Nepal Flood: नेपाल में आई भीषण बाढ़ और तबाही के बीच प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने शुक्रवार को विदेशी सहयोग को लेकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने फेसबुक पोस्ट के जरिए कहा कि नेपाल द्वारा विदेशी सहायता को अस्वीकार किए जाने की खबरें भ्रामक हैं। शाह ने बताया कि भारत, चीन और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ बचाव एवं राहत अभियान के लिए जरूरी सामग्री और सहयोग को लेकर लगातार समन्वय किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता प्रभावित लोगों तक जल्द से जल्द सहायता पहुंचाना है।
15 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी राहत कार्य में तैनात
प्रधानमंत्री शाह के अनुसार, खोज और बचाव अभियान में कुल 15,431 सुरक्षाकर्मी लगाए गए हैं। इनमें नेपाल पुलिस के 4,473, नेपाली सेना के 6,755 और सशस्त्र पुलिस बल के 4,203 जवान शामिल हैं। इनकी तैनाती रसुवा और भोटेकोशी-त्रिशूली कॉरिडोर समेत प्रभावित इलाकों में की गई है। सुरक्षा बलों की मदद से लापता लोगों की तलाश, बचाव और राहत सामग्री पहुंचाने का काम लगातार जारी है।
4,451 लोगों को अब तक सुरक्षित निकाला गया
सरकार के मुताबिक अब तक 4,451 लोगों का रेस्क्यू किया जा चुका है। इनमें जलविद्युत सुरंगों से बचाए गए 191 लोग भी शामिल हैं। शुक्रवार को हवाई अभियान के दौरान 517 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। नेपाली सेना और निजी क्षेत्र के कुल 16 हेलिकॉप्टर लगातार धुंचे, त्रिशूली, टिमुरे और स्याफ्रुबेँसी जैसे क्षेत्रों में उड़ानें भर रहे हैं। अब तक 99 हवाई उड़ानें संचालित की जा चुकी हैं।
राहत सामग्री से भरे 32 ट्रक प्रभावित इलाकों में भेजे
बचाव अभियान के साथ-साथ प्रभावित लोगों तक जरूरी सामान पहुंचाने पर भी जोर दिया जा रहा है। सरकार ने खाद्य और गैर-खाद्य सामग्री से भरे 32 ट्रक प्रभावित क्षेत्रों के लिए भेजे हैं। इसके अलावा हेलिकॉप्टरों के जरिए छह उड़ानों में राहत सामग्री पहुंचाई गई। दूरदराज के इलाकों में संचार व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक संचार उपकरण भी भेजे गए हैं।
सुरंगों में फंसे लोगों को बचाना पहली प्राथमिकता
प्रधानमंत्री ने बताया कि विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे नागरिकों और कर्मचारियों को सुरक्षित निकालना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। अपर त्रिशूली जलविद्युत परियोजना और रसुवागढ़ी जलविद्युत केंद्र समेत जोखिम वाली सुरंगों में खोज अभियान जारी है। इसके लिए विशेष बचाव उपकरण और प्रशिक्षित टीमों को तैनात किया गया है।
त्रिशूली-नारायणी कॉरिडोर में खोज अभियान तेज
लापता लोगों और संभावित शवों की तलाश को निचले तटीय क्षेत्रों तक भी बढ़ाया गया है। रसुवा से नुवाकोट और धादिंग होते हुए गोरखा, तनहुँ, चितवन और नवलपरासी तक त्रिशूली-नारायणी नदी कॉरिडोर में अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी लगाए गए हैं। सरकार का उद्देश्य नदी के किनारे और प्रभावित इलाकों में किसी भी लापता व्यक्ति का पता लगाना है।
विदेशी नागरिकों के लिए बनाया गया विशेष समन्वय तंत्र
नेपाल में प्रभावित विदेशी नागरिकों और पर्यटकों की खोज तथा पहचान के लिए भी विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अब तक 129 विदेशी नागरिकों और पर्यटकों को बचाकर उनकी पहचान की जा चुकी है। विदेश मंत्रालय ने संबंधित दूतावासों और परिवारों के साथ संपर्क बनाए रखने के लिए इमरजेंसी कंट्रोल रूम सक्रिय किया है।
दोबारा बाढ़ के खतरे पर लगातार नजर
भोटेकोशी और निचले तटीय क्षेत्रों में फिर से बाढ़ आने की आशंका को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी गई है। संभावित जोखिम वाले इलाकों में लोगों को पहले से चेतावनी देने और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की गई है। सरकार के मुताबिक दो लाख से अधिक SMS अलर्ट भेजकर लोगों को खतरे के प्रति सचेत किया गया है।
सड़क संपर्क बहाल करने का काम जारी
बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़क और पुलों के कारण कई इलाकों का संपर्क प्रभावित हुआ था। सरकार ने वैकल्पिक मार्ग तैयार कर छोटे चारपहिया वाहनों की आवाजाही शुरू कराई है। वहीं काठमांडू-मुग्लिन सड़क को एकतरफा यातायात के लिए खोल दिया गया है। रसुवा को भी वैकल्पिक सड़क मार्ग से जोड़ने का प्रयास किया गया है।
भारत से बैली ब्रिज की मांग
क्षतिग्रस्त पुलों के स्थान पर बाइपास तैयार करने का काम चल रहा है। नियमित सड़क संपर्क बहाल करने के लिए नेपाल ने भारत से 48 मीटर लंबे 10 बैली ब्रिज उपलब्ध कराने की औपचारिक पहल की है। इससे प्रभावित इलाकों में आवागमन और राहत सामग्री की आपूर्ति को गति मिलने की उम्मीद है।
स्वास्थ्य, बिजली और दूरसंचार सेवाओं पर जोर
सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को जारी रखने के लिए स्वास्थ्य आपातकालीन संचालन केंद्र सक्रिय किया है। छह अस्पतालों को स्टैंडबाय रखा गया है और मेडिकल टीमें प्रभावित इलाकों में भेजी गई हैं। दूरसंचार के 198 प्रभावित टावरों में से 145 चालू हो चुके हैं। वहीं नुवाकोट के करीब 90 प्रतिशत हिस्से में बिजली आपूर्ति बहाल होने की जानकारी दी गई है।
राहत और पुनर्वास के लिए आर्थिक मदद
बाढ़ प्रभावित 15 स्थानीय निकायों को तत्काल राहत और बचाव के लिए कुल 6 करोड़ 75 लाख नेपाली रुपये उपलब्ध कराए गए हैं। प्रधानमंत्री दैवी प्रकोप राहत कोष में करीब 36 घंटे के भीतर 1.9 अरब नेपाली रुपये से अधिक जमा होने की जानकारी दी गई। प्रभावित परिवारों और कारोबारियों के लिए राहत, पुनर्वास और बिजनेस रिकवरी पैकेज तैयार किए जा रहे हैं।
सरकार का पूरा ध्यान प्रभावित नागरिकों पर
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने कहा कि फिलहाल सरकार का पूरा ध्यान आपदा प्रभावित नागरिकों की मदद पर केंद्रित है। उनका कहना है कि जमीनी परिस्थितियों का आकलन कर उसी के अनुसार फैसले लिए जा रहे हैं और संसाधन जुटाए जा रहे हैं। राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ रेडक्रॉस, नेपाल स्काउट, स्वयंसेवी संगठनों, निजी क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को भी राहत अभियान में जोड़ा गया है।
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