Nectar Lifesciences Stock Surge
Nectar Lifesciences Stock Surge: भारतीय शेयर बाजार में पिछले कारोबारी सत्र, गुरुवार, 4 दिसंबर को एक स्मॉलकैप फार्मा कंपनी नेक्टर लाइफसाइंसेज लिमिटेड के शेयरों में जबरदस्त उछाल दर्ज की गई। एक ही दिन में कंपनी के शेयरों की कीमत अचानक 18 प्रतिशत तक उछल गई, जिसने निवेशकों को चौंका दिया।
यह उछाल इसलिए भी उल्लेखनीय है, क्योंकि कंपनी के शेयरों में पिछले एक साल से लगातार गिरावट देखने को मिल रही थी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल सितंबर से लेकर इस अचानक उछाल तक, कंपनी के शेयर मूल्य में लगभग 75 फीसदी तक की भारी गिरावट आ चुकी थी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस अचानक आई तेजी के पीछे कंपनी के निदेशक मंडल (बोर्ड) का एक बड़ा फैसला हो सकता है।
सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन, गुरुवार, 4 दिसंबर को बीएसई (BSE) पर कंपनी के शेयर 16.85 प्रतिशत या 3.02 रुपये की महत्वपूर्ण तेजी दर्ज करते हुए बंद हुए।
सत्र समाप्ति मूल्य: ₹21.05 (लगभग)
दिन का उच्चतम स्तर (High): दिन के कारोबार के दौरान कंपनी के शेयरों ने ₹21.19 का उच्चतम स्तर छुआ था।
दिन का निम्नतम स्तर (Low): शेयरों का निम्नतम स्तर ₹19.76 रहा था।
52-सप्ताह का उच्चतम स्तर: ₹44.90
52-सप्ताह का निम्नतम स्तर: ₹13.25
इस उछाल ने निवेशकों को राहत दी है, खासकर उन लोगों को जो पिछले एक साल से शेयर मूल्य में आई भारी गिरावट से चिंतित थे।
नेक्टर लाइफसाइंसेज के शेयरों में अचानक आई इस तेजी के पीछे कंपनी के बोर्ड का एक रणनीतिक फैसला माना जा रहा है। कंपनी ने शेयर बायबैक (Share Buyback) की योजना बनाई है, जिसने बाजार में सकारात्मक प्रतिक्रिया पैदा की है।
नेक्टर लाइफसाइंसेज लिमिटेड ने ₹27 रुपये प्रति शेयर की दर से 81 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर वापस खरीदने की योजना तैयार की है। इस योजना के तहत 3 करोड़ फुली पेड अप इक्विटी शेयरों को शामिल किया गया है।
कंपनी ने इक्विटी बायबैक के लिए 24 दिसंबर की तारीख को रिकॉर्ड डेट तय किया है। रिकॉर्ड डेट वह तारीख होती है, जिस दिन कंपनी यह तय करती है कि कौन से शेयरधारक बायबैक या लाभांश जैसी कॉर्पोरेट कार्रवाई के पात्र होंगे।
इस बायबैक फैसले का कंपनी की शेयरहोल्डिंग संरचना पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा:
प्रमोटर की हिस्सेदारी में बढ़ोतरी: बायबैक के बाद कंपनी में प्रमोटर की हिस्सेदारी बढ़कर 51.84 फीसदी हो जाएगी।
पब्लिक हिस्सेदारी में कमी: वहीं, पब्लिक (आम निवेशकों) की हिस्सेदारी 55.09 फीसदी से घटकर 48.16 प्रतिशत रह जाएगी।
शेयर बायबैक आमतौर पर कंपनी के प्रबंधन के विश्वास को दर्शाता है कि शेयर का मूल्यांकन कम है। यह अक्सर प्रति शेयर आय (EPS) को बढ़ाता है और प्रमोटर की हिस्सेदारी को मजबूत करता है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ता है। यही कारण है कि इस घोषणा ने शेयरों में इतनी बड़ी तेजी ला दी है।
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