Iran-US Deal : ईरान-अमेरिका समझौते पर नेतन्याहू का कड़ा रुख, परमाणु हथियार और लेबनान पर बड़ा बयान

ईरान और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक परमाणु समझौते ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। लेकिन इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस डील को सिरे से खारिज करते हुए लेबनान से अपनी सेना हटाने से इनकार कर दिया है। क्या नेतन्याहू का यह फैसला इजरायल और अमेरिका के रिश्तों को बदल देगा?

Iran-US Deal : इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार, 18 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में संपन्न हुए शांति समझौते पर अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने एक बेहद सख्त संदेश जारी किया। नेतन्याहू ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक वह इजरायल के प्रधानमंत्री पद पर आसीन हैं, ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह बयान ईरान के परमाणु कार्यक्रम के प्रति उनके दशकों पुराने कठोर रुख को फिर से दोहराता है। नेतन्याहू इसे अपने राजनीतिक और राष्ट्रीय जीवन का सबसे बड़ा ‘मिशन’ मानते हैं, जिसके लिए उन्होंने अतीत में ईरान को न केवल सार्वजनिक धमकियां दी हैं, बल्कि सीधे सैन्य हमले तक किए हैं।

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दक्षिणी लेबनान में डटी रहेगी इजरायली सेना

अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य के बावजूद, प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपनी सुरक्षा प्राथमिकताओं को लेकर कोई समझौता नहीं करने की बात कही है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि इजरायली रक्षा बल (IDF) दक्षिणी लेबनान से पीछे नहीं हटेंगे। ‘टाइम्स ऑफ इजरायल’ की रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू ने जोर देकर कहा कि इजरायल की उत्तरी सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दक्षिणी लेबनान में ‘सिक्योरिटी जोन’ बनाए रखना अत्यंत अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक इजरायल की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए वहां मौजूदगी जरूरी है, तब तक सेना एक इंच भी पीछे नहीं हटेगी।

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अमेरिका-इजरायल की रणनीतिक साझेदारी का महत्व

अति संवेदनशील दौर में, बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका के साथ अपने संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया है। ‘एएफपी’ की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने रेखांकित किया कि ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के कठिन समय में अमेरिका ने इजरायल का हर कदम पर साथ दिया है। नेतन्याहू ने कहा, “अमेरिका हमारे साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहा है, और यह एक ऐसी साझेदारी है जिसकी हम गहराई से सराहना करते हैं।” हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि चुनौतियां अभी समाप्त नहीं हुई हैं। आगे के रास्ते के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए बेहद संयम और बुद्धिमानी से फैसले लेने होंगे।

राष्ट्रीय सुरक्षा और शांति के बीच संतुलन

प्रधानमंत्री नेतन्याहू का यह बयान एक ऐसे समय में आया है जब पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र में शांति की नई उम्मीदें और पुरानी आशंकाएं एक साथ मौजूद हैं। नेतन्याहू ने अपनी सरकार की रणनीति स्पष्ट कर दी है: एक तरफ इजरायल के सुरक्षा हितों की किसी भी कीमत पर रक्षा करना, और दूसरी तरफ वाशिंगटन के साथ अपने महत्वपूर्ण सामरिक संबंधों को बनाए रखना। उनके अनुसार, शांति का अर्थ कमजोर होना नहीं, बल्कि अपनी सुरक्षा को अभेद्य बनाना है। नेतन्याहू का यह रुख दर्शाता है कि आने वाले समय में इजरायल अपनी सुरक्षा नीति को लेकर कोई भी नरमी बरतने के मूड में नहीं है, भले ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समीकरण तेजी से बदल रहे हों।

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Chandan Das

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