Neha Bora Delhi High Court : ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। याचिका में स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की ओर से जारी उस नोटिस को चुनौती दी गई है, जिसमें उनसे 10,000 रुपये का पर्सनल बॉन्ड भरने और शांति बनाए रखने के लिए कहा गया है। नेहा बोरा की ओर से पेश वकील गोपाल शंकरनारायणन ने नोटिस को असंवैधानिक और कानूनी रूप से गलत बताया।
कोर्ट ने उठाया अधिकार क्षेत्र और प्रक्रिया का सवाल
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत उठाए गए मुद्दे पर विचार करने के बजाय क्या संबंधित प्रक्रिया के तहत मजिस्ट्रेट को ही मामले की जांच नहीं करनी चाहिए। अदालत ने धारा 135(3) का उल्लेख करते हुए पूछा कि क्या सुनवाई को विस्तार दिया जाए या धारा 126 के नोटिस और उसमें दर्ज कारणों तक सीमित रखा जाए। कोर्ट की टिप्पणी का केंद्र यह था कि नोटिस जारी होने के बाद संबंधित प्रक्रिया और मजिस्ट्रेट की भूमिका को किस तरह देखा जाना चाहिए।
वकील ने नोटिस को बताया ‘कट एंड पेस्ट’
गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि नोटिस सामान्य प्रारूप में तैयार किया गया है और उसमें मामले के तथ्यों पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया। उनके मुताबिक, किसी व्यक्ति से पर्सनल बॉन्ड मांगने से पहले आवश्यक जांच पूरी होनी चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की सात न्यायाधीशों वाली पीठ के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जांच पूरी होने से पहले मजिस्ट्रेट को बॉन्ड भरने के लिए बाध्य नहीं करना चाहिए। ये दलीलें याचिकाकर्ता की ओर से पेश की गईं; इन पर अदालत का अंतिम निर्णय उपलब्ध विवरण में स्पष्ट नहीं है।
नेहा बोरा ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया था: वकील
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि नेहा बोरा ने कभी हिंसा भड़काने की अपील नहीं की। उनके अनुसार, नेहा सरकार के फैसलों के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध और सुधारों की मांग कर रही थीं। वकील ने बताया कि 15 अक्टूबर को नेहा ने प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इसके अगले दिन, 16 अक्टूबर को जंतर-मंतर को अचानक डिनोटिफाई किए जाने के विरोध में उन्होंने मंडी हाउस में बैठक बुलाने की अपील की थी। वकील के मुताबिक, सोशल मीडिया पोस्ट में कानून तोड़ने या शांति भंग करने का आह्वान नहीं था।
कनॉट प्लेस प्रदर्शन से संबंध पर दी सफाई
गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत में कहा कि कनॉट प्लेस में हुए प्रदर्शन का आयोजन किसी अन्य संगठन ने किया था। उनके अनुसार, नेहा बोरा ने केवल मंडी हाउस में बैठक का आह्वान किया था। उन्होंने नोटिस में बिना अनुमति राष्ट्रीय ध्वज फहराने के उल्लेख पर भी सवाल उठाया। वकील का तर्क था कि तिरंगा फहराने के लिए हर परिस्थिति में अनुमति अनिवार्य नहीं होती। यह उनका पक्ष है; इस मुद्दे पर किसी न्यायिक निष्कर्ष की पुष्टि उपलब्ध विवरण से नहीं होती।
SEM की भूमिका और आगे की सुनवाई पर नजर
वकील ने यह सवाल भी उठाया कि प्रक्रिया वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर शुरू हुई, जबकि नोटिस जारी करने वाला स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट स्वयं ACP स्तर का पुलिस अधिकारी है। याचिका में नोटिस की वैधता और अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। अब मामले में अदालत की आगे की सुनवाई और आदेश महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल, नेहा बोरा की दलीलों और अदालत की ओर से उठाए गए सवालों के आधार पर मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
Read More : Om Birla Statement : CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव पर ओम बिरला का बयान, बोले- नियमों के अनुसार होगी कार्रवाई