल्लेख है, वहीं दूसरी ओर उसके शासनकाल में दिखाई गई सहिष्णुता का भी वर्णन किया गया है। किताब में बताया गया है कि चित्तौड़गढ़ की विजय के बाद अकबर ने संदेश भेजा था कि हमारी सेना ने काफिरों के किलों पर कब्जा कर लिया और इस्लाम की स्थापना की। लेकिन बाद में उसी अकबर ने विभिन्न धर्मों के लोगों को प्रशासन में स्थान देकर सहिष्णुता का परिचय दिया।

औरंगजेब के फरमानों में दिखा धार्मिक पक्षपात

औरंगजेब के बारे में नए सिलेबस में कहा गया है कि वह प्रशासन में राजनीतिक नियमों का पालन करता था, लेकिन उसके फरमानों से उसकी धार्मिक कट्टरता भी झलकती है। किताब में उल्लेख है कि उसने बनारस, मथुरा, सोमनाथ जैसे पवित्र हिंदू तीर्थों पर स्थित मंदिरों को नष्ट करवाया। साथ ही जैन मंदिरों और सिख गुरुद्वारों को भी निशाना बनाया गया। यह भी बताया गया है कि औरंगजेब ने कुछ मंदिरों को अनुदान भी दिया था, लेकिन उसके कई निर्णय धार्मिक पूर्वाग्रह से प्रेरित थे।

NCERT द्वारा कक्षा 8 की सोशल साइंस किताब में किए गए ये बदलाव इतिहास की घटनाओं को अधिक विवरणात्मक और यथार्थवादी दृष्टिकोण से पेश करने का प्रयास हैं। हालांकि यह बदलाव इतिहास की गहराई को उजागर करते हैं, परन्तु इन पर राजनीतिक और वैचारिक बहस भी शुरू हो चुकी है। अब यह देखना होगा कि शिक्षक और छात्र इन बदलावों को किस प्रकार से ग्रहण करते हैं और यह शिक्षा व्यवस्था को किस दिशा में प्रभावित करते हैं।

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