नई दिल्ली @thetarget365 : हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी बंगले में पिछले हफ्ते आग लगने के बाद भारी मात्रा में नकदी मिलने से हड़कंप मच गया. इस घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने गुरुवार रात एक आपात बैठक की और जस्टिस वर्मा को दिल्ली हाईकोर्ट से वापस उनके मूल कोर्ट, इलाहाबाद हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने का फैसला लिया. सूत्रों के मुताबिक, कॉलेजियम इस मामले में जज के खिलाफ एक आंतरिक जांच शुरू कर दी है. इसके साथ ही दिल्ली हाईकोर्ट से इस बारे में रिपोर्ट भी मांगी गई है. मजेदार बात यह है कि कैश की यह बरामदगी न तो सीबीआई-ईडी ने और नहीं पुलिस ने किया है. बल्कि इसकी बरामदगी दिल्ली के फायर ब्रिगेड डिपार्टमेंट ने किया.
14 मार्च की रात करीब 11:30 बजे दिल्ली के तुगलक रोड पर जस्टिस यशवंत वर्मा के घर में आग लगने की सूचना मिली. उस वक्त जज शहर में नहीं थे. वह होली मनाने के लिए कहीं गए हुए थे. उनके परिवार वालों ने फायर ब्रिगेड और पुलिस को बुलाया. आग बुझाने के दौरान फायर ब्रिगेड को एक कमरे में भारी मात्रा में नकदी मिली. यह देखकर सब हैरान रह गए. इसके बाद दिल्ली पुलिस ने इसकी जानकारी गृह मंत्रालय को दी और एक रिपोर्ट भेजी. गृह मंत्रालय ने यह रिपोर्ट भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना को भेज दी. इस गंभीर मामले को देखते हुए सीजेआई ने 20 मार्च को कॉलेजियम की बैठक बुलाई और जस्टिस वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट वापस भेजने का प्रस्ताव पास किया.
सूत्रों के अनुसार सीजेआई संजीव खन्ना ने इस नकदी की बरामदी को बहुत गंभीरता से लिया. गृह मंत्रालय और अन्य जगहों से जज के खिलाफ नकारात्मक रिपोर्ट मिलने के बाद कॉलेजियम ने सर्वसम्मति से उनके ट्रांसफर का फैसला किया. जस्टिस वर्मा अक्टूबर 2021 में इलाहाबाद हाईकोर्ट से दिल्ली हाईकोर्ट आए थे. अब उन्हें वापस उनके मूल कोर्ट भेजा जा रहा है. इसके अलावा, कॉलेजियम इस बात पर भी विचार कर रहा है कि जज के खिलाफ एक आंतरिक जांच शुरू की जाए या नहीं.
इस विवाद के बीच जस्टिस यशवंत वर्मा शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए नहीं आए. उनके स्टाफ ने कोर्ट में आकर बताया कि जज आज कोर्ट नहीं संभालेंगे. इस खबर से कानूनी हलकों में चर्चा तेज हो गई है.
सुप्रीम कोर्ट ने 1999 में जजों के खिलाफ भ्रष्टाचार, गलत काम या अनियमितता के आरोपों से निपटने के लिए कुछ नियम बनाए थे. इन नियमों के तहत, अगर किसी जज के खिलाफ शिकायत आती है, तो पहले मुख्य न्यायाधीश उस जज से जवाब मांगेंगे. अगर जवाब संतोषजनक नहीं हुआ या मामला गंभीर लगा, तो एक आंतरिक समिति बनाई जाएगी. अगर जांच में समिति को लगता है कि गलती इतनी बड़ी है कि जज को हटाना चाहिए, तो उसे इस्तीफा देने के लिए कहा जाएगा. अगर जज इस्तीफा नहीं देता, तो आगे की कार्रवाई शुरू हो सकती है.
जस्टिस वर्मा के बंगले में आग लगने की सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस और पुलिस मौके पर पहुंची. आग बुझाने के बाद जब कमरे की तलाशी ली गई, तो वहां नकदी का ढेर मिला. यह नकदी कहां से आई और कितनी थी, इसकी अभी पूरी जानकारी नहीं मिली है. लेकिन इस खोज ने पुलिस, गृह मंत्रालय और सुप्रीम कोर्ट को तुरंत हरकत में ला दिया.
यह घटना न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठा रही है. कॉलेजियम का यह फैसला जजों की साख को बचाने की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है. अगर जांच शुरू हुई, तो यह पता चलेगा कि नकदी का स्रोत क्या था और क्या इसमें कोई गलत काम शामिल था. फिलहाल, जस्टिस वर्मा की ओर से इस मामले पर कोई बयान नहीं आया है. यह मामला आने वाले दिनों में और चर्चा में रह सकता है.
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