Nepal Political Crisis : नेपाल में जारी राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ते जन आंदोलन के बीच मंगलवार रात को सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिगडेल ने देश में सैन्य शासन लागू करने की घोषणा की। उन्होंने रात 10 बजे से प्रभावी इस कदम को ‘राष्ट्र की संप्रभुता और जनता की सुरक्षा के लिए आवश्यक’ बताया।

सेना प्रमुख का संबोधन
जनरल सिगडेल ने राष्ट्रीय टेलीविजन पर दिए गए अपने बयान में कहा “नेपाल की सेना हमेशा कठिन से कठिन परिस्थितियों में देश की स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रही है। वर्तमान संकट को देखते हुए सेना को यह कदम उठाना पड़ा है।” उन्होंने चल रहे आंदोलनों के दौरान जान-माल की क्षति पर गहरा दुख व्यक्त किया और युवाओं, विशेष रूप से Gen-Z पीढ़ी से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की। सिगडेल ने कहा कि युवाओं का जोश देश के भविष्य के लिए जरूरी है, लेकिन इसे संविधान और कानून के दायरे में रहकर व्यक्त किया जाना चाहिए।

क्यों लगाया गया सैन्य शासन?
पिछले कुछ हफ्तों से नेपाल में सरकार के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन हो रहे थे। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि सरकार भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और जीवन-यापन की बढ़ती लागत पर त्वरित कदम उठाए। विरोध प्रदर्शनों ने हाल ही में हिंसक रूप ले लिया था, जिसके बाद सुरक्षा स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए यह कड़ा कदम उठाया गया।
क्या होगा अब?
सैन्य शासन लागू होने के साथ ही: रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक कर्फ्यू लागू रहेगा। सभी राजनीतिक गतिविधियों और सार्वजनिक सभाओं पर रोक लगा दी गई है। इंटरनेट सेवाओं और सोशल मीडिया की निगरानी बढ़ा दी गई है।प्रमुख शहरों में अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। नेपाल में सैन्य शासन लागू होने के बाद क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रियाओं का इंतजार किया जा रहा है। भारत, चीन और संयुक्त राष्ट्र जैसे प्रमुख संस्थानों की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में नेपाल की स्थिति पर प्रभाव डाल सकती है।
नेपाल में सैन्य शासन की घोषणा एक ऐतिहासिक और गंभीर मोड़ है। सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिगडेल की शांति की अपील जहां एक ओर आश्वासन देती है, वहीं यह भी संकेत देती है कि देश राजनीतिक संकट के एक संवेदनशील दौर से गुजर रहा है। अब यह देखना अहम होगा कि जनता, राजनीतिक दल और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस निर्णय पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।










