NCLAT WhatsApp Order
NCLAT WhatsApp Order: राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) यानी नेशनल कंपनी लॉ अपैलेट ट्रिब्यूनल ने WhatsApp (व्हाट्सऐप) से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट कर दिया है कि प्राइवेसी और यूज़र्स की सहमति से संबंधित उसके निर्देश केवल विज्ञापन (Advertising) तक सीमित नहीं रहेंगे। ये निर्देश विज्ञापन के साथ-साथ गैर-विज्ञापन जैसे अन्य उद्देश्यों के लिए भी समान रूप से लागू होंगे। एनसीएलएटी ने यह फैसला भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा दायर एक स्पष्टीकरण याचिका पर पारित अपने आदेश में दिया। न्यायाधिकरण ने कहा कि अपीलकर्ता (व्हाट्सऐप और उसकी संचालक कंपनी मेटा) यूज़र्स के डेटा पर एकतरफा या खुले अधिकार का दावा नहीं कर सकते हैं।
एनसीएलएटी ने अपने निर्णय में इस बात को दोहराया कि यूज़र्स को यह तय करने का अधिकार होना चाहिए कि उनका कौन-सा डेटा, किस मकसद से और कितने समय के लिए इकट्ठा किया जाएगा। न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि विज्ञापन के इरादे से किसी भी गैर-ज़रूरी डेटा कलेक्शन के लिए संबंधित यूज़र्स की स्पष्ट और वापस ली जा सकने वाली सहमति (Explicit and Revocable Consent) आवश्यक होगी।
अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक भूषण और सदस्य अरुण बरोका की दो-सदस्यीय बेंच ने टिप्पणी की कि यदि यूज़र्स को सामान्य फीचर या वैकल्पिक फीचर का इस्तेमाल करते समय किसी भी स्तर पर डेटा साझा करने से ‘ऑप्ट-इन’ या ‘ऑप्ट-आउट’ का विकल्प दिया जाता है, तो उनके अधिकार हर समय सुरक्षित रहते हैं और किसी भी प्रकार के शोषण की स्थिति समाप्त होती है। यह आदेश यूज़र्स की डेटा गोपनीयता के अधिकार को मज़बूत करता है।
इस गहन विश्लेषण को आधार बनाते हुए, एनसीएलएटी ने CCI की याचिका को स्वीकार कर लिया। न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि 18 नवंबर 2024 के CCI आदेश में निहित उपचारात्मक निर्देश व्हाट्सऐप यूज़र डेटा के सभी गैर-व्हाट्सऐप उद्देश्यों—चाहे वे विज्ञापन से संबंधित हों या गैर-विज्ञापन से—पर लागू होंगे।
एनसीएलएटी ने व्हाट्सऐप को इस आदेश पर अमल करने और अपने प्लेटफॉर्म में ज़रूरी बदलाव लागू करने के लिए तीन महीने का समय दिया है। यह समय-सीमा कंपनी को यूज़र्स की सहमति और डेटा कलेक्शन नीतियों में आवश्यक परिवर्तन करने के लिए दी गई है, ताकि वह सीसीआई और एनसीएलएटी के निर्देशों का पालन कर सके।
इससे पहले, 4 नवंबर को एनसीएलएटी ने व्हाट्सऐप को आंशिक राहत दी थी। न्यायाधिकरण ने CCI के फैसले के उस हिस्से को निरस्त कर दिया था, जिसमें मेटा के साथ विज्ञापन उद्देश्यों के लिए डेटा साझा करने पर पाँच साल का प्रतिबंध लगा दिया गया था। हालांकि, 213 करोड़ रुपये का जुर्माना बरकरार रखा गया था।
एनसीएलएटी ने व्हाट्सऐप की 2021 की डेटा नीति को प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 4(2)(ए)(आई) और 4(2)(सी) का उल्लंघन मानते हुए, बाज़ार में अपने प्रभुत्व के दुरुपयोग की पुष्टि की थी। CCI ने नवंबर 2024 में मेटा पर 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था, जिसके खिलाफ मेटा और व्हाट्सऐप ने एनसीएलएटी में चुनौती दी थी। ताज़ा आदेश इस कानूनी लड़ाई में यूज़र्स की प्राइवेसी के पक्ष में एक और मजबूत कदम है।
Viral Story: आजकल इंस्टाग्राम और एक्स (ट्विटर) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 'सेल्फ-मेड' करोड़पतियों की…
Stock Market Rally Today: भारतीय शेयर बाजार के लिए नए वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत…
Diesel Price Hike Today: देशभर में पहले से ही प्रीमियम पेट्रोल की आसमान छूती कीमतों…
How to become IAS without UPSC: भारत में आईएएस (IAS) बनना लाखों युवाओं के लिए…
Iran vs USA 2026: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान के विदेश…
Jana Nayagan Release Date: दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार थलपति विजय के करोड़ों प्रशंसकों के…
This website uses cookies.